
संसद परिसर में रखे अस्र-शस्त्र।
नई दिल्ली:
संसद भवन में टैंक और मिसाइल देखकर चौंकिए मत. न तो कोई आतंकी हमले का डर है और न ही आपातकालीन हालात पैदा हुए हैं. वास्तव में यह डीआरडीओ के हथियारों की प्रदर्शनी है जो सांसदों के लिए लगाई गई है. यह पहला मौका होगा जब संसद भवन में रक्षा अनुसंधान परिषद विकास संगठन यानि कि डीआरडीओ ने देश भर से चुने गए सांसदों के लिए ऐसी कोई प्रदर्शनी लगाई है.
इस प्रदर्शनी के जरिए सांसद डीआरडीओ के काम को करीब से देख पाएंगे. तीन अगस्त से पांच अगस्त तक चलने वाली इस प्रदर्शनी का उद्घाटन लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन करेंगी. खास बात यह कि यह सारे हथियार देश में ही बने हैं. इनमें लाइट कॉम्बेट एयरकाफ्ट तेजस, ब्रहमोस, अर्जुन टैंक, एयरबोर्न अर्ली एंड कंट्रोल सिस्टम यानि कि एईडब्लू एंड सी टोही विमान, मल्टी बैरल रॉकेट लांचर पिनाका, वरुणास्त्र टारपीडो, रडार के अलावा कई अन्य हथियार प्रणाली शामिल हैं.
डीआरडीओ की स्थापना सन 1958 में हुई थी. देशभर में डीआरडीओ की 52 लैबोरेटरी हैं जहां सेना के लिए कई तरह के हथियार बनते हैं. वैसे डीआरडीओ की आलोचना इस बात को लेकर होती है कि उनके ज्यादातर प्रोजेक्ट समय सीमा में पूरे नहीं होते जिसका खामियाजा सेना को उठाना पड़ता है.
इस प्रदर्शनी के जरिए सांसद डीआरडीओ के काम को करीब से देख पाएंगे. तीन अगस्त से पांच अगस्त तक चलने वाली इस प्रदर्शनी का उद्घाटन लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन करेंगी. खास बात यह कि यह सारे हथियार देश में ही बने हैं. इनमें लाइट कॉम्बेट एयरकाफ्ट तेजस, ब्रहमोस, अर्जुन टैंक, एयरबोर्न अर्ली एंड कंट्रोल सिस्टम यानि कि एईडब्लू एंड सी टोही विमान, मल्टी बैरल रॉकेट लांचर पिनाका, वरुणास्त्र टारपीडो, रडार के अलावा कई अन्य हथियार प्रणाली शामिल हैं.
डीआरडीओ की स्थापना सन 1958 में हुई थी. देशभर में डीआरडीओ की 52 लैबोरेटरी हैं जहां सेना के लिए कई तरह के हथियार बनते हैं. वैसे डीआरडीओ की आलोचना इस बात को लेकर होती है कि उनके ज्यादातर प्रोजेक्ट समय सीमा में पूरे नहीं होते जिसका खामियाजा सेना को उठाना पड़ता है.
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