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देवशयनी एकादशी आज, यहां पढ़ें पूजा का शुभ मुहूर्त, भगवान विष्णु की पूजा विधि, मंत्र और आरती

हिंदू धर्म में देवशयनी एकादशी का विशेष महत्व माना गया है. इस दिन भगवान विष्णु की पूजा, व्रत, ध्यान और दान-पुण्य करने से शुभ फल मिलने की मान्यता है. आइए जानते हैं देवशयनी एकादशी पर पूजा का शुभ मुहूर्त क्या रहेगा-

देवशयनी एकादशी आज, यहां पढ़ें पूजा का शुभ मुहूर्त, भगवान विष्णु की पूजा विधि, मंत्र और आरती
देवशयनी एकादशी पर ऐसे करें भगवान विष्णु की पूजा
(Photo Credit: NDTV)

हिंदू धर्म में एकादशी के पर्व का बेहद खास महत्व माना जाता है. एक साल में कुल 24 एकादशी पड़ती हैं. इन्हीं में से एक है देवशयनी एकादशी. मान्यता है कि इसी दिन भगवान श्री हरि विष्णु चार महीने के लिए योगनिद्रा में चले जाते हैं और इसके साथ ही चातुर्मास की शुरुआत हो जाती है. पंचांग के अनुसार, आषाढ़ शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 24 जुलाई को सुबह 9 बजकर 13 मिनट पर शुरू हुई. इसका समापन 25 जुलाई को सुबह 11 बजकर 35 मिनट पर होगा. ऐसे में उदया तिथि को ध्यान में रखते हुए देवशयनी एकादशी का व्रत आज, 25 जुलाई, शनिवार को रखा जा रहा है. आइए जानते हैं आज पूजा का शुभ मुहूर्त और भगवान विष्णु की पूजा विधि-

देवशयनी एकादशी पूजा शुभ मुहूर्त

  • पंचांग के अनुसार, पूजा के लिए शुभ मुहूर्त सुबह 11 बजकर 39 मिनट से दोपहर 12 बजकर 31 मिनट तक है.
  • सुबह जल्दी उठकर पूजा और ध्यान करने वालों के लिए ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 16 मिनट से 4 बजकर 58 मिनट तक रहेगा.
  • अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12 बजे से 12 बजकर 55 मिनट तक रहेगा.
देवशयनी एकादशी पर ऐसे करें भगवान विष्णु की पूजा
  • सबसे पहले सुबह जल्दी स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें.
  • घर के मंदिर को साफ करके गंगाजल से शुद्ध कर लें.
  • मंदिर में लाल या पीले रंग का साफ कपड़ा बिछाकर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें.
  • श्रीहरि को पुष्प, धूप और दीप अर्पित करें.
  • एकादशी के दिन भगवान विष्णु को खासकर तुलसी दल अर्पित करना बेहद शुभ माना जाता है. मान्यता है कि भगवान को तुलसी बेहद प्रिय है.
  • इसके बाद श्रद्धा से भोग लगाएं, विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें.
  • देवशयनी एकादशी की कथा पढ़ें, विष्णु भगवान के मंत्रों का जाप करें.
  • अंत में आरती करके पूजा संपन्न करें.
विष्णु भगवान के मंत्र
  • ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
  • ॐ नारायणाय विद्यहे। वासुदेवाय धीमहि। तन्नो विष्णु प्रचोदयात्।।
  • ॐ विष्णवे नमः
  • ॐ नमो नारायण। श्री मन नारायण नारायण हरि हरि।
  • श्रीकृष्ण गोविन्द हरे मुरारे। हे नाथ नारायण वासुदेवाय।।
विष्णु भगवान की आरती

ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे.

भक्तजनों के संकट क्षण में दूर करे.

जो ध्यावैफल पावै, दुख बिनसेमन का.

सुख-संपत्ति घर आवै, कष्ट मिटे तन का.

ॐ जय जगदीश हरे...

मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूं किसकी.

तुम बिन और न दूजा, आस करूं जिसकी.

ॐ जय जगदीश हरे...

तुम पूरन परमात्मा, तुम अंतरयामी.

पारब्रह्म परेमश्वर, तुम सबके स्वामी.

ॐ जय जगदीश हरे...

तुम करुणा के सागर तुम पालनकर्ता.

मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता.

ॐ जय जगदीश हरे...

तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति.

किस विधि मिलूं दयामय! तुमको मैंकुमति.

ॐ जय जगदीश हरे...

दीनबंधु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे.

अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे.

ॐ जय जगदीश हरे...

विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा.

श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, संतन की सेवा.

ॐ जय जगदीश हरे...

तन-मन-धन और संपत्ति, सब कुछ है तेरा.

तेरा तुझको अर्पण क्या लागे मेरा.

ॐ जय जगदीश हरे...

जगदीश्वरजी की आरती जो कोई नर गावे.

कहत शिवानंद स्वामी, मनवांछित फल पावे.

ॐ जय जगदीश हरे...

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

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