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राधा रानी की आरती

राधा अष्टमी के दिन भक्त सुबह स्नान करके व्रत और पूजा का संकल्प लेते हैं. इसके बाद राधा रानी और श्रीकृष्ण की पूजा की जाती है. पूजा के अंत में आरती करना विशेष माना जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, आरती के बिना कोई भी पूजा संपन्न नहीं होती है. ऐसे में राधा अष्टमी के दिन पूजा के बाद आप यहां से पढ़कर राधा रानी की आरती कर सकते हैं.

राधा रानी की आरती
यहां पढ़ें राधा रानी की आरती-
(Photo Credit: NDTV)

हिंदू धर्म में भगवान श्रीकृष्ण की आराधना राधा रानी के नाम के बिना अधूरी मानी जाती है. हर साल भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को राधा अष्टमी का पर्व मनाया जाता है. धार्मिक मान्यता है कि इसी पावन तिथि पर राधा रानी का प्राकट्य हुआ था. पंचांग के अनुसार, इस साल भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि  18 सितंबर, शुक्रवार को दोपहर 1 बजकर 2 मिनट से शुरू होगी. वहीं, इसका समापन 19 सितंबर, शनिवार को दोपहर 3 बजकर 28 मिनट पर होगा. ऐसे में उदया तिथि को ध्यान में रखते हुए राधा अष्टमी का पर्व 19 सितंबर, शनिवार को मनाया जाएगा. इस दिन भक्त व्रत रखते हैं और राधा-कृष्ण की विधि-विधान से पूजा करते हैं. सनातन धर्म में कोई भी पूजा आरती के बिना पूरी नहीं मानी जाती है. ऐसे में राधा अष्टमी के दिन पूजा के बाद आप यहां से राधा रानी की आरती पढ़कर गा सकते हैं. 

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यहां पढ़ें राधा रानी की आरती- 

ओ राधा रानी तेरी आरती उतारूं
मैं वारी जाऊं चरणों में।।
आरती उतारूं तेरी, तुमको मनाऊं
सांझ-सवेरे मैं तो शीश नवाऊं।।

ओ राधा रानी तेरी आरती उतारूं,
मैं वारी जाऊं चरणों में।।

वृषभानु की तुम हो दुलारी कीर्ति लाड़ लड़ावे जी
तुम ही रमा, तुम सखी हो प्यारी, बरसानो बतलावे जी
तेरी मंद-मंद मुस्कान पे सब वारूं, बसो रे मन आंगन में।

ओ राधा रानी तेरी आरती उतारूं,
मैं वारी जाऊं चरणों में।।

आंखें तेरी खुलती नहीं रे कर्ता रची क्या माया है
आंख जो खोली तूने राधे-श्याम का दर्शन पाया है 
तेरे नैनों में मैं श्याम को निहारूं ऐसे ही बसो अंखियां में।

ओ राधा रानी तेरी आरती उतारूं,
मैं वारी जाऊं चरणों में।।

ओ राधा लाडली तेरे रूप पर रीझे मनमोहन घनश्याम
कुंज गली में उनकी मुरली बोले केवल राधा नाम 
मैं भी ऐसे तेरे नाम को पुकारूं देखूं छवि तेरी मधुबन में।

ओ राधा रानी तेरी आरती उतारूं,
मैं वारी जाऊं चरणों में।।

राधा लाडली ब्रज की किशोरी कान्हा के मन बसती है 
यमुना तट पर बंसी बजती फूलों में तू हंसती है
रास रचाती कान्हा संग मैं भी बरसाने में आऊं जीवन में।

ओ राधा रानी तेरी आरती उतारूं,
मैं वारी जाऊं चरणों में।।

आरती शुभ ये राधा जी की भक्तों के मन भावे 
राधे धाम में, बरसाने में आरती बड़ी सुहावे
मैं भी तेरे धाम में अपने पल गुजारूं बसो जी राधा मेरे मन में।

ओ राधा रानी तेरी आरती उतारूं
मैं वारी जाऊं चरणों में।।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

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