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'600-700 लोगों ने मेरा रेप किया, मैं केवल 12 साल की थी', ब्रिटिश संसद में गूंजी गवाहियों से पूरा देश सन्न रह गया- क्या है पाक ग्रूमिंग गैंग जिसने दिया वारदात को अंजाम

क्या है पाकिस्तानी मूल के ग्रूमिंग गैंग्स का मामला जिसने ब्रिटेन की राजनीति, पुलिस और समाज को पूरी तरह हिला दिया है? महिला पीड़ितों के साथ इस ग्रूमिंग गैंग ने रेप, यौन शोषण और हिंसा और अन्य अमानवीय बर्ताव किया. उनके बयानों को सुनकर दिल दहल जाएगा.

'600-700 लोगों ने मेरा रेप किया, मैं केवल 12 साल की थी', ब्रिटिश संसद में गूंजी गवाहियों से पूरा देश सन्न रह गया- क्या है पाक ग्रूमिंग गैंग जिसने दिया वारदात को अंजाम
एक पीड़ित महिला ने बताया कि उसका शोषण तब शुरू हुआ जब वह केवल 12 साल की थी
AFP
  • इंग्लैंड के कई शहरों में संगठित गिरोहों ने वर्षों तक नाबालिग लड़कियों का यौन शोषण किया.
  • बीते दिनों रूपर्ट लो ने ब्रिटिश संसद में पीड़ितों की दिल दहला देने वाली गवाहियां पढ़कर सुनाईं.
  • जो जांच रिपोर्ट सामने आई है उसके आधार पर इसमें अधिक अनुपात में पाकिस्तानी मूल के लोगों का नाम सामने आया है.

ब्रिटेन में एक बार फिर ग्रूमिंग गैंग्स का मुद्दा सुर्खियों में है. बीते दो दशकों से ब्रिटिश समाज को परेशान कर रहे बैरोनेस लुईस केसी की रिपोर्ट और उसके बाद संसद में हुई बहसों ने इस मुद्दे को एक बार फिर जिंदा कर दिया है. सांसद रूपर्ट लो ने हाल ही में ब्रिटेन में मौजूद ग्रूमिंग गैंग्स (बच्चों का यौन शोषण करने वाले गिरोहों) को लेकर चर्चा फिर से छेड़ दी है. ये गिरोह बाल यौन शोषण में लिप्त रहे हैं. इन गिरोहों को लेकर ब्रिटिश सरकार की जांच में यह पाया गया कि संगठित बाल यौन शोषण के दोषी अधिकतर पाकिस्तानी मूल के है.

रूपर्ट लो ने ब्रिटिश संसद में पीड़ितों की दिल दहला देने वाली गवाहियां पढ़कर सुनाईं. इन गवाहियों में गंभीर यौन शोषण, कम उम्र में गर्भधारण, डराने-धमकाने, पुलिस की कथित मिलीभगत और संस्थागत नाकामियों के ब्योरे शामिल थे. आरोप है कि इंग्लैंड के कई शहरों में संगठित गिरोहों ने वर्षों तक नाबालिग लड़कियों का यौन शोषण किया, जबकि पुलिस, स्थानीय प्रशासन, अस्पताल और बाल संरक्षण एजेंसियां समय रहते कार्रवाई करने में नाकाम रहीं.

पीड़ित महिलाओं ने क्या बताया?

सांसद रूपर्ट लोवे ने संसद में कई पीड़िताओं की गवाहियां पढ़कर सुनाईं. उन्होंने सांसदों से कहा, "दुनिया को यह सुनना चाहिए कि हमारी स्वतंत्र जांच के दौरान पीड़ितों ने क्या बताया. इन बहादुर महिलाओं की आवाज आखिरकार सुनी जानी चाहिए."

संसद में पढ़ी गई एक गवाही में एक महिला ने बताया कि उसका शोषण तब शुरू हुआ जब वह सिर्फ 12 साल की थी.

एक अन्य पीड़िता ने आरोप लगाया कि कई लोगों ने उसे पकड़कर रखा, उसके साथ यौन हिंसा की और बाद में धमकी दी कि अगर उसने किसी को बताया तो उसे और उसके परिवार को नुकसान पहुंचाया जाएगा.

सबसे ज्यादा चर्चा उस गवाही की हुई जिसमें एक महिला ने दावा किया कि 13 से 16 साल की उम्र के बीच करीब तीन वर्षों तक उसका लगातार शोषण हुआ.

उसके शब्द थे, "मुझे लगता है कि तीन साल में करीब 600 से 700 अलग-अलग पुरुषों ने मेरा बलात्कार किया."

उन्होंने बताया, "मेरे दोनों गुप्तांगों से खून बह रहा था और सूजन इतनी ज्यादा थी कि मैं बैठ भी नहीं पा रही थी. मैंने अस्पताल के कर्मचारियों को बताया कि मेरे ड्रिंक में कुछ मिला दिया गया था, और मुझे नहीं पता कि क्या हुआ था, क्योंकि मैं सच बताने से बहुत डर रही थी. उन्होंने मुझसे कोई सवाल नहीं पूछा. उन्होंने मुझे कुछ गोलियां दीं और मुझे डिस्चार्ज कर दिया."

कुछ पीड़ितों ने बताया कि यह दुर्व्यवहार इतना बढ़ गया था कि इसमें जानवरों के साथ यौन संबंध बनाना भी शामिल था.

एक महिला ने बताया, "मुझे याद है कि एक आदमी ने एक वैन का पिछला दरवाजा खोला, और मैंने देखा कि 15 से 20 लड़कियां कुत्तों के पिंजरों में बंद थीं."

एक और महिला ने याद किया कि वहां कुत्ते लाए गए थे और उसके पास हिलने-डुलने की भी कोई जगह नहीं थी..

एक महिला ने बताया कि इस दुर्व्यवहार के दौरान, देश के अलग-अलग हिस्सों में कई पुलिस अधिकारियों ने कथित तौर पर उनके साथ बलात्कार किया.

एक अन्य महिला ने आरोप लगाया कि अस्पताल पहुंचने के बाद भी उससे ज्यादा सवाल नहीं पूछे गए और उसे उपचार देकर वापस भेज दिया गया, जबकि वह स्पष्ट रूप से गंभीर स्थिति में थी.

कुछ गवाहियों में यह आरोप भी लगाया गया कि कुछ सरकारी संस्थानों और बाल संरक्षण सेवाओं ने समय रहते हस्तक्षेप नहीं किया.

"हम श्वेत लड़कियां थीं, इसलिए हमें टारगेट किया गया"

यह बयान संसद में सुनाए जाने के बाद पूरे ब्रिटेन में बहस का विषय बन गया.

संसद में पढ़ी गई कुछ गवाहियों में नस्ल और धर्म का पहलू भी सामने आया. एक पीड़िता ने दावा किया कि कुछ आरोपी बार-बार कहते थे कि 'श्वेत और ईसाई लड़कियों की कोई इज्जत नहीं होती', जबकि मुस्लिम लड़कियों को उनसे बेहतर बताया जाता था.

महिला के मुताबिक ऐसे बयान उन्हें मानसिक रूप से तोड़ने और उनके साथ हो रहे दुर्व्यवहार को सही ठहराने के लिए इस्तेमाल किए जाते थे.

एक अन्य पीड़िता ने कहा कि वह ईसाई परिवार से हैं और क्रॉस पहनती थीं. उसके मुताबिक आरोपियों ने उसके धार्मिक विश्वास का मजाक उड़ाया और उन्हें अपमानित किया.

ब्रिटिश सांसद कैरोलिन डाइनेज ने भी संसद में अदालतों के दस्तावेजों का हवाला देते हुए कहा कि कुछ पीड़िताओं ने आरोप लगाया था कि उन्हें इसलिए निशाना बनाया गया क्योंकि वे श्वेत ब्रिटिश लड़कियां थीं.

एक सर्वाइवर ने याद किया कि उसे उन आदमियों में से एक ने प्रेग्नेंट कर दिया था, जिसके पिता एक इमाम, यानी कि एक मुस्लिम मौलवी थे.

एक पीड़िता ने बताया कि, "ईद और छुट्टियों के आस-पास ये चीजें और भी बढ़ जाती थीं, पार्टियां बड़ी होती जाती और इसमें और अधिक लोग शामिल हो जाते थे. तब लड़कियां भी अधिक होती थीं."

सबसे संवेदनशील पहलू: पाकिस्तानी मूल के आरोपियों की भूमिका

यह मामला राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील बन गया है क्योंकि कई हाई-प्रोफाइल मामलों में दोषी ठहराए गए लोगों में पाकिस्तानी मूल के ब्रिटिश पुरुष शामिल थे. पिछले साल जून में आई केसी रिपोर्ट (समूह-आधारित बाल यौन शोषण और दुर्व्यवहार पर राष्ट्रीय ऑडिट National Audit on Group-based Child Sexual Exploitation and Abuse) के मुताबिक कुछ क्षेत्रों के स्थानीय आंकड़ों में पाकिस्तानी या एशियाई मूल के पुरुषों का अनुपात अपेक्षाकृत अधिक दिखाई दिया. इस ऑडिट के दरम्यान ब्रिटेन के 85 इलाकों में जांच की गई थीं. 

हालांकि रिपोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय स्तर पर उपलब्ध डेटा अधूरा है क्योंकि बड़ी संख्या में मामलों में आरोपियों की जातीय पहचान दर्ज ही नहीं की गई थी.

रिपोर्ट का एक महत्वपूर्ण निष्कर्ष यह था कि कई वर्षों तक अधिकारी इस सवाल से बचते रहे कि अपराधियों की जातीय पृष्ठभूमि क्या थी.

यही कारण है कि बहस दो हिस्सों में बंट गई. एक पक्ष का कहना है कि अपराधियों की पृष्ठभूमि पर ईमानदार चर्चा होनी चाहिए. तो दूसरा पक्ष मानता है कि कुछ मामलों के आधार पर पूरे पाकिस्तान या मुस्लिम समुदाय को दोषी ठहराना गलत होगा.

पाकिस्तान ने क्या कहा?

पाकिस्तानी अखबार डॉन के मुताबिक जनवरी 2025 में पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने ब्रिटेन में पाकिस्तानियों के खिलाफ बढ़ती नस्लवादी और इस्लामोफोबिक टिप्पणियों की आलोचना की थी. पाकिस्तान का कहना था कि अपराधियों को सजा मिलनी चाहिए, लेकिन पूरे समुदाय को निशाना बनाना उचित नहीं है.

पुलिस और प्रशासन पर क्या आरोप लगे?

समूह-आधारित बाल यौन शोषण और दुर्व्यवहार पर राष्ट्रीय ऑडिट (National Audit on Group-based Child Sexual Exploitation and Abuse) की रिपोर्ट और संसदीय बहसों में सबसे गंभीर आरोप संस्थागत विफलता को लेकर लगे.

ब्रिटेन की गृह मंत्री यवेट कूपर ने संसद में स्वीकार किया कि पीड़ितों को न्याय दिलाने में गंभीर कमियां रहीं.

रिपोर्ट के मुताबिक कई मामलों में पीड़ित लड़कियों को समस्या पैदा करने वाली किशोरियां मान लिया गया. यौन शोषण की शिकायतों को पर्याप्त गंभीरता से नहीं लिया गया. अपराधियों के नेटवर्क को समय रहते नहीं तोड़ा जा सका. नस्लीय संवेदनशीलता के डर से कुछ अधिकारी खुलकर चर्चा करने से बचते रहे.

क्या सभी आरोपी पाकिस्तानी मूल के थे?

नहीं. यह इस पूरे विवाद का सबसे महत्वपूर्ण तथ्य है. केसी रिपोर्ट और अन्य आधिकारिक स्रोतों के अनुसार अपराधियों में विभिन्न जातीय पृष्ठभूमि के लोग शामिल थे. हालांकि कुछ क्षेत्रों में पाकिस्तानी मूल के पुरुषों का अनुपात अधिक पाया गया, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर उपलब्ध आंकड़े इतने पूर्ण नहीं हैं कि पूरे देश के लिए कोई व्यापक निष्कर्ष निकाला जा सके.

क्या होता है ग्रूमिंग गैंग?

ग्रूमिंग उस प्रक्रिया को कहा जाता है, जिसमें किसी बच्चे या किशोर को धीरे-धीरे विश्वास में लेकर उसका शोषण करने की तैयारी की जाती है. ब्रिटेन में सामने आए कई मामलों में आरोपियों ने पहले दोस्ती की, उपहार दिए, भावनात्मक सहारा बनने का दिखावा किया, फिर शराब, नशे, धमकी और हिंसा के जरिए लड़कियों को अपने जाल में फंसाया. बाद में कई पीड़िताओं ने आरोप लगाया कि उन्हें एक से अधिक अपराधियों के बीच भेजा गया और लंबे समय तक उनका शोषण होता रहा.

कहानी कहां से शुरू हुई?

इस मुद्दे ने पहली बार राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान तब खींचा जब 2002 में तत्कालीन लेबर सांसद एन क्रायर ने वेस्ट यॉर्कशायर के कीथली इलाके में ऐसे मामलों को लेकर चेतावनी दी. इसके बाद रोदरहम, रोचडेल, ओल्डहम, ऑक्सफोर्ड, टेलफोर्ड, हडर्सफील्ड, हैलिफैक्स और कई अन्य शहरों में बड़े पैमाने पर जांच शुरू हुई. बाद में द टाइम्स और अन्य मीडिया संस्थानों की जांचों में सामने आया कि सैकड़ों लड़कियां वर्षों तक शोषण का शिकार होती रहीं. कई मामलों में शिकायतें दर्ज होने के बावजूद पुलिस और सामाजिक संस्थाएं पर्याप्त कार्रवाई नहीं कर सकीं.

अमेरिकन पब्लिकेशन द फ्री प्रेस के मुताबिक, यह स्कैंडल दो दशक से भी पहले यॉर्कशायर के रॉदरहैम से लोगों की नजर में आया, वहां अधिकारियों को 2001 के आसपास युवा श्वेत लड़कियों की सिस्टमैटिक ग्रूमिंग और यौन शोषण के बारे में बताया गया था.  हालांकि उस मामले में करीब एक दशक बाद 2010 में सजा हुई. बाद में यही पैटर्न ब्रिटेन के 50 से भी अधिक शहरों में दोहराया गया. 

प्रोफेसर एलेक्सिस जे की 2014 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अकेले रॉदरहैम में 1997 से 2013 के बीच 16 सालों के दरम्यान 1400 से अधिक बच्चों का यौन शोषण हुआ.

यह मुद्दा नया नहीं, पहले भी हो चुकी है जांच

चाइल्ड सेक्शुअल एक्सप्लॉइटेशन टास्कफोर्स ने अपनी एक रिपोर्ट में बताया कि 2023 में ब्रिटेन में बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों के 1.15 लाख से अधिक मामले रिपोर्ट किए गए. इनमें से 4228 (3.7 प्रतिशत) मामले ग्रुप-आधारित अपराध पाए गए. इस टास्कफोर्स को अप्रैल 2023 में तत्कालीन प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने ग्रूमिंग गैंग्स से निपटने के लिए बनाया था. अपने ऑपरेशन के पहले साल में इस टास्कफोर्स ने 550 से अधिक संदिग्धों को गिरफ्तार किया.

ताजा मामले में ब्रिटिश सरकार ने स्वतंत्र राष्ट्रीय जांच शुरू करने का फैसला किया है. सरकार का कहना है कि पुराने मामलों की समीक्षा की जाएगी, आरोपियों की जातीय पहचान का बेहतर रिकॉर्ड रखा जाएगा, पुलिस जांच को मजबूत बनाया जाएगा और पीड़ितों को सभी आवश्यक सहायता उपलब्ध मुहैया कराई जाएगी.

संसद में अपने भाषण के अंत में रूपर्ट लोवे ने कहा, "हम सबकी जिम्मेदारी है कि अब सिर्फ बात न करें, बल्कि कार्रवाई करें."

तो ब्रिटेन के सामने यह सबसे बड़ा सवाल है कि क्या वह उन महिलाओं को न्याय दिला पाएगा, जिनकी शिकायतें वर्षों तक अनसुनी रहीं. साथ ही क्या भविष्य में पुलिस और प्रशासन इस तरह के अपराध पर नियंत्रण करने में कामयाब होंगे

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