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Dhyanalinga Coimbatore: सद्गुरु द्वारा प्रतिष्ठित ध्यानलिंग से जुड़ी 7 बड़ी बातें जो इसे दूसरे मंदिरों से अलग बनाती हैं

Isha foundation: तमिलनाडु के कोयंबटूर शहर में स्थित भगवान शिव को समर्पित आदियोगी की प्रतिमा हो या फिर ध्यानलिंग मंदिर, लोगों को बरबस अपनी ओर खींच लाता है. आइए सद्गुरु द्वारा स्थापित ध्यानलिंग मंदिर से जुड़ी उन रोचक बातों को जानते हैं, जो इसे धार्मिक-आध्यात्मिक रूप से बेहद खास बनाती है. 

Dhyanalinga Coimbatore: सद्गुरु द्वारा प्रतिष्ठित ध्यानलिंग से जुड़ी 7 बड़ी बातें जो इसे दूसरे मंदिरों से अलग बनाती हैं
Dhyanalinga Consecration Anniversary: सद्गुरु द्वारा प्रतिष्ठित ध्यानलिंग की 7 बड़ी बातें  
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Dhyanalinga: कोयंबटूर के पास वेलियांगिरी पहाड़ियों की तलहटी में ध्यानलिंग स्थित है, जिसे 24 जून, 1999 को सद्गुरु ने प्रतिष्ठित किया था. यह एक ऐसी जगह है जिसे समय के साथ भारत के सबसे असाधारण आध्यात्मिक अर्पणों में से एक माना जाने लगा है. 24 जून को ध्यानलिंग प्रतिष्ठा दिवस पर, इसका अनोखापन न केवल याद रखने का, बल्कि नए सिरे से आश्चर्यचकित होने का अवसर बन जाता है.

1. इसे पूजा-अर्चना के मंदिर के तौर पर कभी नहीं बनाया गया था

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जो चीज ध्यानलिंग को शुरुआत से ही असामान्य बनाती है, वह यह कि इसे पारंपरिक अर्थों में पूजा-पाठ के लिए नहीं बनाया गया था. जैसा कि सद्गुरु कहते हैं, "ध्यानलिंग की पूजा करने की जरुरत नहीं है. इसे अनुभव करने की ज़रूरत है. लिंग अस्तित्व की असीम प्रकृति का द्वार है."

2. मौन यहाँ मुख्य अर्पण है

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ज़्यादातर पवित्र जगहों के विपरीत, जहाँ आवाज़ और रस्म-रिवाज़ अनुभव तय करते हैं, ध्यानलिंग में पूरी तरह मौन रखा जाता है. सद्गुरु के शब्दों में, "ध्यानलिंग के लिए कोई पूजा, कोई रस्म या कोई चढ़ावा नहीं है. यहाँ पूरी तरह मौन कायम रखा जाता है. इसके दायरे में बस कुछ मिनट चुप होकर बैठने से, व्यक्ति वहाँ की ऊर्जा को महसूस और आत्मसात कर सकता है."

3. यह हर किसी का स्वागत करता है, उनके विश्वास चाहे जो भी हों

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ध्यानलिंग किसी एक धर्म, पंथ या विचारधारा से नहीं जुड़ा है. सद्गुरु ने समझाया है, “यहाँ कोई रीति-रिवाज या प्रार्थना नहीं होती; यहाँ हमेशा पूरा मौन रहता है. सभी धर्मों और पृष्ठभूमियों के लोग यहाँ आकर बैठते हैं. ध्यानलिंग में बस कुछ मिनट चुपचाप बैठना ही काफी है, जिससे वे लोग भी गहरे ध्यान की अवस्था का अनुभव करते हैं, जो ध्यान से अनजान हैं.”

4. तीन सीढियाँ व्यक्ति को ग्रहणशील बनने के लिए तैयार करती हैं

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ध्यानलिंग के सामने मौजूद तीन सीढियाँ मन के तीन गुणों - तमस, रजस और सत्व - का प्रतीक हैं. इनकी ऊंचाई और कंकड़ीली सतह एक हल्का शारीरिक जुड़ाव बनाती है, जिससे व्यक्ति को इस पवित्र ध्यान-स्थान में प्रवेश करने से पहले अधिक ग्रहणशील बनने में मदद मिलती है.

5. इसमें सातों चक्र अपने उच्चतम स्तर पर मौजूद हैं

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योग विज्ञान में, यह ध्यानलिंग की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक है. सद्गुरु कहते हैं, "ध्यानलिंग इसलिए अनोखा है क्योंकि इसमें सातों आयाम अपने उच्चतम स्तर पर स्थापित हैं." यही पूर्णता इसे न केवल आध्यात्मिक रूप से शक्तिशाली, बल्कि बेहद दुर्लभ भी बनाती है.

6. वनश्री ध्यानलिंग के स्त्रैण आयाम का प्रतीक हैं 

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वनश्री ध्यानलिंग की स्त्रैण देवी हैं. कहा जाता है कि इस मंदिर की ऊर्जाएँ उन महिलाओं और बच्चों के लिए विशेष रूप से लाभकारी हैं जो इसके आस-पास ध्यान में समय बिताते हैं.

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7. इसकी अंदरूनी परिक्रमा में आत्म-ज्ञानी ऋषियों का जीवन दर्शाया गया है

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ध्यानलिंग की अंदरूनी परिक्रमा के मार्ग में, ग्रेनाइट पत्थर के छह कलात्मक पैनल लगे हैं. इनमें दक्षिण भारत के उन छह ऋषियों का जीवन दिखाया गया है जिन्हें आत्म-ज्ञान प्राप्त हुआ था; हर पैनल उनकी यात्रा के एक प्रभावशाली पल को संजोए हुए है.

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