Kalyug Ke Prabhav Se Kaise Bache: सनातन परंपरा में चार युगों का वर्णन मिलता है, जिसमें सतयुग, त्रेतायुग, द्वापर युग और कलयुग शामिल है. इनमें से वर्तमान में कलयुग चल रहा है. जिसे हिंदू मान्यता के अनुसार अधर्म और पाप का युग माना जाता है. हिंदू मान्यता के अनुसार इसकी शुरुआत महाभारत युद्ध खत्म होने के बाद तब हुई जब पांडवों के राज के बाद राजा परीक्षित ने शासन संभाला. मान्यता है कि एक बार वे पांडवों के खजाने में पहुंचे, जहां पर उन्हें खूबसूरत मुकुट दिखाई दिया. राजा परीक्षित उस मुकुट को धारण करके जंगल में शिकार करने के लिए चले गये. जहां उन्हें एक अजीबोगरीब घटना देखने को मिली. राजा परीक्षित ने देखा कि एक रोती हुई गाय के सामने एक पैर वाला बैल खड़ा है. गाय बैल से यह कहकर रो रही थी कि अब कोई धर्म का पालन नहीं करता है.
तब ऐसे प्रकट हुआ कलयुग

Photo Credit: AI Generated Image @ gemini
जब यह बात राजा परीक्षित ने सुना तो वे उसके पास पहुंचे और एक पैर वाले बैल को देखकर बोले मेरे होते हुए आपके तीन पैर किसने काटे. मुझे बताएं मैं उसे दंड दूंगा. मैं उसे ढूढ़ूंगा - यह कहकर जैसे ही वह आगे बढ़े एक काले रंग का विशालकाय और डरावना पुरुष सामने प्रकट हो गया. तब गाय ने कहा कि यह कलयुग है और यह नहीं चाहता कि बैल का एक पैर भी सुरक्षित रहे. यहां पर यह जानना जरूरी है कि वह बैल कोई सामान्य बैल नहीं बल्कि स्वयं धर्म थे. जिनके तीन पैर - सत्य, दान, दया तीन युग में कट गये थे. अब सिर्फ पवित्रता रूपी पैर ही बचा था.
कलयुग को रहने के लिए मिले 4 स्थान

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राजा ने कलयुग को कहा कि तुम्हें शर्म नहीं आती तुमने इस बैल के तीन पैर काट दिया और चौथा भी काटने जा रहे हो. ऐसा कहते हुए जैसे राजा परीक्षित ने उसे मारने के लिए तलवार उठाई तो कलयुग ने राजा परीक्षित के पैर पकड़ लिए. कलयुग ने कहा कि महाराज मुझे समय के अनुसार आना ही था. अब मैं आपकी शरण में हूंं. आप ही बताएं मैं आखिर कहा जाउं. कलयुग के पैर पकड़ते ही राजा परीक्षित की बुद्धि भ्रष्ट हो गई और उन्होंने उसे रहने के लिए चार जगह - जुआ, सुरापान, परस्त्री गमन और अधर्म पर रहने के लिए स्थान दे दिया, लेकिन कलयुग ने सोचा कि राजा परीक्षित का जुड़ाव तो इन चारों ही चीजों से नहीं है, फिर उसका असर कैसे उन पर होगा.
तब कलयुग सोने पर हुआ सवार

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तब कलयुग ने राजा परीक्षित से कहा कि हे राजन ये सभी चारों चीजें तो गंदी हैं, कोई एक अच्छी जगह भी मुझे रहने के लिए दे दीजिए. तब राजा परीक्षित के मुंह से अचानक उन्हें स्वर्ण पर रहने का अधिकार दे दिया. उस समय राजा परीक्षित ने सोने का मुकुट धारण किया था और वह मुकुट भी राजा जरासंध को मारकर भीम ने खजाने में रखा था. ऐसे में कलयुग मौका पाते ही राजा परीक्षित के भीतर प्रवेश कर गया और उनके अंत का कारण बना.
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कलयुग से बचने का उपाय
हिंदू मान्यता के अनुसार कलयुग के प्रभाव से बचने के लिए व्यक्ति को अधिक से अधिक अपने हरि नाम या फिर आराध्य देवी-देवता के मंत्र का जप करना चाहिए. इसी प्रकार व्यक्ति को उन चीजों से दूरी बनाई रखनी होगी जहां पर इस कलयुग का वास माना गया है, जैसे - जुआ, शराब, परस्त्री गमन और अधार्मिक कार्य. कलयुग में जहां इन बातों का ख्याल रखकर उसके दुष्प्रभाव से बच सकते हैं, वहीं जरूरतमंद लोगों को समय-समय पर दान करके पुण्यफल प्रदान कर सकते हैं.
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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