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दिल्ली की धूल को कैमरा देखेगा, AI करेगा जांच और DPCC काटेगी चालान, अलर्ट भी होगा जारी

दिल्ली की धूल को कैमरा देखेगा, AI करेगा जांच और DPCC काटेगी चालान, अलर्ट भी होगा जारी

दिल्ली में धूल कहां उड़ रही है उसके पीछे क्या कारण है और धूल की मॉनिटरिंग का काम 360 कैमरे और AI करेंगे ताकि रियल टाइम मॉनिटरिंग की जा सके. दिल्ली के प्रदूषण में 27 फीसदी हिस्सेदारी धूल की होती है. यही वजह है कि दिल्ली के वातावरण को साफ सुधरा रखने के लिए डस्ट वेबसाइट को दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने लॉन्‍च किया है. इसमें खास बात ये है कि GIA मैपिंग, 360 डिग्री कैमरों और एआई सेंसर से लैस प्लेटफॉर्म दिल्ली के किस जगह पर ज्यादा प्रदूषण होगा उसका अलर्ट भी जारी करेगा. पोर्टल के माध्यम से अनुपालन प्रमाणपत्र और नियमों के उल्लंघन पर एनफोर्समेंट नोटिस स्वत: जारी किए जा सकेंगे. 

रेखा गुप्ता ने सोमवार को एआई-संचालित ‘डस्ट पोर्टल 2.0' - डस्ट पॉल्यूशन कंट्रोल सेल्फ-असेसमेंट वेब पोर्टल और मोबाइल एप्लिकेशन का शुभारंभ किया. दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) की ओर से विकसित यह अत्याधुनिक डिजिटल प्लेटफॉर्म एआई की सहायता से निर्माण एवं विध्वंस स्थलों पर धूल नियंत्रण उपायों की वास्तविक समय में निगरानी करेगा. इस मौके पर दिल्ली के पर्यावरण मंत्री सरदार मनजिंदर सिंह सिरसा सहित संबंधित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे.

दिल्ली सरकार के आंकड़ों के अनुसार, सड़क, मिट्टी और निर्माण गतिविधियों से उत्पन्न धूल राजधानी के वायु प्रदूषण का एक बड़ा कारण है. ग्रीष्म ऋतु में कुल वायु प्रदूषण में इसकी हिस्सेदारी लगभग 27 प्रतिशत और शीत ऋतु में 15 प्रतिशत तक रहती है. वहीं, पीएम-10 उत्सर्जन में धूल की हिस्सेदारी 66 प्रतिशत और पीएम-2.5 उत्सर्जन में लगभग 38 प्रतिशत है। इसी चुनौती से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए डस्ट पोर्टल 2.0 विकसित किया गया है. 

डस्ट पोर्टल 2.0 की प्रमुख तकनीकी विशेषताएं

डस्ट पोर्टल 2.0 में जीआईएस मैपिंग, लाइव 360 डिग्री पीटीजेड कैमरे, पीएम-10 और पीएम-2.5 सेंसर, रियल-टाइम एनालिटिक्स और एआई आधारित मॉनिटरिंग जैसी अत्याधुनिक तकनीकों को शामिल किया गया है. यह पोर्टल निर्माण स्थलों की सटीक मैपिंग करेगा और धूल नियंत्रण से जुड़े पांच प्रमुख मानकों का स्वतः मूल्यांकन करेगा, जिससे निगरानी अधिक निष्पक्ष, पारदर्शी और एकरूप होगी. साथ ही, यह निर्माण स्थलों के निकटतम एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशन (एक्यूएमएस) की पहचान कर साइट-स्तरीय डेटा का विश्लेषण करेगा. प्रदूषण का स्तर बढ़ते ही सिस्टम स्वतः येलो, ऑरेंज और रेड अलर्ट जारी करेगा, ताकि संबंधित एजेंसियां समय रहते आवश्यक कार्रवाई कर सकें. 

पोर्टल के माध्यम से अनुपालन प्रमाणपत्र जारी करने और नियमों के उल्लंघन पर एनफोर्समेंट नोटिस स्वत: जारी करने की सुविधा भी उपलब्ध होगी, जिससे कागजी कार्यवाही कम होगी और कार्रवाई की गति तेज होगी. इसके अलावा, जिला-वार निगरानी, प्रदूषण के रुझानों और हॉटस्पॉट विश्लेषण के लिए व्यापक डैशबोर्ड उपलब्ध कराया गया है, जिससे सरकार और संबंधित विभाग डेटा-आधारित निर्णय ले सकेंगे. डस्ट पोर्टल 2.0 का एंड्रॉइड और IOS आधारित मोबाइल एप्लिकेशन भी विकसित किया गया है, जिससे डीपीसीसी अधिकारियों, शहरी स्थानीय निकायों और परियोजना संचालकों को कहीं से भी निगरानी और अनुपालन सुनिश्चित करने में सुविधा मिलेगी. लाइव कैमरा फीड, सेंसर डेटा और एआई आधारित विश्लेषण के माध्यम से यह पोर्टल पारदर्शिता और जवाबदेही को और अधिक मजबूत बनाएगा.

निर्माण गतिविधियों पर होगी वैज्ञानिक निगरानी

डस्ट पोर्टल 2.0 के जरिए दिल्ली में पंजीकृत सभी निर्माण स्थलों की एक ही मंच से निगरानी की जाएगी. इस पोर्टल पर चल रही और पूरी हो चुकी परियोजनाओं की जानकारी, ऑडिट रिपोर्ट, सेंसर से मिलने वाला डेटा और नियमों के पालन से जुड़ी सभी सूचनाएं उपलब्ध होंगी. इससे निर्माण कार्यों की निगरानी आसान होगी, डेटा का बेहतर प्रबंधन हो सकेगा और पर्यावरणीय मानकों का पालन सुनिश्चित किया जा सकेगा. यह एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म दिल्ली को अधिक स्वच्छ और प्रदूषण-मुक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा.

बार-बार नियम तोड़ने पर होगी सख्त कार्रवाई: पर्यावरण मंत्री

इस अवसर पर पर्यावरण मंत्री सरदार मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि निर्माण एवं विध्वंस गतिविधियों से उत्पन्न धूल दिल्ली में वायु प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों में से एक है. डस्ट पोर्टल 2.0 के माध्यम से पहली बार 500 वर्ग गज या उससे बड़े सभी निर्माण स्थलों की एआई आधारित निगरानी की जाएगी. यह अत्याधुनिक प्रणाली 360 डिग्री कैमरों, सेंसर, जीआईएस और रियल-टाइम डेटा के माध्यम से धूल नियंत्रण उपायों की प्रभावी निगरानी सुनिश्चित करेगी. अब तक निर्माण स्थलों की निगरानी मुख्यतः मैनुअल प्रक्रियाओं पर आधारित थी, जिनमें कई कमियां थीं. नई एआई आधारित व्यवस्था से नियमों के पालन की वास्तविक समय में निगरानी होगी, उल्लंघन होने पर तत्काल अलर्ट जारी होंगे और बार-बार नियम तोड़ने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी. इससे पूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और प्रभावी बनेगी. 

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