हाल ही में व्हाइट-बॉल अभियान खत्म होने के बाद अब टीम इंडिया का अगला चैलेंज अगस्त महीने में रेड-बॉल का है. वास्तव में यह चैलेंज बड़ा है. इस वजह से ही नहीं कि सीरीज 'स्पिन पिचों' पर श्रीलंकाई धरती पर होने जा रहा है, बल्कि यह टीम इंडिया के WTC फाइनल अभियान के लिए एक अहम सीरीज है. हाल ही में भारतीय टीम का ऐलान हो चुका है और यहीं से करोड़ों भारतीय फैंस का सवाल शुरू हो गया है कि अगले 12 महीनों में टीम गिल को WTC Final में पहुंचने के लिए क्या करना होगा.
टीम गिल की वर्तमान स्थिति
भारत वर्तमान में 48.15 के अंक प्रतिशत (PCT) के साथ WTC अंक तालिका में पांचवें स्थान पर है. और फाइनल में पहुंचने के लिए उन्हें लगभग 64 से 68 प्रतिशत के अंक प्रतिशत (PCT) की आवश्यकता होगी. इसका मतलब है कि उन्हें अपने शेष नौ टेस्ट मैचों में से कम से कम सात में जीत दर्ज करनी होगी. और पिछले साल दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ घर पर 2-0 से मिली हार के कारण,अब भारत के पास गलती करने की गुंजाइश बेहद कम हो गई है.
भारत का WTC शेड्यूल
टीम गिल का बचे WTC सीजन के लिए कार्यक्रम मिला-जुला है. अगस्त में गिल की टीम दो मैचों के लिए श्रीलंका का दौरा करेगी, तो अक्टूबर में न्यूजीलैंड दो और मैचों के लिए भारत आएगा. इसके बाद नए साल में ऑस्ट्रेलिया पांच मैचों की बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी के लिए भारत आएगा.
इसलिए लंका का सफाया जरूरी है!
ऐसे में टीम गिल के लिए श्रीलंका में 2-0 से सूपड़ा साफ करना बेहद जरूरी है और यह आसान नहीं होगा. वजह यह है कि पिछले 2-3 साल में रेड-बॉल फॉर्मेट में भारतीय दिग्गजों के स्पिन खेलने के कौशल में गिरावट आई है. और साल 2024 के आखिर में टीम गिल को अपनी धरती पर 3-0 से हुआ सफाया इसका सबसे बड़ा प्रमाण है. और 15 अगस्त से गॉल में शुरू हो रहे पहले टेस्ट में श्रीलंका द्वारा भारत के सामने तीन स्पिनरों को उतारना लगभग तय है.
रेड-बॉल कम, व्हाइट-बॉल ज्यादा!
वर्तमान बल्लेबाज इतनी ज्यादा व्हाइट-बॉल क्रिकेट खेल रहे हैं. और इस फॉर्मेट के इतने ज्यादा आदी हो गए हैं कि अब ज्यादातर टर्निंग ट्रैक पर घूमती गेंदों के सामने खुद को असहज और काफी हद तक असहाय पाते हैं. जैसी मैच प्रैक्टिस इन्हें किसी बड़ी सीरीज के लिए चाहिए, उस तरह की तैयारी टेस्ट बल्लेबाजों को नहीं मिल पाती. और घुमाव से निपटना वह पहलू है, जिससे सिर्फ नेट प्रैक्टिस के जरिए ही नहीं निपटा जा सकता है. एक विडंबना इस पर यह भी है कि इन दिनों नेट पर बल्लेबाज रेड-बॉल से कम, व्हाइट-बॉल से ज्यादा प्रैक्टिस कर रहे हैं.
कीवी घर में लेंगे फिर से बड़ा टेस्ट
बहरहाल, श्रीलंका के बाद न्यूजीलैंड सीरीज भारत के लिए सबसे महत्वपूर्ण श्रृंखला हो सकती है. इसलिए जैसे ही भारत के लिए इस नए सत्र की शुरुआत हो रही है, गिल और उनके साथियों का काम श्रीलंका के स्पिन खतरे से उबरना और WTC फाइनल के लंबे रास्ते के लिए सही माहौल तैयार करना है. साल 2026 के कैलेंडर की सभी चुनौतियों में से न्यूजीलैंड के खिलाफ ये दो टेस्ट मैच इस टीम की सबसे कड़ी परीक्षा हो सकते हैं. साल 2024-25 के उस सूपड़ा साफ (व्हाइटवॉश) का दर्द अभी भी चुभता है, और उसकी पुनरावृत्ति भारत की क्वालीफिकेशन की उम्मीदों को एक ही झटके में लगभग समाप्त कर देगी. भारत ने 2009 के बाद से न्यूजीलैंड में कोई टेस्ट नहीं जीता है.
ऑस्ट्रेलिया की धरती पर सबसे बड़ा टेस्ट !
इसके बाद, 2027 में जब ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी शुरू होगी, तो भारत को पांच मैचों की श्रृंखला में कम से कम दो या तीन टेस्ट जीतने होंगे और बाकी मैचों को ड्रॉ कराना होगा. गिल की टीम इन तीनों श्रृंखलाओं को जीतकर सीधे WTC फाइनल में अपनी जगह पक्की कर सकती है. लेकिन वे जितने भी मैच हारेंगे, उससे ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ्रीका और न्यूजीलैंड के अन्य स्थानों पर अंक गंवाने पर उनकी निर्भरता बढ़ती जाएगी.
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