जन्माष्टमी पर आधी रात को भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का उत्सव मनाया जाता है. भक्त व्रत रखते हैं और रात में लड्डू गोपाल का जन्म कराकर उनका अभिषेक व श्रृंगार करते हैं. इस साल जन्माष्टमी 4 सितंबर को मनाई जाएगी. अगर आप भी घर पर कान्हा का जन्म करने की तैयारी कर रहे हैं, तो आचार्य मदन मोहन ने बताया कि जन्माष्टमी पर भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के समय पूजा की यह विधि अपना सकते हैं.
खीरे से ऐसे करें कान्हा का जन्म
आचार्य मदन मोहन ने बताया कि जन्माष्टमी के दिन डंठल वाले खीरे में लड्डू गोपाल को रखकर कपड़े से ढक दिया जाता है. मध्यरात्रि में भगवान के जन्म के समय सिक्के की मदद से खीरे को डंठल से अलग किया जाता है. इसे नाल छेदन की परंपरा माना जाता है. इसके बाद लड्डू गोपाल को खीरे से बाहर निकालें.
पंचामृत से करें अभिषेक
उन्होंने आगे बताया कि कान्हा के जन्म के बाद कच्चे दूध, गंगाजल, घी, शहद और दही से उनका अभिषेक करें. फिर साफ कपड़े से मूर्ति को पोंछकर नए वस्त्र पहनाएं और मुकुट, बांसुरी, कुंडल, मालाा व पायल से श्रृंगार करें.
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माखन-मिश्री का लगाएं भोग
श्रृंगार के बाद कान्हा को पीले फूल और पीला चंदन अर्पित करें. धूप, अक्षत, इत्र और फल चढ़ाकर दीपक जलाएं. इसके बाद माखन-मिश्री या मेवे की खीर का भोग लगााएं. श्रद्धा से आरती, मंत्र जाप और श्रीकृष्ण चालीसा का पाठ करें.
पूजा के बाद क्या करें खीरे का?
आचार्य ने बताया कि पूजा में इस्तेमाल किए गए खीरे को प्रसाद के रूप में बांटा जा सकता है. ऐसी मान्यता है कि संतान की कामना रखने वाले लोग जन्माष्टमी पर डंठल वाले खीरे का प्रसाद ग्रहण करते हैं. हालांकि यह धार्मिक मान्यताा है, इसका कोई चिकित्सकीय प्रमाण नहीं है.
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