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Brihaspati Devta Ka Mandir: देवताओं के गुरु बृहस्पति का मंदिर कहां है? जानें उनकी पूजा के बड़े लाभ

Brihaspati Devta Ka Mandir: ज्योतिष शास्त्र में बृहस्पति या फिर कहें गुरु ग्रह को गुडलक का कारक माना जाता है. जिस गुरु ग्रह की शुभ दृष्टि से व्यक्ति का भाग्य सोने सा चमकने लगता है, उनका पावन धाम आखिर कहां है? देवगुरु बृहस्पति के दर्शन और पूजन का पुण्यफल जानने के लिए जरूर पढ़ें ये लेख.

Brihaspati Devta Ka Mandir: देवताओं के गुरु बृहस्पति का मंदिर कहां है? जानें उनकी पूजा के बड़े लाभ
Lord Brihaspati Temple:
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Famous Temple of Lord Jupiter: नवग्रहों में बृहस्पति को सुख-सौभाग्य का कारक माना गया है. ज्योतिष के अनुसार धनु और मीन राशि के स्वामी माने जाने वाले बृहस्पति जिस किसी कुंडली में मजबूत होकर शुभ फल प्रदान करते है, उसे किस्मत का हर कदम पर साथ मिलता है और वह सुखी जीवन जीवन जीते हुए यश एवं कीर्ति प्राप्त करता है, लेकिन इसके विपरीत कमजोर होने या फिर कहें इससे जुड़े दोष होने पर व्यक्ति को तमाम तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है. जिस बृहस्पति की कृपा होने पर व्यक्ति को कदम-कदम पर सौभाग्य का साथ मिलता है, उसका पावन धाम कहां पर स्थित है? आइए गुडलक के देवता कहे जाने वाले गुरु ग्रह के प्रसिद्ध मंदिर और उसके धार्मिक महत्व के बारे में विस्तार से जानते हैं. 

बनारस का बृहस्पति मंदिर

बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी में देवताओं के गुरु माने जाने वाले बृहस्पति देवता का मंदिर गंगा नदी के किनारे दशाश्वमेध घाट रोड पर स्थित है. सुख-सौभाग्य के दाता कहे जाने वाले भगवान बृहस्पति का यह मंदिर काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग के बहुत करीब है. हिंदू मान्यता के अनुसार त्रिशूल पर टिकी काशी नगरी को भगवान शिव जब बसा रहे थे तो उन्होंने यहां पर उन्होंने बृहस्पति देवता को विशेष स्थान प्रदान किया.

अति प्राचीन इस मंदिर में देवगुरु बृहस्पति शिवलिंग स्वरूप में स्थित हैं, जिनके बारे में मान्यता है कि इस मंदिर में उन्हें स्वयं भगवान शिव ने स्थापित किया था. सभी देवताओं के गुरु होने के कारण काशी में उन्हें उच्च स्थान प्रदान किया गया है. यही कारण है कि भगवान बृहस्पति का मंदिर भी थोड़ा उंचाई में बना हुआ है. प्रत्येक गुरुवार के दिन बृहस्पति देवता की पूजा के लिए भक्तों की भारी भीड़ यहां पर दर्शन और पूजन के लिए पहुंचती है. 

जयपुर का बृहस्पति धाम

गुरु ग्रह से जुड़े मंदिरों में जयपुर का बृहस्पति धाम काफी प्रसिद्ध है. भगवान बृहस्पति के इस पावन धाम की ​खासियत है, यह मंदिर महज 45 दिनों में तैयार हो गया था. मान्यता है कि इस मंदिर के पुजारी को सपने में बृहस्पति भगवान के दर्शन हुए और उन्होंने उसे यहां पर अपना धाम बनाने के लिए आदेश दिया. जिसके बाद यहां पर 2009 में मंदिर का निर्माण किया गया. इस मंदिर में भगवान बृहस्पति की स्वर्णिम आभा लिए हुए विशाल प्रतिमा है. मौजूदा समय में यह मंदिर भगवान बृहस्पति के प्रमुख धाम में से एक है, जहां पर लोग दूर-दूर से अपने सुख-सौभाग्य, शिक्षा, विवाह आदि की कामना को लेकर दर्शन और पूजन के लिए पहुंचते हैं. बृहस्पतिवार के दिन यहां पर विशेष देवगुरु की विशेष साधना-आराधना होती है. 

नैनीताल का बृहस्पति मंदिर

देवभूमि कहलाने वाले उत्तराखंड भी बृहस्पति देवता का पावन धाम है. नैनीताल जिले के ओखलकांडा ब्लॉक में स्थित यह मंदिर पहाड़ों की ऊंची चोटियों और घने जंगलों के बीच स्थित है. हिंदू मान्यता के अनुसार यह पवित्र स्थान देवगुरु बृहस्पति की तपस्थली माना जाता है. मान्यता है कि पौराणिक काल में जब कभी भी देवताओं पर संकट आता था तो उनके गुरु कहलाने वाले भगवान बृहस्पति उसे दूर करने के लिए इसी पवित्र स्थान पर बैठकर उसका चिंतन-मंथन किया करते थे.

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मान्यता यह भी है कि बृहस्पति देव ने इसी स्थान पर कठिन तप करके भगवान शिव को प्रसन्न किया था. जिसके बाद देवों के देव महादेव न उन्हें देवताओं के गुरु का पद प्रदान किया था. स्थानीय लोग बृहस्पति देवता को यहां पर लोकदेवता के रूप में पूजते हैं. हिंदू मान्यता के अनुसार भगवान बृहस्पति के इस पावन धाम पर आने वाला कोई व्यक्ति कभी भी खाली हाथ नहीं लौटता है.

बृहस्पति देवता की पूजा के लाभ 

ज्योतिष में सुख, सौभाग्य, ज्ञान, धन, यश, कीर्ति और धर्म-अध्यात्म के लिए देवगुरु बृहस्पति की पूजा अत्यंत ही फलदायी मानी गई है. हिंदू मान्यता के अनुसार देवगुरु बृहस्पति की पूजा करने से व्यक्ति के विवेक और ज्ञान में वृद्धि होती है. बृहस्पति की पूजा से ​विवाह में आ रही बाधाएं दूर होती हैं और सुयोग्य वर प्राप्त होता है. गुरु ग्रह की शुभता मिलने पर व्यक्ति को करियर-कारोबार में मनचाही तरक्की प्राप्त होती है. देवगुरु बृहस्पति के आशीर्वाद से व्यक्ति का गुडलक बढ़ता है, जिससे उसे समाज में मान-सम्मान और उच्च पद प्राप्त होता है. 

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

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