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Ganga Dussehra 2026: जिस गंगा के दर्शन मात्र से दूर हो जाते हैं सारे दोष, जानें उस अमृतवाहिनी की 10 बड़ी बातें

Ganga Dussehra 2026 Rochak Baten:हिंदू धर्म में न सिर्फ पूजा बल्कि जीवन की शुरुआत से जो गंगा जल जुड़ा रहता है, उस मां गंगा का अवतरण का दिवस हर साल ज्येष्ठ मास के शुक्लपक्ष यानि गंगा दशहरा के दिन मनाया जा रहा है. पापनाशिनी और पुण्यदायिनी मां गंगा से जुड़ी 10 बड़ी बातों को जानने के लिए पढ़ें ये लेख.

Ganga Dussehra 2026: जिस गंगा के दर्शन मात्र से दूर हो जाते हैं सारे दोष, जानें उस अमृतवाहिनी की 10 बड़ी बातें
Ganga Dussehra 2026: मां गंगा को क्यों कहते हैं 'त्रिपदगामिनी'?
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Goddess Ganga 10 Mythological Insights and Interesting Facts: :सनातन परंपरा में मां गंगा को देवी के रूप में पूजा जाता है. जिस गंगा के जल को अमृत माना जाता है उसमें लगाई गई आस्था की एक डुबकी सभी पापों से मुक्त करके मोक्ष प्रदान करती है. सनातन परंपरा में जिस देवी को लोकमाता माना जाता है और जिसके पावन जल के बगैर कोई भी पूजा या कर्मकांड अधूरा माना जाता है आज उसका अवतरण दिवस यानि गंगा दशहरा का महापर्व मनाया जा रहा है. स्वर्गलोक से पृथ्वीलोक और गंगोत्री से लेकर गंगा सागर तक बहने वाली मां गंगा से जुड़ी 10 महत्वपूर्ण बातों को आइए विस्तार से जानते हैं. 

1. सनातन परंपरा में मां गंगा एक ऐसी देवी हैं जिनका संबंध त्रिदेव यानि ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों से माना जाता है. हिंदू मान्यता के अनुसा र मां गंगा भगवान विष्णु के अंगूठे से निकली हैं. जिन्हें ब्रह्मा जी ने अपने कमंडल में रखा​ और फिर वहां से निकली गंगा ​भगवान शिव की जटाओं से होती हुई पृथ्वी पर पहुंची हैं. 

2. पौराणिक कथाओं में मां गंगा को पर्वतराज हिमवान की पुत्री और माता पार्वती की बहन माना जाता है. महाभारतकाल में मां गंगा का विवाह राजा शांतनु से हुआ था और उनके आठवें पुत्र भीष्म हुए थे. 

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3. भगवान विष्णु के चरणों से निकल और ब्रह्मा जी के कमंडल में समाई तथा पर्वतराज हिमालय के यहां जन्मीं गंगा का एक बार फिर तब जन्म हुआ जब उन्हें जह्नु ऋषि ने क्रोध में आकर पी लिया था और राजा भागीरथ के प्रार्थना करने के बाद उन्हें अपने कानों से प्रकट किया था. इसी कारण से मां गंगा को जह्नु ऋषि की पुत्री भी मानते हुए उन्हें 'जाह्नवी' के रूप में भी पूजा जाता है. 

4. हिंदू मान्यता के अनुसार मां गंगा चूंकि भगवान विष्णु के चरणों से निकली हैं, इसलिए उन्हें विष्णुपदी कहा जाता है और राजा भागीरथ के तप और प्रयासों से पृथ्वी पर आईं इसलिए उन्हें भागीरथी के नाम से भी पूजा जाता है. 

5. सनातन परंपरा में गंगा को दैवीय नदी का दर्जा प्राप्त है. पौराणिक मान्यता के अनुसार गंगा नदी में बहने वाला जल सबसे पवित्र माना जाता है, जो सालों साल तक खराब नहीं होता है. 

6. गंगाजल को सनातन परंपरा में अमृत के समान चमत्कारी माना गया है, जिसमें भक्तिभाव से स्नान करने पर व्यक्ति के सभी पाप दूर हो जाते हैं. यही कारण है कि मां गंगा को अमृतवाहिनी और पापनाशिनी और पापमोचिनी कहा जाता है. 

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7. मां गंगा के पवित्र जल में स्नान करने वाले व्यक्ति के सभी दोष और दुख दूर हो जाते हैं और वह अनंत सुखों को भोगता हुआ अंत में मोक्ष को प्राप्त होता है. 

8. मां गंगा एक ऐसी पावन नदी हैं, जिसके पावन तट पर लगने वाले कुंभ में न सिर्फ आम मनुष्य बल्कि देवी-देवता, गंधर्व, किन्नर आदि सभी स्नान करने के लिए पहुंचते हैं. मान्यता है कि हरिद्वार जिसे हरि का द्वार कहा जाता है, वहां पर कभी भगवान विष्णु के चरण कमल पड़े थे.

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9. हिंदू मान्यता के अनुसार के मां गंगा ही एक मात्र ऐसी नदी हैं जिसमें समुद्र मंथन से निकले अमृत की बूंद एक जगह नहीं बल्कि दो जगह हरिद्वार और प्रयागराज में गिरी थी. गंगा की इसी महिमा के कारण इन्हीं दो पावन तीर्थों पर हर 6 साल और 12 साल में कुंभ का महापर्व लगता है. 

10. पौराणिक कथाओं में मां गंगा को 'त्रिपथगा' या 'त्रिपदगामिनी' कहा जाता है, यानि वे तीनों लोक - स्वर्ग, पृथ्वी और पाताल में बहती हैं. पृथ्वी पर मां गंगा गंगोत्री से निकलने के बाद देश के तमाम तीर्थ स्थलों से होती हुई अंत में गंगासागर में जाकर विलीन हो जाती हैं. मां गंगा की महिमा का कोई अंत नहीं है. 

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

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