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This Article is From Jul 03, 2020

कानपुर : यूपी पुलिस के आठ लोगों को मारने वाला विकास दुबे कैसे बना अगड़ों की राजनीति का 'हथियार', जानें History-Sheet

उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले के गांव में डिकरू में बीती रात 8 पुलिसकर्मियों पर घात लगाकर हुई हत्या के मामले में जानकारी मिल रही है कि हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे के 2 गुर्गों को भी मार गिराया गया है. हालांकि अभी तक इस मामले की पूरी तरह से पुष्टि नहीं हो पाई है. पास से एक हथियार बरामद हुआ है.  

यूपी पुलिस के 8 लोगों को मारने वाले विकास दुबे को राजनीतिक संरक्षण भी खूब मिला था
  • विकास दुबे को मिला था सत्ता का संरक्षण
  • स्थानीय विधायक और नेता करते थे मदद
  • एक बार चुना जा चुका है जिला पंचायत सदस्य
लखनऊ:

उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले के गांव में  बिकरू में बीती रात 8 पुलिसकर्मियों पर घात लगाकर हुई हत्या के मामले में जानकारी मिल रही है कि हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे के 2 गुर्गों को भी मार गिराया गया है. हालांकि अभी तक इस मामले की पूरी तरह से पुष्टि नहीं हो पाई है. पास से एक हथियार बरामद हुआ है.  वहीं इस पूरे मामले के सरगना विकास दुबे की तलाश में एक सघन तलाशी अभियान शुरू कर दिया है  घटना स्थल पर एक यूपी पुलिस के आलाधिकारी और फॉरेंसिंक टीम भी मौजूद है और साथ ही वहां पर एसटीएफ भी तैनात कर दी गई है. बात करें हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे की तो उसका एक लंबा आपराधिक इतिहास है. साल 2001 में उसके खिलाफ बीजेपी नेता की हत्या का भी मामला दर्ज हुआ था लेकिन इस मामले में उसको सजा नहीं हो पाई थी. वहीं हाल में उसके खिलाफ एक और मामला दर्ज हुआ था और इसी मामले में उसे गिरफ्तार करने के लिए पुलिस की भारी-भरकम टीम गांव गई थी. 

राजनेताओं का मिला है संरक्षण
भारतीय राजनीति में अपराधियों और नेताओं का गठजोड़ कोई नई बात नहीं है. विकास  दुबे 90 के दशक में जब इलाके में एक छोटा-मोटा बदमाश हुआ करता था तो पुलिस उसे अक्सर मारपीट के मामले में पकड़कर ले जाती थी. लेकिन उसे छुड़वाने के लिए स्थानीय रसूखदार नेता विधायक और सांसदों तक के फोन आने लगते थे. विकास दुबे को सत्ता का संरक्षण भी मिला और वह एक बार जिला पंचायत सदस्य भी चुना जा चुका था. उसके घर के लोग तीन गांव में प्रधान भी बन चुके हैं. अगर कुछ मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो विकास दुबे ऊपर कैबिनेट मंत्रियों तक का हाथ था. 

जातिवादी राजनीति में हथियार बना विकास दुबे
कानपुर के जिस इलाकों से  विकास दुबे का रिश्ता था. दरअसल वह ब्राह्मण बहुल इलाका है लेकिन यहां की राजनीति में पिछड़ी जातियों को नेता भी हावी थे. इस हनक को कम करने के लिए नेताओं ने विकास दुबे का इस्तेमाल किया. उधर विकास की नजर इलाके में बढ़ती जमीन की कीमतों और वसूली पर था. फिर क्या था यहीं से शुरू सत्ता के संरक्षण में विकास दुबे के आतंक की शुरुआत हुई.  हालांकि बाद में उसका नाम कई ऐसे मामलों में सामने आया जिसमें निशाने पर अगड़ी जाति के भी नेता थे. दरअसल तब तक विकास दुबे का आतंक बढ़ गया था और कई नेता जिनसे विकास दुबे की पटरी नहीं खाती थी वो उसके निशाने पर आ गए थे क्योंकि उस समय इलाके में जमीनों की कीमत बढ़ने लगी थी. 

विकास दुबे की हिस्ट्रीशीट


 

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