शहरी विकास और राष्ट्रीय राजधानी की प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है. केंद्रीय शहरी कार्य मंत्रालय को अब आधिकारिक तौर पर दो अलग-अलग विभागों में विभाजित कर दिया गया है. इसके तहत मंत्रालयीन कामकाज को सुचारू रूप से चलाने के लिए दूसरी अनुसूची में बदलाव किए गए हैं. इस नए प्रशासनिक ढांचे के बाद मंत्रालय में दो अलग-अलग सचिवों की नियुक्ति होगी.
क्यों पड़ी इस बदलाव की जरूरत?
विशेषज्ञों के अनुसार राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र यानी एनसीआर पर विशेष रूप से फोकस करने और बड़े केंद्रीय प्रोजेक्ट्स के प्रशासनिक दबाव को कम करने के लिए यह फैसला लिया गया है. अब तक दिल्ली से जुड़े तमाम कामकाज और देश के बाकी हिस्सों की शहरी योजनाओं का जिम्मा एक ही जगह होने के कारण कई बार फैसलों में देरी होती थी. इस विभाजन से अब राजधानी से जुड़े मामलों को देश के अन्य शहरों के विकास से अलग रखकर त्वरित निर्णय लिए जा सकेंगे.
पहला विभाग: राजधानी विकास विभाग
मंत्रालय के बटवारे के बाद पहले हिस्से का नाम राजधानी विकास विभाग रखा गया है. इस विभाग के जिम्मे दिल्ली और एनसीआर से जुड़े सभी अहम मामले होंगे. इसके अलावा यह विभाग निम्नलिखित प्रमुख परियोजनाओं और निकायों की जिम्मेदारी संभालेगा जिसमें, दिल्ली विकास प्राधिकरण यानी DDA, केंद्रीय लोक निर्माण विभाग यानी CPWD, दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन यानी DMRC, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम यानी NCRTC (रैपिड रेल प्रोजेक्ट), सेंट्रल विस्टा जैसी महत्वकांक्षी परियोजनाएं, केंद्रीय भूमि और संपत्ति का आवंटन शामिल है
दूसरा विभाग: शहरी विकास विभाग
मंत्रालय का दूसरा हिस्सा शहरी विकास विभाग कहलाएगा. इस विभाग का मुख्य फोकस देश भर के शहरों के लिए राष्ट्रीय स्तर की नीतियां, योजनाएं और उनका प्रभावी क्रियान्वयन तैयार करना होगा. यह विभाग मुख्य रूप से इन योजनाओं पर काम करेगा जिसमें प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी), अमृत योजना (AMRUT), स्वच्छ भारत मिशन (शहरी), पीएम स्वनिधि योजना, रेरा (RERA) कानून, राष्ट्रीय शहरी परिवहन नीति, जलवायु परिवर्तन से जुड़े शहरी मुद्दे शामिल है.
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