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डॉ बीआर अम्बेडकर विश्वविद्यालय दिल्ली में शोधोत्सव-2026 का भव्य शुभारंभ

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में नीति आयोग के उपाध्यक्ष डॉ. अशोक कुमार लाहिरी उपस्थित रहे. उन्होंने विश्वविद्यालय की इस पहल की सराहना करते हुए इसे कुलपति प्रो. अनु सिंह लाठर के दूरदर्शी नेतृत्व का परिणाम बताया.

डॉ बीआर अम्बेडकर विश्वविद्यालय दिल्ली में शोधोत्सव-2026 का भव्य शुभारंभ
दिल्ली में शोधोत्सव-2026
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डॉ. बी. आर. अम्बेडकर विश्वविद्यालय दिल्ली में हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी शोधोत्सव-2026 का शुभारंभ 7 सितंबर 2026 को हुआ. विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. अनु सिंह लाठर के नेतृत्व में आयोजित यह विश्वविद्यालय का छठवां शोधोत्सव है. इस वर्ष शोधोत्सव के संवाद और विमर्श के लिए ‘विकसित भारत के लिए शाश्वत विकास की पुनर्परिकल्पना' विषय रखा गया है. शोधोत्सव के उद्घाटन सत्र का आयोजन भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी में किया गया.

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में नीति आयोग के उपाध्यक्ष डॉ. अशोक कुमार लाहिरी उपस्थित रहे. उन्होंने विश्वविद्यालय की इस पहल की सराहना करते हुए इसे कुलपति प्रो. अनु सिंह लाठर के दूरदर्शी नेतृत्व का परिणाम बताया. अपने संबोधन में डॉ. लाहिरी ने कहा कि जिज्ञासा, शोध और नवाचार भारतीय संस्कृति का हिस्सा रहे हैं. उन्होंने कहा कि भारतीय समाज की विशेषता रही है कि वह ज्ञान की शक्ति के माध्यम से समाज और राष्ट्र को सशक्त बनाने का प्रयास करता रहा है.

डॉ. लाहिरी ने शोध एवं विकास के लिए भारत सरकार की ओर से की जा रही पहलों का उल्लेख करते हुए शोधार्थियों और संकाय सदस्यों का आह्वान किया कि वे अपनी बौद्धिक पूंजी को राष्ट्र के विकास की शक्ति बनाएं. उन्होंने शोध, नवाचार और उद्यमिता को इसके महत्वपूर्ण माध्यम बताते हुए शोध के परिणामों को सामाजिक नवाचार से जोड़ने और समाज की आवश्यकताओं के अनुरूप ठोस योजनाएं विकसित करने पर जोर दिया.

कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. अनु सिंह लाठर ने की. अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में उन्होंने विश्वविद्यालय में शोध और नवाचार के क्षेत्र में हो रही प्रगति पर प्रसन्नता व्यक्त की और इसका श्रेय विश्वविद्यालय के संकाय सदस्यों एवं विद्यार्थियों को दिया. उन्होंने भारतीय संस्कृति की सत्यानुसंधान परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि सत्य की खोज भारतीयता का अभिन्न हिस्सा रही है और इसकी स्वाभाविक विशेषताएं सत्यनिष्ठा, प्रासंगिकता और समाज के प्रति जवाबदेही हैं.

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प्रो. लाठर ने कहा कि शोध का उद्देश्य केवल ज्ञान का विस्तार करना नहीं, बल्कि राष्ट्रीय प्राथमिकताओं और सामाजिक विकास की चुनौतियों को समझना और उनका समाधान खोजने में योगदान देना भी होना चाहिए. उन्होंने शोधकर्ताओं से अपनी मान्यताओं पर लगातार सवाल उठाने और अपने शोध-तरीकों की सीमाओं को ईमानदारी से स्वीकार करने का आह्वान किया. उन्होंने कहा कि इसी आत्मालोचन और ईमानदारी के माध्यम से शोध समाज की बदलती और उभरती चुनौतियों के प्रति अधिक जवाबदेह बन सकता है.

उन्होंने कहा कि संस्थागत स्तर पर शोध के माध्यम से नीति, नवाचार और सामुदायिक आवश्यकताओं से जुड़े समाधान विकसित करने की दिशा में प्रयासों को और मजबूत करने की आवश्यकता है. इसके साथ ही भारतीय ज्ञान परंपरा के क्षेत्र में शोध को बढ़ावा देना भी आवश्यक है. उन्होंने कहा कि इससे हमें अपनी संस्कृति और परंपरा को देखने की एक नई दृष्टि मिलेगी और सामाजिक विज्ञान एवं मानविकी के शोध को संस्कृति से और अधिक गहराई से जोड़ने में मदद मिलेगी.

प्रो. लाठर ने यह आकांक्षा व्यक्त की कि आने वाले समय में विश्वविद्यालय के संकाय सदस्य और शोधार्थी अपने मौलिक शोध कार्यों के माध्यम से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाएंगे. उन्होंने आश्वस्त किया कि विश्वविद्यालय एक टिकाऊ और सशक्त शोध संस्कृति के विकास के लिए हर संभव प्रयास करता रहेगा.

इस अवसर पर शोधोत्सव समिति के अध्यक्ष प्रो. अमित मिश्रा ने विश्वविद्यालय की शोध उपलब्धियों पर प्रकाश डाला. उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय में वर्तमान में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय महत्व की 11 वृहद एवं लघु शोध परियोजनाएं संचालित हो रही हैं. उन्होंने बताया कि संकाय सदस्यों को शोध कार्य के लिए ‘सीड मनी ग्रांट' योजना के अंतर्गत आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है और अब तक 48 शिक्षकों को यह अनुदान दिया जा चुका है.

शोधार्थियों को प्रोत्साहित करने के लिए नॉन-नेट अध्येता वृत्ति योजना तथा गुणवत्तापरक शोध प्रकाशन को बढ़ावा देने के लिए *‘आरिपस' (अम्बेडकर यूनिवर्सिटी रिसर्च पब्लिकेशन इंसेंटिव) योजना भी संचालित की जा रही है.

डॉ. प्रतिमा, संकायाध्यक्ष, शोध एवं विकास ने शोधोत्सव के दौरान आयोजित होने वाली विभिन्न गतिविधियों की जानकारी दी और विश्वविद्यालय के शोध एवं नवाचार की प्रमुख उपलब्धियों को साझा किया. उन्होंने बताया कि शोधोत्सव में विद्यार्थियों और संकाय सदस्यों के लिए राष्ट्रीय संगोष्ठी, युवा विद्यार्थियों के लिए ‘रिसर्च आइडिएशन फेस्ट' तथा अकादमिक जगत और उद्योग जगत के बीच संवाद को बढ़ावा देने के लिए परिचर्चा सत्र आयोजित किए जाएंगे.

इन गतिविधियों में शाश्वत विकास, विकसित भारत और विकसित दिल्ली के लक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए सामाजिक विज्ञान एवं मानविकी के क्षेत्र में शोध की भूमिका और संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया जाएगा.

इस अवसर पर विश्वविद्यालय की ‘आरिपस' (अम्बेडकर यूनिवर्सिटी रिसर्च पब्लिकेशन इंसेंटिव) योजना के अंतर्गत इस वर्ष 35 संकाय सदस्यों को उनके 49 शोध पत्रों के प्रकाशन के लिए पुरस्कृत किया गया. यह सम्मान विश्वविद्यालय में गुणवत्तापरक शोध प्रकाशन को प्रोत्साहित करने और शोध की संस्कृति को और मजबूत करने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को रेखांकित करता है. कार्यक्रम के अंत में कुलसचिव कर्नल ओंकार सिंह (सेवानिवृत्त) ने धन्यवाद ज्ञापित किया.

शोधोत्सव-2026 विश्वविद्यालय में शोध और नवाचार को बढ़ावा देने के साथ-साथ शोध को समाज की आवश्यकताओं और देश की विकास यात्रा से जोड़ने का एक महत्वपूर्ण मंच है. इस वर्ष ‘विकसित भारत के लिए शाश्वत विकास की पुनर्परिकल्पना' विषय के माध्यम से शोधोत्सव विद्यार्थियों, शोधार्थियों और संकाय सदस्यों को शाश्वत विकास तथा विकसित भारत और विकसित दिल्ली के लक्ष्यों के संदर्भ में नए विचारों और संभावनाओं पर संवाद का अवसर प्रदान कर रहा है.

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