- दिल्ली नगर निगम अधिनियम में संशोधन के तहत सड़क पर बिना पट्टे कुत्ते के घूमने पर जुर्माना एक हजार रुपये होगा
- मवेशियों को बांधने और मकान नंबर मिटाने पर भी जुर्माना वर्तमान से बढ़ाकर एक हजार रुपये कर दिया जाएगा
- सफाई व्यवस्था न करने, कूड़ा फेंकने और खतरनाक आतिशबाजी पर जुर्माने में महत्वपूर्ण वृद्धि की गई है
दिल्ली नगर निगम अधिनियम, 1957 के तहत सार्वजनिक सड़क पर कुत्ते को बिना पट्टे के घूमने देने पर वर्तमान में 50 रुपये का जुर्माना था, जो अब संसद द्वारा जन विश्वास (प्रावधान संशोधन) विधेयक, 2025 पारित होने के बाद बढ़कर 1000 रुपये हो जाएगा. इस विधेयक को वाणिज्य और उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने शुक्रवार को लोकसभा में पेश किया. विधेयक में दिल्ली नगर निगम अधिनियम, 1957 में कई संशोधन प्रस्तावित हैं.
इसके तहत, सार्वजनिक सड़क पर मवेशियों को बांधने पर भी जुर्माना 100 रुपये से बढ़कर 1,000 रुपये हो जाएगा. इसके अतिरिक्त, मकान नंबर को मिटाने या नष्ट करने पर, जिस पर वर्तमान में 50 रुपये का जुर्माना है, उसे भी बढ़ाकर 1000 रुपये कर दिया जाएगा.
अन्य जुर्माने भी बढ़ाए जा रहे हैं. उदाहरण के लिए, खतरनाक आतिशबाजी करने पर जुर्माना 50 रुपये से बढ़कर 500 रुपये हो जाएगा. नगर निगम के अधिकारी को परिसर में प्रवेश करने से रोकने पर, जिस पर पहले 50 रुपये का जुर्माना था, उसे बढ़ाकर 500 रुपये कर दिया जाएगा.
इमारतों के संबंध में, खतरनाक ढांचे को खाली करने का आदेश दिए जाने पर भी ऐसा न करने पर जुर्माना 200 रुपये से बढ़कर 1,000 रुपये हो जाएगा. इसी प्रकार, निर्माण पूर्णता प्रमाण पत्र के बिना किसी इमारत पर कब्जा करने पर भी जुर्माना 200 रुपये से बढ़कर 1000 रुपये हो जाएगा.
धारा 465 के तहत उन उल्लंघनों के लिए सामान्य जुर्माना, जिनके लिए कोई विशिष्ट जुर्माना निर्धारित नहीं है, 100 रुपये से बढ़कर 500 रुपये हो जाएगा, साथ ही दैनिक जुर्माना 20 रुपये से बढ़कर 50 रुपये हो जाएगा.
विधेयक कई प्रावधानों को समाप्त भी करेगा. उदाहरण के लिए, अधिनियम में अधिकतम जुर्माना, जो वर्तमान में धारा 337(4) के तहत बिना सूचना के निर्माण कार्य शुरू करने पर 10,000 रुपये और 500 रुपये प्रति दिन है, उसे पूरी तरह से हटा दिया जाएगा.
धारा 387, जिसके तहत नगर निगम के सफाईकर्मी को बिना सूचना दिए अनुपस्थित रहने पर एक महीने तक की कैद हो सकती थी, उसको अपराध की श्रेणी से हटाकर उसके स्थान पर 500 रुपये का दीवानी जुर्माना लगाया जाएगा.
इसके विपरीत, कई ऐसे अपराध जिन पर वर्तमान में मामूली जुर्माना लगता है, उन्हें आपराधिक दायित्व की श्रेणी में रखा जाएगा. उदाहरण के लिए, सड़कों पर सामान फेंकने पर लगने वाले 100 रुपये के जुर्माने को बदलकर छह महीने तक की कैद और/या 5,000 रुपये के जुर्माने में बदल दिया जाएगा.
इसके अतिरिक्त, विधेयक में अधिकांश उल्लंघनों के न्यायनिर्णय को आपराधिक न्यायालयों से हटाकर कम से कम सहायक आयुक्त के पद के नगर निगम अधिकारी को सौंपने का प्रस्ताव है. इसमें प्रस्तावित धारा 461ए के तहत 30 दिन की अपील अवधि और निपटान के लिए छह महीने की समय सीमा शामिल होगी.
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