MCD संशोधन बिल : तीनों निगमों के एकीकरण के पीछे बीजेपी की मंशा आर्थिक दशा सुधारना और कुछ और..!

तीनों नगर निगमों के एकीकरण के मामले में प्रतिक्रिया देते हुए कर्मचारी नेता आनंद शर्मा कहते हैं कि वर्ष 2012 तक कम से कम तनख्वाह समय पर मिलती थी लेकिन अब 3-4 महीने की तनख्वाह बकाया रहती है.

MCD संशोधन बिल : तीनों निगमों के एकीकरण के पीछे बीजेपी की मंशा आर्थिक दशा सुधारना और कुछ और..!

केंद्रीय गृह राज्‍य मंत्री नित्‍यानंद राय ने लोकसभा में एमसीडी संशोधन बिल पेश किया था

नई दिल्‍ली :

दिल्ली में तीनों नगर निगम को एक करने का बिल पेश कर दिया है, लेकिन 10 साल बाद दोबारा तीनों नगर निगमों को क्यों एक किया जा रहा है. हमने निगमों की माली हालत की जमीनी हकीकत जाने की कोशिश की. पूर्वी दिल्ली नगर निगम के मुख्यालय की बात करें तो 10 साल से यह किराए की इमारत में चल रहा है.संसद में जहां एक तरफ तीनों नगर निगम को एक करने का बिल रखा जा रहा था तो दूसरी ओर यहां चार महीने से बकाया तनख्वाह के लिए बेलदार, स्‍थायी समिति के चेयरमैन के साथ बैठक में व्‍यस्‍त थे. हालात यह है कि स्थाई समिति के चेयरमैन बीएस पंवार को ही 5 साल में महज 30 लाख रुपए वार्ड के  विकास के लिए मिले है. ऐसी स्थिति में वार्ड का विकास कितना हुआ होगा, सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है. पंवार कहते हैं, 'अभी रिटायरमेंट वाले गए हैं. हम यहां से पेंशन भी नहीं दे पा रहे हैं. एबी ग्रुप के अधिकारियों को 5 महीने से तनख्वाह नहीं दे पा रहे हैं. 

तीनों नगर निगमों के एकीकरण के मामले में प्रतिक्रिया देते हुए कर्मचारी नेता आनंद शर्मा कहते हैं कि वर्ष 2012 तक कम से कम तनख्वाह समय पर मिलती थी लेकिन अब 3-4 महीने की तनख्वाह बकाया रहती है.  डीबीसी एसोसिएशन के अध्‍यक्ष आनंद बताते हैं, '2012 से पहले दिक्कत नहीं होती थी. सैलरी बोनस की समस्या नहीं आती थी. तीनों निगम के एक होने से खुश जरूर हैं लेकिन इससे हमारी समस्‍या पूरी तरह से खत्‍म नहीं होती हैं.'
 
दिल्ली की तीनों नगर निगम में से सबसे ज्यादा खस्ताहालत पूर्वी दिल्ली नगर निगम और उत्तरी दिल्ली निगम की है. पूर्वी दिल्ली की सालाना आमदनी 350 करोड़ है और खर्चा 600 करोड़ रुपए है. इसी तरह उत्तरी दिल्ली नगर निगम की आमदनी करीब 4700 करोड़ है जबकि देनदारी करीब 7 हजार करोड़ की है. कोविड महामारी के कारण हालत और खराब हुई है. कोविड की वजह से तीनों निगमों की आय 40% तक घट गई है. इसके बावजूद कई जानकार, नगर निगम चुनाव से ठीक पहले, तीनों नगर निगमों के एकीकरण के फैसले में आर्थिक दशा सुधारना कम और राजनीतिक मंशा ज्‍यादा देर रहे हैं. इसीलिए आम आदमी पार्टी और बीजेपी के बीच आरोप प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है. दिल्‍ली के सीएम अरविंद केजरीवाल कहते हैं कि बीजेपी को नगर निगम चुनाव में हार का डर सता रहा था इसी के चलते इस तरह का फैसला लिया गया है. दिल्ली में नगर निगम ने शिक्षा, स्वास्थ्य, सफाई, लाइसेंस सबका जिम्मा ले रखा है इसी के चलते दिल्ली की दो करोड़ से ज्यादा की आबादी के बीच निगम अपने काम से कम और हड़तालों की वजह से ज्यादा चर्चा में रही है. 

- ये भी पढ़ें -

* साबरमती में गांधी आश्रम की पुनर्विकास योजना पर महात्मा गांधी के प्रपौत्र पहुंचे सुप्रीम कोर्ट
* "RLD को 25 लाख वोट मिले, इतने में तो कई राज्यों में बन जाती हैं सरकारें : जयंत चौधरी
* "व्हीलचेयर पर बैठी महिला यात्री की तलाशी के लिए कपड़े उतरवाए, CISF कर्मी सस्पेंड

Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com


योगी आदित्यनाथ ने दूसरी बार ली उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पद की शपथ