Chandra Darshan Kab Hai: सनातन परंपरा में नवग्रहों के राजा सूर्य की तरह चंद्रमा की पूजा का बहुत ज्यादा महत्व माना गया है. पौराणिक मान्यता के अनुसार चंद्रमा को सोम यानि अमृत कहा गया है. सूर्य जहां आत्मा का कारक होता है, वहीं चंद्रमा का संबंध मन से होता है. हिंदू मान्यता के अनुसार जिस चंद्रमा को भगवान शिव ने अपने सिर पर सजा रखा है, उसकी न सिर्फ पूजा बल्कि उसका दर्शन भी बेहद शुभ और कल्याणकारी माना गया है. आइए जानते हैं कि जुलाई महीने में चंद्र दर्शन कब होगा और इस दिन किस विधि से पूजा करने पर चंद्र देवता का आशीर्वाद बरसेगा.

चंद्र दर्शन की तारीख और समय
पंचांग के अनुसार जुलाई महीने में प्रतिपदा तिथि 15 जुलाई 2026, बुधवार की सुबह 11:50 बजे तक रहेगी और उसके बाद द्वितीया तिथि लग जाएगी. ऐसे में आषाढ़ मास के शुक्लपक्ष की द्वितीया यानि 15 जुलाई 2026, बुधवार की शाम 07:21 से रात्रि 08:19 बजे तक दर्शन किया जा सकेगा.
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चंद्र दर्शन की पूजा विधि
प्रत्येक मास की अमावस्या के बाद शुक्लपक्ष की द्वितीया के दिन आसमान में दिखने वाले चांद को चंद्र का दर्शन और पूजन करना अत्यंत ही शुभ और फलदायी माना गया है. इस दिन चंद्र देवता की पूजा करने से पहले साधक को तन और मन से पवित्र होकर स्वच्छ सफेद वस्त्र धारण करना चाहिए. इसके बाद चंद्र देवता का दर्शन करते हुए उन्हें पहले कच्चे दूध से फिर शुद्ध जल से अर्घ्य देना चाहिए. दूध से अर्घ्य देते समय उसमें अक्षत, सफेद पुष्प और मिश्री अवश्य मिलाएं.
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इसके बाद शुद्ध जल से अर्घ्य देने के बाद चंद्र देवता को गाय के दूध से बनी खीर का भोग लगाना चाहिए. फिर चंद्र देवता के मंत्रों जैसे 'ॐ चंद्राय नमः' अथवा 'ॐ सोमाय नमः' मंत्र का जप करना चाहिए. चंद्र देवता की कृपा पाने के लिए इस दिन व्रत का विधान है. यदि आप इस दिन चंद्र देवता के लिए व्रत रखा हैं तो उन्हें जल से अर्घ्य देने के बाद उसे खोल सकते हैं.

चंद्र दर्शन की पूजा का उपाय
ज्योतिष के अनुसार चंद्र देवता का संबंध मन और माता से माना जाता है. ऐसे में चंद्र दर्शन वाले दिन पूजा एवं व्रत करने वाले साधक को अपनी माता का विशेष आशीर्वाद लेना चाहिए और अपने सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंद व्यक्ति को चावल, चीनी, दूध, सफेद वस्त्र, खीर आदि का दान करना चाहिए.
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