- मानव भारती विश्वविद्यालय के फर्जी डिग्री घोटाले में आरोपी अशोनी कंवर और मनदीप राणा को भगोड़ा घोषित किया गया है
- मुख्य आरोपी राज कुमार राणा ने फर्जी डिग्रियां बेचकर लगभग 387 करोड़ रुपये की अवैध कमाई की थी
- अशोनी कंवर के बैंक खातों में अवैध धन का बड़ा हिस्सा वेतन और किराये के रूप में ट्रांसफर किया गया था
हिमाचल प्रदेश की एक विशेष अदालत ने मानव भारती विश्वविद्यालय (MBU) फर्जी डिग्री घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में शनिवार को बड़ा फैसला सुनाया. विशेष न्यायाधीश दविंदर कुमार ने अशोनी कंवर और उसके बेटे मनदीप राणा को भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित कर दिया है. यह आदेश प्रवर्तन निदेशालय द्वारा दायर एक अर्जी पर सुनवाई के बाद सुनाया गया.
यह मामला मानव भारती चैरिटेबल ट्रस्ट के तहत संचालित मानव भारती विश्वविद्यालय (सोलन, हिमाचल प्रदेश) और माधव विश्वविद्यालय (राजस्थान) में हजारों की संख्या में फर्जी डिग्रियां बेचने से जुड़ा है. जांच के दौरान यह सामने आया कि मुख्य आरोपी राज कुमार राणा ने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर फर्जी डिग्रियां बेचकर लगभग 387 करोड़ रुपये की अवैध कमाई की थी.
ED के मुताबिक इस काली कमाई का एक बड़ा हिस्सा राज कुमार राणा की पत्नी अशोनी कंवर के बैंक खातों में वेतन और किराये के रूप में ट्रांसफर किया गया था. इन पैसों का उपयोग करनाल और दिल्ली में बेनामी संपत्तियां खरीदने के लिए किया गया.

मामले में शामिल पैसा 100 करोड़ रुपये से अधिक है, जो किसी शख्स को भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित करने की अनिवार्य शर्त को पूरा करता है.
अशोनी कंवर ने आपराधिक ट्रायल से बचने के लिए भारत छोड़ा और वर्तमान में वह ऑस्ट्रेलिया में अपने बेटे के साथ रह रही हैं. अशोनी कंवर को भगोड़ा घोषित करने के साथ ही, अदालत ने ED को अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार उनकी संपत्तियों को जब्त करने की प्रक्रिया में आगे बढ़ने की अनुमति दे दी है.
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