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ज्येष्ठ गौरी पूजा आज, यहां पढ़ें मां गौरी की आरती

इस साल 17 सितंबर को गौरी आवाहन, 18 सितंबर को ज्येष्ठ गौरी पूजा और 19 सितंबर को गौरी विसर्जन होगा. इस दौरान घरों को सजाया जाता है और पारंपरिक पकवान बनाए जाते हैं. पूजा के बाद मां गौरी की आरती जरूर की जाती है. ऐसे में आज मां गौरी की पूजा के बाद आप यहां से आरती पढ़कर पूजा को संपन्न कर सकते हैं.

ज्येष्ठ गौरी पूजा आज, यहां पढ़ें मां गौरी की आरती
मां गौरी की आरती
(Photo Credit: NDTV)

सनातन धर्म में ज्येष्ठ गौरी पूजा का विशेष महत्व माना जाता है. खासकर महाराष्ट्र में ये पर्व खूब धूम-धाम के साथ मनाया जाता है. ज्येष्ठ गौरी पूजा का आयोजन तीन दिनों तक होता है. इसकी शुरुआत गौरी आवाहन से होती है. गणेश चतुर्थी के दो या तीन दिन बाद देवी गौरी को घर लाया जाता है. इसके बाद मां गौरी की विधि-विधान और श्रद्धा के साथ पूजा की जाती है. इसके बाद दूसरे दिन ज्येष्ठ गौरी की मुख्य पूजा होती है. इस दिन देवी को विशेष भोग और नैवेद्य अर्पित किया जाता है. पूजा के बाद परिवार के लोग मां गौरी की आरती करते हैं और सुख-शांति, अच्छे स्वास्थ्य, समृद्धि और परिवार की खुशहाली की प्रार्थना करते हैं. तीसरे दिन मां गौरी का विसर्जन किया जाता है.

इस साल 17 सितंबर को गौरी आवाहन, 18 सितंबर को ज्येष्ठ गौरी पूजा और 19 सितंबर को गौरी विसर्जन होगा. इस दौरान घरों को सजाया जाता है और पारंपरिक पकवान बनाए जाते हैं. पूजा के बाद मां गौरी की आरती जरूर की जाती है. ऐसे में आज मां गौरी की पूजा के बाद आप यहां से आरती पढ़कर पूजा को संपन्न कर सकते हैं.

यह भी देखें- 

मां गौरी की आरती

जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।
तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी।।
ॐ जय अम्बे गौरी।।

मांग सिंदूर विराजत, टीको मृगमद को।
उज्ज्वल से दोउ नैना, चंद्रवदन नीको ॥।
ॐ जय अम्बे गौरी।।

कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै।
रक्तपुष्प गल माला, कंठन पर साजै॥
ॐ जय अम्बे गौरी।।

केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्पर धारी।
सुर-नर-मुनिजन सेवत, तिनके दुखहारी।।
ॐ जय अम्बे गौरी।।

कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती।
कोटिक चंद्र दिवाकर, सम राजत ज्योती।।
ॐ जय अम्बे गौरी।।

शुंभ-निशुंभ बिदारे, महिषासुर घाती।
धूम्र विलोचन नैना, निशदिन मदमाती॥
ॐ जय अम्बे गौरी।।

चण्ड-मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे।
मधु-कैटभ दोउ मारे, सुर भयहीन करे॥
ॐ जय अम्बे गौरी।।

ब्रह्माणी, रूद्राणी, तुम कमला रानी।
आगम निगम बखानी, तुम शिव पटरानी।।
ॐ जय अम्बे गौरी।।

चौंसठ योगिनी मंगल गावत, नृत्य करत भैरों।
बाजत ताल मृदंगा, अरू बाजत डमरू ॥
ॐ जय अम्बे गौरी।।

तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता,
भक्तन की दुख हरता, सुख संपति करता॥
ॐ जय अम्बे गौरी।।

भुजा चार अति शोभित, वर मुद्रा धारी।
मनवांछित फल पावत, सेवत नर नारी॥
ॐ जय अम्बे गौरी।।

कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती।
श्रीमालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योती।।
ॐ जय अम्बे गौरी।।

श्री अंबेजी की आरती, जो कोइ नर गावे।
कहत शिवानंद स्वामी, सुख-संपत्ति पावे ॥

ॐ जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

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