Bhadali Navami 2026 auspicious time of Sacred Day : सनातन परंपरा में आषाढ़ मास के शुक्लपक्ष की नवमी तिथि का बहुत ज्यादा महत्व माना गया है. गुप्त नवरात्रि का यह नौवां दिन न सिर्फ शक्ति की साधना के लिए बल्कि मांगलिक कार्यों के लिए सबसे उत्तम अबूझ मुहूर्त माना गया है. हिंदू धर्म में इस पावन दिन को भड़ली नवमी पर्व के रूप में जाना जाता है. मान्यता है कि इस पावन दिन किसी भी शुभ या मांगलिक कार्य को करने के लिए किसी भी प्रकार के मुहूर्त के विचार की आवश्यकता नहीं रहती है. पंचांग के अनुसार आज भड़ली नवमी का पावन पर्व है. आइए देश के जाने-माने ज्योतिषाचार्यों के माध्यम से जानते हैं कि आखिर भड़ली नवमी पर किन-किन कार्यों किया जा सकता है.
यज्ञोपवीत छोड़ कर सकते हैं सभी मंगल कार्य !

राजकीय महाराज आचार्य संस्कृत महाविद्यालय, जयपुर में वेद विभाग के सेवानिवृत्त प्रोफेसर डॉ. उमेश प्रसाद का कहना है कि बृहस्पति के अस्त होने के बाद भड़ली नवमी पर यज्ञोपवीत करना उचित नहीं कहा जा सकता है, लेकिन विवाह आदि कार्य करने के लिए इस दिन कोई बाधा नहीं है. आषाढ़ शुक्लपक्ष की इस पावन नवमी पर जनेउ को छोड़कर सभी कार्य बगैर किसी शंका के आज किए जा सकते हैं. डॉ. उमेश प्रसाद के अनुसार आज भड़ली नवमी का दिन गृह प्रवेश, किसी नये कार्य की शुरुआत आदि कार्यों के लिए उत्तम रहेगा. आज किसी भी शुभ कार्य को करते समय सिर्फ राहुकाल का विचार अवश्य करना चाहिए.
सुखी वैवाहिक जीवन के लिए किये जाते हैं ये उपाय

जयपुर की ज्योतिषाचार्य लोशिखा माथुर कहती हैं कि भड़ली नवमी अबूझ मुहूर्त है और इस पर सभी मांगलिक कार्य होंगे, इसमें कोई संशय नहीं है. देवताओं के शयन पर जाने और उनके उठने से पहले का यह आखिरी सबसे शुभ समय होता है. ऐसे में इस दिन शादी-व्याह से लेकर गृह प्रवेश जैसे सभी शुभ कार्य होंगे. ज्योतिषाचार्य लोशिखा के अनुसार भड़ली नवमी की शुभता को इस तरह से जाना जा सकता है कि जिन लोगों की शादी के बाद किन्हीं कारणों के चलते वैवाहिक जीवन में दिक्कतें बनी रहती हैं, वे भी अपने सुखमय जीवन के लिए इस दिन दोबारा विवाह करते हैं. मान्यता है कि इस उपाय से उन्हें सुखी दांपत्य जीवन प्राप्त होता है और पति-पत्नी के बीच सामंजस्य बना रहता है.
भड़ली नवमी को लेकर क्या है लोक मान्यता?
भड़ली नवमी के अबूझ मुहूर्त की बात करें तो इससे जुड़ी मान्यताएं स्थान विशेष से जुड़ी हुई हैं. एक ओर जहां भारत के पश्चिमी राज्यों में बगैर किसी शंका किए हुए इसमें सभी प्रकार के मांगलिक कार्य बगैर किसी मुहूर्त आदि को विचार किए कर सकते हैं तो वहीं पूर्वी और उत्तर भारत में गुरु अस्त होने के बाद विवाह जैसे मांगलिक कार्य करने की मनाही है.
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काशी के जाने-माने पंडित अतुल मालवीय के अनुसार इस साल भड़ली नवमी पर आप दूसरे शुभ कार्य तो कर सकते हैं, लेकिन विवाह, सगाई आदि कार्य करना उचित नहीं कहा जाएगा, क्योंकि इससे पूर्व ही गुरु अस्त हो चुके हैं. ऐसे में भड़ली नवमी से जुड़े अबूझ मुहूर्त पर किसी भी शुभ या मांगलिक कार्य को करने से पूर्व अपने क्षेत्र से जुड़ी मान्यता और योग्य विद्वानों की सलाह पर अवश्य विचार कर लें.
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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