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रघुनाथ मंदिर में पहली बार महिलाओं ने की आरती, सदियों पुरानी परंपरा में जुड़ा नया अध्याय, श्रद्धालु बोले- अद्भुत दृश्य

जम्मू के ऐतिहासिक रघुनाथ मंदिर में पहली बार प्रशिक्षित महिलाओं ने शाम की आरती का नेतृत्व किया और सदियों पुरानी परंपरा में एक नई शुरुआत की.

रघुनाथ मंदिर में पहली बार महिलाओं ने की आरती, सदियों पुरानी परंपरा में जुड़ा नया अध्याय, श्रद्धालु बोले- अद्भुत दृश्य
भक्ति का कोई लिंग नहीं: रघुनाथ मंदिर में महिलाओं ने संभाली आरती
(P.C -NDTV)

जम्मू का रघुनाथ मंदिर देश के सबसे प्रसिद्ध और ऐतिहासिक मंदिरों में गिना जाता है. भगवान राम को समर्पित यह मंदिर वर्षों से श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र रहा है. मंदिर ने राजाओं का दौर देखा है, कई ऐतिहासिक घटनाओं का साक्षी रहा है और पीढ़ियों से यहां पूजा-अर्चना की परंपरा चली आ रही है. अब इसी मंदिर में एक ऐसा दृश्य देखने को मिल रहा है, जिसने श्रद्धालुओं का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है.

पहली बार रघुनाथ मंदिर में महिलाओं ने शाम की आरती का नेतृत्व किया. भगवा साड़ी पहने, हाथों में दीप लिए और संस्कृत मंत्रों का उच्चारण करती युवा महिलाओं ने भगवान राम की आरती की. मंदिर परिसर में मौजूद श्रद्धालुओं के लिए यह एक विशेष और भावुक पल था. कई लोगों ने इसे मंदिर के इतिहास में एक नई शुरुआत बताया.

एक साल पहले शुरू हुई थी पहल

इस बदलाव के पीछे महाराजा हरि सिंह की पोती बहू कुंवरानी रितु सिंह की अहम भूमिका रही है. करीब एक साल पहले उन्होंने महिलाओं को पुजारिन के रूप में प्रशिक्षित करने की पहल शुरू की थी. शुरुआत में इस फैसले को लेकर कई तरह की चर्चाएं हुईं, लेकिन धीरे-धीरे लोगों ने इसे स्वीकार कर लिया.

रितु सिंह का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य पुरुषों की भूमिका को कम करना नहीं है, बल्कि शिव और शक्ति की समानता के भाव को मजबूत करना है.

उन्होंने कहा, 

'अगर हम कन्या पूजन करते हैं, देवी की पूजा करते हैं, तो महिलाओं को पूजा-अर्चना करने से दूर क्यों रखा जाए? भक्ति और श्रद्धा में स्त्री और पुरुष का कोई भेद नहीं होना चाहिए.'
150 लड़कियां ले रही हैं प्रशिक्षण

रितु सिंह के अनुसार,

इस पहल को लोगों का अच्छा समर्थन मिला है. फिलहाल करीब 150 लड़कियां प्रशिक्षण ले रही हैं. ये युवतियां मंत्रोच्चारण, पूजा-पद्धति और धार्मिक अनुष्ठानों की शिक्षा प्राप्त कर रही हैं.

उन्होंने बताया कि

अगले चरण में इन लड़कियों को हवन कराने और विभिन्न वैदिक मंत्रों का विस्तृत प्रशिक्षण भी दिया जाएगा. इसके बाद वे अलग-अलग मंदिरों में पुजारिन के रूप में अपनी सेवाएं दे सकेंगी.
श्रद्धालुओं ने किया स्वागत

मंदिर में आरती के दौरान मौजूद श्रद्धालुओं ने इस बदलाव का खुले दिल से स्वागत किया. कई भक्तों ने कहा कि उन्होंने पहले कभी महिलाओं को इस तरह मंदिर में आरती का नेतृत्व करते नहीं देखा था.

एक श्रद्धालु ने कहा कि महिलाओं को भगवान राम की आरती करते देखना बेहद सुखद अनुभव था. वहीं, एक अन्य श्रद्धालु ने इसे आस्था और परंपरा के साथ आगे बढ़ते समाज का सुंदर उदाहरण बताया.

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