पूजा-पाठ, हवन या किसी धार्मिक अनुष्ठान के बाद आपने दक्षिणा देने की बात जरूर सुनी होगी. आमतौर पर लोग इसे सिर्फ पैसे देने से जोड़कर देखते हैं, लेकिन दक्षिणा का मतलब इससे कहीं ज्यादा है. ज्योतिषाचार्य पंडित कौशल पांडेय ने बताया कि दक्षिणा दरअसल गुरु, पंडित या धार्मिक सेवा करने वाले व्यक्ति के प्रति सम्मान और आभार जताने का तरीका है. इसे अपनी श्रद्धा और क्षमता के अनुसार देना चाहिए.
दक्षिणा और दान में क्या है अंतर
ज्योतिषाचार्य पंडित कौशल पांडेय ने बताया कि जरूरतमंद व्यक्ति की मदद के लिए दी गई वस्तु या धन को दान कहा जाता है. जबकि पूजा-पाठ या धार्मिक सेवा के बाद सम्मान के तौर पर दी जाने वाली वस्तु दक्षिणा कहलाती है. दक्षिणा में दिखावे के बजाय श्रद्धा का भाव होना जरूरी है.
दक्षिणा में पैसे देना भी शुभ
दक्षिणा में अपनी क्षमता के अनुसार रुपये दिए जा सकते हैं. धार्मिक मान्यता में धन का संबंध मां लक्ष्मी से माना जाता है. इसलिए छोटी धनराशि भी सच्चे मन से देना शुभ माना जाता है. जरूरी नहीं कि दक्षिणाा ज्यादा रकम की ही हो.
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तांबा और पीतल की चीजें
पंडित कौशल पांडेय ने बताया कि दक्षिणा में तांबे या पीतल के लोटे, थाली, कटोरी जैसी उपयोगी चीजें भी दी जा सकती हैं. ज्योतिषीय मान्यताओं में इन धातुओं का संबंध सूर्य और गुरु से जोड़ा जाता है.
फल, मिठाई और पीले कपड़े
पूजा के बाद फल और मिठाई दक्षिणा में देना भी शुभ माना जाता है. इसके अलावा पीले रंग का कपड़ा और कलावा देना भी धार्मिक रूप से शुभ माना जाता है. ऐसी मान्यता है कि इससे गुरु कृपा और सम्मान की भावना बनी रहती है.
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