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बारापुला फेज़-3 फ्लाईओवर में भ्रष्टाचार का शक! ACB ने दर्ज की FIR, सरकारी अफसर और ठेकेदार रडार पर

दिल्ली के बारापुला फेज़-3 फ्लाईओवर प्रोजेक्ट में देरी और लागत बढ़ोतरी को लेकर ACB ने FIR दर्ज की है. LG के आदेश के बाद भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत अज्ञात सरकारी अधिकारियों और एक निजी ठेकेदार के खिलाफ जांच शुरू की गई है.

बारापुला फेज़-3 फ्लाईओवर में भ्रष्टाचार का शक! ACB ने दर्ज की FIR, सरकारी अफसर और ठेकेदार रडार पर
बारापुला फेज़-3 फ्लाईओवर मामले में ACB की बड़ी कार्रवाई

Barapullah Phase 3 Flyover Construction: दिल्ली के बहुप्रतीक्षित बारापुला फेज़-3 फ्लाईओवर प्रोजेक्ट के निर्माण में हुई अत्यधिक देरी और लागत में भारी बढ़ोतरी को लेकर दिल्ली भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (ACB) ने FIR दर्ज की है. यह FIR प्रारंभिक जांच के बाद भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7A और 13 के तहत अज्ञात सरकारी अधिकारियों और एक निजी ठेकेदार के खिलाफ दर्ज की गई है.

LG के आदेश के बाद तेज हुई जांच

इस मामले में अक्टूबर 2025 में दिल्ली के उपराज्यपाल (LG) ने जांच के आदेश दिए थे. LG ने परियोजना में हुई देरी को 'अव्याख्येय' बताते हुए कहा था कि इससे सरकारी खजाने को सैकड़ों करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है. यह संज्ञान मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की सिफारिश पर लिया गया था.

EFC बैठक में उठा था मामला

28 जुलाई 2025 को हुई व्यय वित्त समिति (EFC) की बैठक में बारापुला फेज़-3 परियोजना में देरी और मध्यस्थता पुरस्कार (Arbitration Award) स्वीकार करने के तरीके पर गंभीर सवाल उठाए गए थे. EFC ने गैर-सक्षम अधिकारियों द्वारा लिए गए निर्णयों और परियोजना में देरी की गहन जांच की सिफारिश की थी.

ACB ने शुरू की दस्तावेजों की जांच

ACB ने परियोजना से जुड़े सभी दस्तावेजों की विस्तृत जांच शुरू कर दी है. लोक निर्माण विभाग (PWD) को निर्देश दिए गए हैं कि वह सभी रिकॉर्ड जांच एजेंसी को सौंपे. FIR में फ्लाईओवर निर्माण में असामान्य और अनुचित देरी को प्रमुख आधार बनाया गया है.

परियोजना का पूरा विवरण

बारापुला फेज़-3 एक 3.5 किलोमीटर लंबा, चार लेन का एलिवेटेड कॉरिडोर है, जिसे सराय काले खां में मौजूदा बारापुला फ्लाईओवर से जोड़ा जाना है. इस परियोजना को वर्ष 2011 में मंजूरी मिली थी. दिसंबर 2014 में 1,260.63 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई और अप्रैल 2015 में निर्माण कार्य L&T को सौंपा गया. परियोजना को अक्टूबर 2017 तक पूरा किया जाना था, लेकिन भूमि अधिग्रहण, पेड़ कटाई की अनुमति और विभागीय लापरवाही के कारण इसमें लगातार देरी होती रही.

लागत बढ़ी, समय सीमा फिर आगे बढ़ी

अब तक इस परियोजना पर 1,238.68 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं, जबकि नई अनुमानित लागत बढ़कर 1,330 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है. परियोजना के जून 2026 तक पूरा होने की उम्मीद जताई जा रही है. L&T ने जांच में पूरा सहयोग देने का भरोसा दिया है.

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