Chaitra Navratri Vrat Ka Paran Kaise Karen: सनातन परंपरा में चैत्र नवरात्रि के 9 दिन शक्ति की साधना के लिए अत्यंत ही शुभ और फलदायी माने गये हैं. चैत्र नवरात्रि में देवी दुर्गा के 9 स्वरूपों की 9 दिनों तक विधि-विधान से पूजा, जप, तप आदि करने के बाद दशमी तिथि पर इस पावन व्रत के पारण का विधान है. इस साल नवरात्रि में तिथि के घटाव-बढ़ाव के चलते लोगों में पारण के समय को लेकर एक असमंजस बना हुआ है. जिस पारण को करने के बाद नवरात्रि का व्रत पूर्ण होता है, आइए उसका सही दिन, समय और विधि को विस्तार से जानते हैं.
चैत्र नवरात्रि का पारण कब करें?

हिंदू मान्यता के अनुसार नवरात्रि के 9 दिनों तक विधि-विधान से जप-तप और व्रत करने के बाद साधक को दशमी तिथि के दिन इसका पारण करना श्रेष्ठ माना गया है. दृक पंचांग के अनुसार इस साल चैत्र मास के शुक्लपक्ष की दशमी तिथि आज 27 मार्च 2026,शुक्रवार को प्रात:काल 10:06 बजे के बाद लग जा रही है. ऐसे में आप दशमी तिथि के लगने के बाद पारण कर सकते हैं. यदि आप उदया तिथि में चैत्र नवरात्रि व्रत का पारण करना चाहते हैं तो इसके लिए कल यानि 28 मार्च 2026, शनिवार के दिन प्रात: 08:45 बजे तक पारण कर सकते हैं.
चैत्र नवरात्रि का पारण कैसे करें?

- चैत्र नवरात्रि व्रत का पारण करने के लिए साधक को तन और मन से पवित्र होने के बाद सबसे पहले देवी दुर्गा को प्रतिदिन की तरह विधि-विधान से पूजा करनी चाहिए.
- माता की पूजा में प्रतिदिन की भांति भोग लगाएं और मंत्र जप, स्तोत्र आदि का पाठ करें.
- यदि आप नवमी के दिन कन्या पूजन करते हैं तो आज श्रद्धापूर्वक देवी समान कन्याओं को भोग प्रसाद खिलाकर तथा उन्हें धन, वस्त्र एवं उपहार देकर उनका आशीर्वाद प्राप्त करें.
- नवरात्रि व्रत में हवन का बहुत ज्यादा महत्व माना गया है. ऐसे में पारण करने से पहले देवी दुर्गा के लिए हवन अवश्य करें.
- नवरात्रि की समाप्ति पर व्रत रखने वाले साधक अन्न ग्रहण करते हैं, जो कि पारण कहलाता है. ऐसे में हवन करने के बाद अपना सात्विक चीजों जैसे फल, साबूदान, सिंघाड़े के आटे से बनी पकौड़ी, हलवा आदि ग्रहण करें.
- नवरात्रि पारण वाले दिन यथासंभव जरूरतंद और मंदिर में पुजारी आदि को दान करना चाहिए.
पारण करने से पहले जरूर करें क्षमा याचना

हिंदू मान्यता के अनुसार पारण करने से पहले देवी दुर्गा से नवरात्रि के 9 दिनों तक जाने-अनजाने में हुई भूलचूक के लिए क्षमा मांगे कि - हे देवी मैं आवाहन नहीं जानता, पूजन नहीं जानता और न ही विसर्जन जानता हूं. हे देवी जो भी मैंने श्रद्धापूर्वक मंत्रहीन, क्रियाहीन, और भक्तिहीन पूजा प्रार्थना की है, कृपया उसे स्वीकार करके नवरात्रि के व्रत को पूर्ण करो तथा अपना आशीर्वाद बरसाओ.
कैसे करें विसर्जन?

चैत्र नवरात्रि व्रत के पूर्ण होने पर बाएं हाथ में चावल लेकर दाए हाथ से देवी दुर्गा का ध्यान करते हुए मन में कहें कि हे देवी मुझ पर सदैव अपनी कृपा बनाए रखें. इसके बाद सभी देवी-देवता, दिग्पाल, नवग्रह आदि से प्रार्थना करें कि वे आशीर्वाद बरसाते हुए अपने स्थान को प्रस्थान करें. इसके बाद घट या फिर कहें कलश पर रखे नारियल को कटोरे या प्याली समेत अलग रखें औश्र उसके भीतर रखे पवित्र जल को सभी पर तथा घर के प्रत्येक कोने में छिड़कें.
इसी प्रकार कलश के बगल में जमी हुई जौ को प्रणाम करते हुए अपने सिर और कानों में लगाएं. कलश के बाकी जल को किसी पौधे में डाल दें और पूजन सामग्री को किसी पवित्र स्थान पर ले जाकर दबा दें तथा माता को चढ़ाई हुई श्रृंगार की सामग्री किसी जरूरतमंद सुहागिन महिला को अथवा किसी मंदिर में ले जाकर दे दें.
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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