सावन (श्रावण) का पावन महीना केवल आस्था और धार्मिक अनुष्ठानों का ही नहीं, बल्कि देश के खुदरा कारोबार के लिए भी सबसे बड़े मौसमी सीजन में से एक बन गया है. व्यापारियों के संगठन कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) के मुताबिक, सावन के दौरान पूजा-पाठ, धार्मिक यात्राएं, खानपान, कपड़े, उपहार और अन्य खरीदारी को मिलाकर देशभर में 1 से 2 लाख करोड़ रुपये तक का कारोबार होने का अनुमान है. यह सीजन आने वाले त्योहारी खरीदारी से पहले बाजार में अच्छी रौनक लेकर आता है.
CAIT के अनुसार उत्तर भारत, पश्चिम भारत और मध्य भारत के राज्यों में सावन का आर्थिक प्रभाव सबसे अधिक देखने को मिलता है. इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु कांवड़ यात्रा, शिव मंदिरों में जलाभिषेक और अन्य धार्मिक आयोजनों में शामिल होते हैं, जिससे स्थानीय बाजारों में ग्राहकों की आवाजाही बढ़ जाती है.
सावन के दौरान किन मुख्य सेक्टर में होगा फायदा
धार्मिक और पूजा का सामान
- पूजा की सामग्री
- अगरबत्ती
- कपूर
- दीये के लिए घी और तेल
- रुद्राक्ष की माला
- शिवलिंग से जुड़ी चीज़ें
- तांबे और पीतल के बर्तन
- कलश, घंटियां, धार्मिक किताबें
खान-पान और FMCG
- दूध और डेयरी उत्पाद
- फल
- सूखे मेवे (ड्राई फ्रूट्स)
- मखाना
- शहद
- सेंधा नमक
- व्रत का नाश्ता
- मिठाइयां और प्रसाद
- कांवड़ यात्रा और तीर्थयात्राओं के लिए पैक्ड फ़ूड
कपड़े और टेक्सटाइल
- एथनिक वियर (पारंपरिक भारतीय कपड़े)
- साड़ियां
- कुर्ता-पजामा
- पारंपरिक पोशाकें
- हरे रंग के कपड़े (खासकर महाराष्ट्र में)
- तीर्थयात्रियों और भक्तों के लिए जूते-चप्पल
ज्वेलरी और फ़ैशन एक्सेसरीज़
- सोने और चांदी के गहने
- धार्मिक पेंडेंट
- चांदी के सिक्के
- पारंपरिक एक्सेसरीज़
धार्मिक और शादी-ब्याह से जुड़ी खरीदारी के समय ज्वेलरी और प्रीमियम कैटेगरी की चीज़ों की मांग अक्सर काफ़ी ज़्यादा रहती है.
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