CBI ने एक बड़े ट्रांसनेशनल साइबर फ्रॉड मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए उस मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है, जो भारत में बैठकर फर्जी कॉल सेंटर चला रहा था और अमेरिका के लोगों को करोड़ों रुपये का चूना लगा रहा था. गिरफ्तार आरोपी की पहचान लक्ष्मण जयप्रकाश जगवानी के रूप में हुई है. CBI के मुताबिक यह पूरा नेटवर्क दिल्ली, नोएडा और देश के कुछ अन्य हिस्सों से ऑपरेट किया जा रहा था. आरोपी और उसके साथी सितंबर 2022 से अवैध कॉल सेंटर चला रहे थे. ये लोग खुद को अमेरिका की बड़ी सरकारी एजेंसियों के अधिकारी बताकर अमेरिकी नागरिकों को डराते और फिर उनसे पैसे ठग लेते थे.
जांच एजेंसी के अनुसार आरोपी फर्जी पहचान का इस्तेमाल कर खुद को अमेरिका की DEA यानी ड्रग एनफोर्समेंट एडमिनिस्ट्रेशन, FBI और सोशल सिक्योरिटी एडमिनिस्ट्रेशन का अधिकारी बताते थे. इसके बाद अमेरिकी नागरिकों को फोन, ईमेल और इंटरनेट कॉलिंग के जरिए संपर्क किया जाता था. लोगों को डराया जाता था कि उनके नाम पर ड्रग्स, मनी लॉन्ड्रिंग या अन्य गंभीर अपराधों की जांच चल रही है. फिर गिरफ्तारी या कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर उनसे मोटी रकम वसूली जाती थी.
CBI के अनुसार इस गैंग ने अमेरिकी नागरिकों से करीब 8.5 मिलियन अमेरिकी डॉलर यानी भारतीय रुपये में लगभग 70 करोड़ रुपये से ज्यादा की ठगी की. CBI ने इस मामले में 9 दिसंबर 2025 को केस दर्ज किया था. केस दर्ज होने के तुरंत बाद एजेंसी ने दिल्ली-एनसीआर समेत कई ठिकानों पर छापेमारी की थी. दिसंबर 2025 में नोएडा में चल रहे अवैध कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया गया था.
जांच के दौरान ग्रेटर नोएडा स्थित आरोपी के घर से करीब 1 करोड़ 88 लाख रुपये नकद बरामद किए गए थे. इसके अलावा कई इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस, दस्तावेज और अन्य अहम सबूत भी जब्त किए गए थे. CBI के मुताबिक इस पूरे रैकेट को खड़ा करने और ऑपरेट करने में मुख्य भूमिका निभाने वाला आरोपी लगातार फरार चल रहा था. एजेंसी पिछले कई महीनों से उसकी तलाश में जुटी हुई थी. आखिरकार लंबी तलाश और तकनीकी निगरानी के बाद CBI ने उसे 13 मई 2026 को दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया.
जांच एजेंसियों का मानना है कि भारत में बैठे कई साइबर फ्रॉड नेटवर्क अब विदेशी नागरिकों को निशाना बना रहे हैं. खासतौर पर अमेरिका और यूरोप के लोगों को सरकारी एजेंसियों का डर दिखाकर ठगी की जा रही है. इस मामले में भी आरोपी हाई-टेक तरीके से इंटरनेट कॉलिंग और फर्जी डिजिटल पहचान का इस्तेमाल कर रहे थे ताकि उनकी असली पहचान छिपी रहे.
CBI अब इस नेटवर्क से जुड़े बाकी आरोपियों, विदेशी लिंक, बैंक खातों और मनी ट्रेल की जांच कर रही है. एजेंसी को शक है कि इस गिरोह के तार विदेशों में बैठे कुछ हैंडलर्स और हवाला नेटवर्क से भी जुड़े हो सकते हैं.
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