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This Article is From Sep 16, 2021

Cryptocurrency : क्या भारत में गैर कानूनी है क्रिप्टोकरेंसी? भविष्य में क्या हैं संभावनाएं? एक क्लिक पर जानें सबकुछ

क्रिप्टोक्यूरेंसी बिल को इस साल संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान पेश किए जाने का अनुमान है. इसका उद्देश्य शामिल तकनीक के अनुसार क्रिप्टोकरेंसी को परिभाषित और वर्गीकृत करना है. क्रिप्टोक्यूरेंसी पर एक अंतर-मंत्रालयी पैनल ने हाल ही में सुझाव दिया था कि क्रिप्टोकरेंसी को डिजिटल संपत्ति के रूप में माना जाना चाहिए न कि मुद्रा के रूप में.

Cryptocurrency : क्या भारत में गैर कानूनी है क्रिप्टोकरेंसी? भविष्य में क्या हैं संभावनाएं? एक क्लिक पर जानें सबकुछ
वर्तमान में, बिटकॉइन और अन्य क्रिप्टोकरेंसी भारत में कानूनी विनियमन के दायरे से बाहर हैं.

भारतीय निवेशक देश में क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंजों पर आधिकारिक फैसले की प्रतीक्षा कर रहे हैं. भले ही अल सल्वाडोर ने डिजिटल करेंसी क्रांति को अपना लिया हो, लेकिन भारत अभी भी इस मुद्दे पर विचार चल रहा है. पिछले हफ्ते, वित्त पर संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष जयंत सिंह ने एक ऑनलाइन कार्यक्रम में कहा कि भारत सरकार भारत में क्रिप्टोकरेंसी (Cryptocurrency) को विनियमित करने के लिए "विशिष्ट दृष्टिकोण" अपनाएगी.

यह बयान ऐसे समय में आया है, जब देश में क्रिप्टोकरेंसी अभी भी अनियंत्रित है. भारत में क्रिप्टोक्यूरेंसी निवेशकों और एक्सचेंजों का एक मजबूत आधार है लेकिन निवेशक अभी भी क्रिप्टोकरेंसी के भविष्य को लेकर अंधेरे में हैं.

क्या भारत में गैर कानूनी है क्रिप्टोकरेंसी?
वर्तमान में, बिटकॉइन और अन्य क्रिप्टोकरेंसी भारत में कानूनी दायरे से बाहर हैं. हम उन्हें अवैध नहीं कह सकते क्योंकि वे अभी तक देश में किसी भी केंद्रीय प्राधिकरण द्वारा उपयोग के लिए अधिकृत नहीं किया गया है. क्रिप्टोक्यूरेंसी फिलहाल किसी भी दिशा-निर्देश, विनियम या नियम के दायरे से बाहर है. इस वजह से बिटकॉइन (Bitcoin)  और अल्टकॉइन (altcoin) लेनदेन जोखिम भरा है क्योंकि इन एक्सचेंजों से उत्पन्न होने वाले विवाद कानूनी रूप से बाध्य नहीं होंगे.

क्रिप्टोकरेंसी पर टैक्स?
भारत ने अभी तक क्रिप्टोकुरेंसी लेनदेन पर कोई नियम नहीं बनाए हैं, इसलिए इस पर टैक्स भी नहीं हैं, लेकिन सभी उपक्रमों से पारदर्शिता बरतने के लिए कहा गया है. अप्रैल में, इसी बाबत कंपनी अधिनियम में संशोधन पेश किए गए थे. इस पारदर्शिता के कारण, डिजिटल संपत्ति और उसके लाभ को पूंजीगत संपत्ति के रूप में गिना जा सकता है, जो पूंजीगत लाभ के तहत करों से बंधी है लेकिन कंपनियां अभी तक यह सुनिश्चित नहीं कर पा रही हैं कि इस संबंध में विभिन्न प्रकार के लाभ और आय पर कर गणना कैसे की जाए.

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कब आएगा क्रिप्टोकरेंसी बिल?
क्रिप्टोक्यूरेंसी बिल को इस साल संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान पेश किए जाने का अनुमान है. इसका उद्देश्य शामिल तकनीक के अनुसार क्रिप्टोकरेंसी को परिभाषित और वर्गीकृत करना है. क्रिप्टोक्यूरेंसी पर एक अंतर-मंत्रालयी पैनल ने हाल ही में सुझाव दिया था कि क्रिप्टोकरेंसी को डिजिटल संपत्ति के रूप में माना जाना चाहिए न कि मुद्रा के रूप में. ऐसी भी अटकलें हैं कि सरकार द्वारा लागू क्रिप्टो सिक्के आदर्श बन सकते हैं.

अगर भारत में बैन हुआ क्रिप्टोकरेंसी तो क्या होगा?
भारत में क्रिप्टोक्यूरेंसी पर प्रतिबंध का मतलब होगा कि आप क्रिप्टोक्यूरेंसी खरीदने के लिए स्थानीय मुद्रा को परिवर्तित करने में सक्षम नहीं होंगे या HODL-एड क्रिप्टोकरेंसी को नकद में परिवर्तन नहीं करा पाएंगे. क्रिप्टो एक्सचेंज भी बंद हो जाएंगे. प्रतिबंध यह सुनिश्चित करेगा कि HODL-ed क्रिप्टोक्यूरेंसी प्रतिबंध हटाए जाने तक HODL पर बनी रहे.

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