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This Article is From Mar 18, 2025

सुपरटेक के हजारों फ्लैट बायर्स का दर्द नहीं, नोएडा अथॉरिटी को बस अपने पैसे की फिक्र, सुप्रीम कोर्ट ने जमकर क्लास लगा दी

सुपरटेक के हजारों फ्लैट बायर्स को 10 साल के लंबे इंतजार के बाद भी अपना घर नहीं मिल पाया है. NCLAT ने सुपरटेक के 16 अधूरे प्रोजेक्ट्स को नैशनल बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कंपनी (NBCC) को देने के आदेश दिए थे, लेकिन इस आदेश के खिलाफ नोएडा अथॉरिटी सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई. हालांकि, कोर्ट ने अब नोएडा अथॉरिटी को फटकार लगाई है.

सुपरटेक के हजारों फ्लैट बायर्स का दर्द नहीं, नोएडा अथॉरिटी को बस अपने पैसे की फिक्र, सुप्रीम कोर्ट ने जमकर क्लास लगा दी
सुप्रीम कोर्ट की नोएडा अथॉरिटी को फटकार
नई दिल्‍ली:

सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा अथॉरिटी को जमकर फटकार लगाई है. कोर्ट ने कहा कि अथॉरिटी को सिर्फ अपने बकाए पैसे की चिंता है, उन हजारों फ्लैट बायर्स से कोई लेना-देना नहीं है, जो घर खरीदने के बावजूद किराए के घर में रहने को मजबूर हैं. कोर्ट ने सोमवार को नोएडा अथॉरिटी द्वारा अपीलीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण के उस फैसले के खिलाफ अपील करने पर आपत्ति जताई, जिसमें सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी नेशनल बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कंपनी (NBCC) को दिवालिया रियल एस्टेट कंपनी सुपरटेक (Supertech) की 16 अधूरे रेजिडेंशियल प्रोजेक्‍ट्स को पूरा करने की इजाजत दी गई थी. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) गठित कर सकता है.

सुप्रीम कोर्ट की नोएडा अथॉरिटी  को फटकार 

  • नोएडा अथॉरिटी ने NCLAT के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में गुहार लगाई थी. 
  • NCLAT ने सुपरटेक के 16 अधूरे प्रोजेक्ट्स को  नैशनल बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कंपनी (NBCC) को देने के आदेश दिए थे.
  • नोएडा अथॉरिटी ने सुप्रीम कोर्ट में इस आदेश का विरोध करते हुए कहा कि यदि NBCC के पास प्रोजेक्ट चले जाएंगे,  तो उसका बकाया कौन चुकाएगा?
  • सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को नोएडा अथॉरिटी को फटकारते हुए कहा कि इस हालत के लिए अथॉरिटी के अधिकारी जिम्मेदार खुद हैं. 
  • सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह SIT के गठन पर भी विचार कर रहा है, जो जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करेगा. 

'जमीन का बकाया खत्म हो सकता है...'

नोएडा अथॉरिटी के वकील संजीव सेन ने सीजेआई संजीव खन्ना और जस्टिस संजय कुमार और जॉयमाल्या बागची की पीठ को बताया कि जब कंपनी दिवालिया कार्यवाही से गुजर रही थी, तो एनबीसीसी को साइटें देना राष्ट्रीय कंपनी कानून अपीलीय न्यायाधिकरण के अधिकार क्षेत्र से बाहर था. उन्होंने कहा कि दिवालिया कार्यवाही के तहत, नए आवेदक बकाया- नोएडा को देय भूमि बकाया और बैंकों को ऋण चुकाने के लिए उत्तरदायी होगा. सुपरटेक द्वारा आवास परियोजनाओं के पूरा नहीं होने के कारण हजारों घर खरीदारों की परेशानी से वाकिफ पीठ ने नोएडा अथॉरिटी से कहा कि जमीन का बकाया खत्म हो सकता है, क्योंकि आपने यह समस्या पैदा की है. आप इसके लिए जिम्‍मेदार हैं.

होमबॉयर्स को 10 साल तक परेशान होना पड़ा

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आपने (नोएडा अथॉरिटी) जमीन देने के लिए ऐसा स्‍ट्रक्‍चर क्यों बनाया, जो पूरी तरह से रियल एस्टेट एजेंटों के पक्ष में था? इसकी वजह से, हजारों होमबॉयर्स को 10 साल से अधिक समय तक परेशान होना पड़ा? कोर्ट ने चेतावनी दी कि वह इस गड़बड़ी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के लिए एक एसआईटी गठित करने पर विचार कर रही है. दरअसल, 21 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने एनसीएलएटी के 12 दिसंबर के आदेश पर रोक लगा दी थी, जिसमें एनबीसीसी को सुपरटेक की अधूरी परियोजनाओं को संभालने के लिए कहा गया था, जहां अनुमानित 27,000 होमबॉयर्स ने अपना पैसा लगाया था. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने आईबीसी कार्यवाही जारी रखने की अनुमति दी थी.

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