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दिल्लीः बाइक की टक्कर में पैर गंवाने वाली महिला को 1.21 करोड़ रुपए का मुआवाजा देने का आदेश

दिल्ली की नरेला निवासी महिला 2016 में एक भीषण हादसे का शिकार हुई थी. स्कूल से बेटे को लाने के दौरान स्कूटी सवार महिला की तेज रफ्तार से टक्कर हुई थी, इस हादसे के कारण महिला को एक पैर गंवाना पड़ा, अब कोर्ट ने महिला को 1.21 करोड़ का मुआवजा देने का आदेश दिया है.

दिल्लीः बाइक की टक्कर में पैर गंवाने वाली महिला को 1.21 करोड़ रुपए का मुआवाजा देने का आदेश
बाइक स्कूटी की टक्कर में महिला को पैर गंवाना पड़ा था.
  • दिल्ली मोटर दुर्घटना दावा ट्रिब्यूनल ने पैर गंवाने वाली महिला को 1.21 करोड़ रुपए मुआवजा देने का आदेश दिया.
  • रेणुका बिष्ट को तेज रफ्तार बाइक की टक्कर में गंभीर चोटें आईं और उनका बायां पैर घुटने से काटना पड़ा.
  • हादसा तब हुआ जब बिष्ट अपने बेटे को स्कूल से लेकर स्कूटी पर घर लौट रही थीं और बाइक ने टक्कर मारी.
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नई दिल्ली:

2016 में तेज रफ्तार बाइक की टक्कर में पैर गंवाने वाली महिला को दिल्ली ट्रिब्यूनल ने 1.21 करोड़ रुपए का मुआवजा देने का आदेश दिया है. यह आदेश दिल्ली मोटर दुर्घटना दावा ट्रिब्यूनल ने दिया. पीठासीन अधिकारी ऋचा मनचंदा दिल्ली के नरेला निवासी रेणुका बिष्ट द्वारा दायर दावे की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह फैसला दिया. नरेला निवासी रेणुका बिष्ट का 8 मार्च, 2016 को यह भयानक एक्सीडेंट हो गया था. इस हादसे में उन्हें अपना एक पैर खोना पड़ा था.

तेज रफ्तार बाइक की टक्कर से गंवाना पड़ा पैर

25 फरवरी के एक आदेश में ट्रिब्यूनल ने कहा, "रिकॉर्ड पर आए साक्ष्यों के आधार पर यह माना जाता है कि याचिकाकर्ता ने प्रबल संभावनाओं के आधार पर अपना मामला साबित कर दिया है कि उसे सड़क दुर्घटना में चोटें आईं, जो प्रतिवादी (बाइक चालक) द्वारा लापरवाही और तेज गति से वाहन चलाने के कारण हुई थी."

बेटे को स्कूल से लाते समय स्कूटी सवार बिष्ट की बाइक से हुई थी टक्कर

ट्रिब्यूनल ने पाया कि बिष्ट अपने बेटे को स्कूल से लेने के बाद स्कूटी पर घर लौट रही थीं, तभी कथित तौर पर तेज रफ्तार से आ रही बाइक ने उनकी स्कूटी को टक्कर मार दी, जिससे दोनों सवार गिर गए और उन्हें चोटें आईं. ट्रिब्यूनल ने कहा कि महिला को गंभीर चोटें आईं और बाद में उनके बाएं पैर का घुटने से जोड़ काटना पड़ा. इस कारण उस अंग में 75 प्रतिशत स्थायी विकलांगता हो गई.

75 फीसदी से अधिक की स्थायी विकलांगता की शिकार हुई महिला

ट्रिब्यूनल ने कहा, "याचिकाकर्ता को बाएं घुटने के जोड़ के विच्छेदन के साथ बाएं निचले अंग में 75 प्रतिशत स्थायी विकलांगता हुई है. इस प्रकार वह दुर्घटना के बाद जीवन की सामान्य सुविधाओं का आनंद लेने में असमर्थ होंगी और उनके जीवन की गुणवत्ता निश्चित रूप से प्रभावित हुई है."

बीमा कंपनी को महिला को देना होगा मुआवजा

इसके बाद ट्रिब्यूनल ने बिष्ट को विभिन्न मदों के तहत मुआवजे के रूप में 1.21 करोड़ रुपये देने का आदेश दिया. ट्रिब्यूनल ने माना कि दुर्घटना के समय मोटरसाइकिल का बीमा था और बीमा कंपनी को 30 दिनों के भीतर मुआवजा राशि जमा करने का निर्देश दिया.

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