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टीम इंडिया 10वीं बार, बहुत हुआ इंतजार, मत चूको इस बार, जानें कैसा रहा है वर्ल्ड कप में भारत का सफरनामा

विमेंस टी20 वर्ल्ड कप में 2009 से अब तक 4 सेमीफाइनल और 1 फाइनल खेल चुकी भारतीय टीम 10वीं बार खिताबी सूखे को खत्म करने के इरादे से पाकिस्तान के खिलाफ महामुकाबले से अपने सफर का आगाज करेगी.

टीम इंडिया 10वीं बार, बहुत हुआ इंतजार, मत चूको इस बार, जानें कैसा रहा है वर्ल्ड कप में भारत का सफरनामा
Team India in Women's T20 WC:

क्रिकेट के मैदान पर जब भी भारत और पाकिस्तान की टीमें आमने-सामने होती हैं, तो रोमांच सातवें आसमान पर पहुंच जाता है. आज इंग्लैंड के बर्मिंघम में विमेंस टी20 वर्ल्ड कप 2026 का ऐसा ही एक हाईवोल्टेज मुकाबला खेला जाना है. एजबेस्टन का पूरा मैदान इस महामुकाबले के लिए सज चुका है और यहां रहने वाले फैंस के बीच भी जश्न का माहौल बन चुका है. हरमनप्रीत कौर की कप्तानी में उतरने वाली भारतीय टीम के लिए यह महज एक मैच नहीं, बल्कि उस खिताबी सूखे को खत्म करने का आगाज है जो पिछले 9 सीजन से चला आ रहा है. यह टीम इंडिया का 10वां टी20 वर्ल्ड कप है और इस बार फैंस की एक ही आवाज है बहुत हुआ इंतजार, मत चूको इस बार.

साल 2009 से शुरू हुआ था सफर, शुरुआती दो साल में दिखा दम

महिला टी20 वर्ल्ड कप के इतिहास पर नजर डालें तो इसकी शुरुआत साल 2009 में इंग्लैंड की धरती से ही हुई थी. अपने पहले ही प्रयास में भारतीय महिला टीम ने शानदार खेल दिखाते हुए सेमीफाइनल तक का सफर तय किया था. इसके ठीक अगले साल, यानी 2010 में वेस्टइंडीज में खेले गए दूसरे टी20 वर्ल्ड कप में भी टीम इंडिया ने अपनी चमक बिखेरी और लगातार दूसरी बार सेमीफाइनल में जगह बनाई. शुरुआती दो सीजन के इस प्रदर्शन ने दुनिया को दिखा दिया था कि भारतीय महिलाएं क्रिकेट के इस सबसे छोटे फॉर्मेट में किसी भी टीम को धूल चटाने का माद्दा रखती हैं.

बीच के सालों में लड़खड़ाई टीम, ग्रुप स्टेज से ही होना पड़ा बाहर

शुरुआती दो शानदार सीजन के बाद भारतीय महिला क्रिकेट एक मुश्किल दौर से गुजरा. साल 2012, 2014 और 2016 के वर्ल्ड कप टूर्नामेंट्स टीम इंडिया के लिए किसी बुरे सपने की तरह रहे. इन तीनों ही सीजन में भारतीय टीम लीग स्टेज की सिढ़ी को भी पार नहीं कर सकी और ग्रुप स्टेज से ही बाहर हो गई. इस दौरान टीम के खेल में जुझारूपन की कमी साफ दिखी और बड़े मैचों में दबाव न झेल पाने की कमजोरी भी उजागर हुई. हालांकि, इस नाकामी ने टीम को अंदर से मजबूत करने और नए सिरे से रणनीति बनाने का काम किया.

साल 2018 में फिर लौटी फॉर्म, सेमीफाइनल का वो बड़ा मुकाबला

करीब आठ साल के लंबे इंतजार के बाद साल 2018 में वेस्टइंडीज की धरती पर भारतीय टीम ने एक बार फिर जोरदार वापसी की. स्मृति मंधाना और हरमनप्रीत कौर जैसे युवा चेहरों के दम पर टीम ने मैदान मारना शुरू किया. भारत ने ग्रुप स्टेज में धमाकेदार खेल दिखाते हुए सेमीफाइनल का टिकट कटाया. हालांकि, सेमीफाइनल मुकाबले में टीम को इंग्लैंड के हाथों हार का सामना करना पड़ा और एक बार फिर खिताबी मुकाबला खेलने का सपना टूट गया, लेकिन इस प्रदर्शन ने यह साफ कर दिया था कि टीम इंडिया अब एक नए तेवर के साथ तैयार हो चुकी है.

साल 2020 का वो ऐतिहासिक फाइनल, जब ट्रॉफी के बेहद करीब आकर चूके

ऑस्ट्रेलिया में खेला गया साल 2020 का टी20 वर्ल्ड कप भारतीय महिला क्रिकेट के इतिहास का सबसे स्वर्णिम और साथ ही सबसे दर्दनाक अध्याय भी रहा. भारतीय टीम ने पूरे टूर्नामेंट में अजेय रहते हुए पहली बार टी20 वर्ल्ड कप के फाइनल में कदम रखा. मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड पर करीब 86 हजार से ज्यादा दर्शकों के सामने भारत का सामना मजबूत ऑस्ट्रेलिया से था. खिताबी मुकाबले में टीम दबाव के आगे बिखर गई और उपविजेता बनकर ही संतोष करना पड़ा. ट्रॉफी के इतने करीब आकर चूकने का मलाल आज भी इस टीम के खिलाड़ियों के दिलों में टीस बनकर चुभता होगा.

साल 2023 का सेमीफाइनल और वो रन आउट

दक्षिण अफ्रीका में खेले गए पिछले टी20 वर्ल्ड कप (2023) में भी भारत ने सेमीफाइनल तक का सफर तय किया था. केपटाउन में खेले गए उस नॉकआउट मुकाबले में भारत का सामना एक बार फिर डिफेंडिंग चैंपियन ऑस्ट्रेलिया से हुआ. मैच बेहद रोमांचक मोड़ पर था और कप्तान हरमनप्रीत कौर शानदार बल्लेबाजी कर रही थीं, लेकिन एक रन आउट ने पूरा मैच पलट दिया और भारत महज 5 रन से मुकाबला हारकर टूर्नामेंट से बाहर हो गया. इस हार ने साबित किया कि भारतीय टीम दुनिया की सर्वश्रेष्ठ टीमों को टक्कर तो दे रही है, लेकिन खिताब जीतने के लिए उसे आखिरी पलों में अपना खेल और बेहतर करना होगा.

अनुभव और आक्रामकता का बेजोड़ मिश्रण है मौजूदा टीम इंडिया

विमेंस टी20 वर्ल्ड कप 2026 के लिए इंग्लैंड पहुंची हरमनप्रीत कौर की इस सेना में अनुभव और युवा जोश का एक बेहतरीन संतुलन नजर आ रहा है. टीम के पास मिडिल ऑर्डर में कप्तान हरमनप्रीत का सालों का अनुभव है, तो वहीं टॉप ऑर्डर में स्मृति मंधाना की क्लास और शेफाली वर्मा की विस्फोटक बल्लेबाजी किसी भी विरोधी गेंदबाजी आक्रमण की धज्जियां उड़ा सकती है. टीम की बेंच स्ट्रेंथ भी पहले से काफी मजबूत हुई है, जिससे कप्तान के पास मैदान पर अलग-अलग रणनीतियों के साथ उतरने के बेहतरीन विकल्प मौजूद हैं.

इंग्लिश परिस्थितियों में गेंदबाजों की परीक्षा, रेणुका और दीप्ति पर दारोमदार

इंग्लैंड की पिचों और वहां के मौसम में हमेशा से गेंदबाजों के लिए मदद रहती है. ऐसे में भारत का संतुलित गेंदबाजी आक्रमण इस टूर्नामेंट में एक्स-फैक्टर साबित हो सकता है. शुरुआती ओवरों में रेणुका सिंह ठाकुर की स्विंग गेंदें विरोधी बल्लेबाजों के लिए मुसीबत खड़ी करेंगी, जबकि मिडिल ओवरों में दीप्ति शर्मा की कसी हुई स्पिन गेंदबाजी रनों की रफ्तार पर अंकुश लगाने का काम करेगी. इसके साथ ही क्रांति गौड़ जैसी उभरती हुई खिलाड़ी के पास भी इस बड़े मंच पर अपनी स्विंग और धारदार गेंदबाजी से दुनिया के सामने अपनी चमक बिखेरने का यह सुनहरा मौका होगा.

क्या 10वें प्रयास में खत्म होगा खिताबी सूखा, इतिहास रचने का मौका

यह भारतीय महिला क्रिकेट टीम का 10वां टी20 विश्व कप अभियान है. साल 2009 से शुरू हुए इस सफर में टीम ने चार बार सेमीफाइनल और एक बार फाइनल का दबाव झेला है. हर बार टीम इंडिया खिताब के करीब आकर रुक जाती है, लेकिन इस बार फैंस और क्रिकेट पंडितों को उम्मीद है कि कहानी अलग होगी. पाकिस्तान के खिलाफ होने वाले इस पहले मुकाबले से टीम इंडिया अपनी पुरानी गलतियों से सबक लेकर एक नई शुरुआत करना चाहेगी. 10वीं बार के इस सफर में अब बस एक ही लक्ष्य है इस बार चूकना मना है.

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