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अगर बॉल लगने से चली जाए बल्लेबाज की जान, तो क्या बॉलर को होगी जेल? जानें क्या कहता है नियम

क्रिकेट में अक्सर गाहे-बेगाहे जमीनी या क्लब स्तर की क्रिकेट में अक्सर गेंद लगने से मौत की खबर आती है. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ऐसे कई हादसे हुए हैं, जब खिलाड़ियों को जान से हाथ धोना पड़ा था.

अगर बॉल लगने से चली जाए बल्लेबाज की जान, तो क्या बॉलर को होगी जेल? जानें क्या कहता है नियम
साल 2014 में ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज फिलिप ह्यूज की घटना ने क्रिकेट जगत को झकझोर दिया था
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क्रिकेट में कई साल पहले जब ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज फिलिप ह्यूज की बाउंसर से गेंद लगने पर मौत हुई, तो पूरा क्रिकेट जगत सदमें में चला गया. इससे पहले भी कई ऐसे हादसे हुए, जिन्होंने क्रिकेट जगत को झकझोर कर रख दिया था. ह्यूज की घटना के बाद आईसीसी ने हेलमेट, नेक गार्ड आदि पहनने को लेकर नियमों में खासी सख्ती की, तो कनकशन जैसे नियम भी खेल का हिस्सा बन गया. बहरहाल, सवाल और विषय यह है कि अगर गेंद लगने से बल्लेबाज की जान चली जाती है, तो क्या गेंदबाज को जेली होगी? चलिए इस बारे में डिटेल से जानते हैं.

माना जाता है दुर्घटना

क्रिकेट एक ऐसा खेल है जिसमें जोखिम शामिल होता है. जब कोई बॉलर गेंदबाजी करता है, तो उसका उद्देश्य बल्लेबाज को आउट करना या रन रोकना होता है, न कि उस.की जान लेना. यदि गेंद अनजाने में, सामान्य खेल के नियमों के तहत सिर या किसी संवेदनशील हिस्से पर लग जाती है और बल्लेबाज की दुर्भाग्यपूर्ण मौत हो जाती है, तो इसे 'खेल के दौरान घटित एक दुर्घटना' मानी जाता है। ऐसे मामलों में बॉलर को क्रिमिनल जेल या सजा नहीं होती है.

कानूनी समीक्षा और जांच  किसी भी देश के कानून के तहत, यदि किसी की असामान्य मौत होती है, तो पुलिस या संबंधित अधिकारी प्राथमिक जांच कर सकते हैं. जांच यह सुनिश्चित करने के लिए की जा सकती है कि  यह महज़ एक हादसा था या इसके पीछे बॉलर की कोई दुर्भावना या जानबूझकर की गई आपराधिक हरकत तो नहीं थी. 


आपराधिक लापरवाही 

यदि यह साबित हो जाता है कि बॉलर ने खेल की भावना के विपरीत जाकर किसी पुरानी रंजिश के तहत या जानबूझकर बल्लेबाज को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाने के इरादे से घातक हमला किया था (और यह सबूतों से साबित हो जाए), तब  लॉ ऑफ लैंड (स्थानीय कानून) के तहत गैर इरादतन हत्या या अन्य धाराओं के तहत कार्रवाई हो सकती है हालांकि, सामान्य और वास्तविक खेल की परिस्थितियों में ऐसा साबित करना लगभग नामुमकिन होता है, क्योंकि खेल के अपने नियम और इसमें स्वत: ही छिपे जोखिम शामिल रहते हैं.

निष्कर्ष

क्रिकेट में गति  और उछाल खेल का एक स्वाभाविक हिस्सा हैं. आईसीसी (ICC) और तमाम क्रिकेट बोर्ड्स ने खिलाड़ियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए हेलमेट के कड़े नियम, स्टेम गार्ड (Neck Guard) और आधुनिक उपकरण अनिवार्य कर दिए हैं. ताकि ऐसे हादसों की आशंका को कम से कम किया जा सके. कानून की नजर में खेल के दौरान अनजाने में हुई दुर्घटनाओं के लिए खिलाड़ियों को तब तक सजा नहीं दी जाती जब तक कि दुर्भावना या आपराधिक षड्यंत्र पुख्ता तौर पर साबित न हो.

F.A.Q= Frequently Asked Questions सें इस नियम के बारे में जानें अहम बातें

प्र:- 1. यदि किसी बॉलर की गेंद से बल्लेबाज को गंभीर चोट लगती है या उसकी मृत्यु हो जाती है, तो क्या आईसीसी नियमों के तहत बॉलर पर कोई बैन या नो-बॉल का जुर्माना लगता है?

उ.:- नहीं। यदि गेंद क्रिकेट के वैध नियमों (Laws of Cricket) के दायरे में फेंकी गई है, तो इसे केवल एक 'दुर्भाग्यपूर्ण खेल हादसा' माना जाता है. आईसीसी के नियमों के तहत बॉलर को इसके लिए दोषी नहीं ठहराया जाता, न ही उस पर कोई पेनल्टी या बैन लगाया जाता है।.हालांकि, यदि अंपायर को लगता है कि बॉलर जानबूझकर बल्लेबाज को नुकसान पहुंचाने के इरादे से लगातार खतरनाक गेंदबाजी कर रहा है, तो अंपायर उसे चेतावनी दे सकता है या स्पेल से हटा सकता है.

प्र:- 2. खतरनाक गेंदबाजी को लेकर आईसीसी और एमसीसी (MCC) का क्या नियम है?

उ.:- एमसीसी लॉ 41.6 (Dangerous and Unfair Bowling) के अनुसार, यदि अंपायर को लगता है कि किसी बॉलर की गेंदबाजी (विशेषकर लगातार बाउंसर या बीमर) बल्लेबाज की शारीरिक क्षमता को देखते हुए उसकी सुरक्षा के लिए सीधा खतरा बन रही है, तो अंपायर उसे 'अनुचित' घोषित कर सकता है. ऐसे में अंपायर बॉलर को पहली चेतावनी देता है. बार-बार दोहराने पर बॉलर को उस मैच में आगे गेंदबाजी करने से रोक दिया जाता है.

प्र:- 3. बल्लेबाजों के हेलमेट और सेफ्टी गियर्स को लेकर आईसीसी के क्या अनिवार्य नियम हैं?

उ.:- 2017 से आईसीसी ने अंतरराष्ट्रीय मैचों में पुरुष और महिला क्रिकेटरों के लिए BS7928:2013 सर्टिफाइड सेफ्टी हेलमेट पहनना अनिवार्य कर दिया है.  इसके अलावा, तेज गेंदबाजों का सामना करते समय या स्टंप्स के पास विकेटकीपिंग/फील्डिंग करते समय हेलमेट पहनना अनिवार्य है. आईसीसी समय-समय पर नेक गार्ड के इस्तेमाल की सलाह और नियम भी जारी करती है ताकि गर्दन के पिछले हिस्से को बाउंसर से सुरक्षित रखा जा सके.

प्र:- 4. यदि मैच के दौरान किसी खिलाड़ी को सिर पर गंभीर चोट (Concussion) लग जाती है, तो आईसीसी का क्या प्रोटोकॉल है?

उ.:- आईसीसी के कनकशन विकल्प नियम (Rule 1.2.7 & 1.2.8) के अनुसार, यदि सिर या गर्दन पर गेंद लगने से खिलाड़ी को 'कनकशन' (मानसिक रूप से असहज/चक्कर आना) होता है, तो मेडिकल टीम की जांच के बाद उस खिलाड़ी को मैच से बाहर किया जा सकता है. उसकी जगह टीम में 'लाइक-फॉर-लाइक' (Like-for-like) सब्स्टिट्यूट खिलाड़ी शामिल किया जा सकता है, जो मैच में बल्लेबाजी या गेंदबाजी भी कर सकता है.

प्र:- 5. क्या आईसीसी के पास मैदान पर हुई किसी गंभीर दुर्घटना की स्वतंत्र कानूनी जांच  कराने का अधिकार है?

उ.:- यह समझना जरूरी है कि आईसीसी खेल की गवर्निंग बॉडी है, कोई आपराधिक जांच एजेंसी नहीं। हालांकि, किसी बड़ी दुर्घटना के बाद आईसीसी एक समीक्षा समिति गठित करती है. इस समिति का काम घटना के तकनीकी और सुरक्षा कारणों की समीक्षा करना होता है, ताकि भविष्य में सुरक्षा उपकरणों, पिच की गुणवत्ता और खेल के नियमों में सुधार किया जा सके (जैसे फिल ह्यूज की घटना के बाद स्वतंत्र समीक्षा कराई गई थी). आपराधिक या कानूनी जांच का अधिकार केवल स्थानीय देश की पुलिस और अदालतों के पास होता है.

क्रिकेट इतिहास में कुछ चर्चित केस

1. फिल ह्यूज (ऑस्ट्रेलिया)

यह क्रिकेट इतिहास की सबसे चर्चित और झकझोर देने वाली घटना है. साल नवंबर 2014 में ऑस्ट्रेलिया में शेफील्ड शील्ड मैच के दौरान न्यू साउथ वेल्स के गेंदबाज शॉन एबॉट का एक तीखा बाउंसर गेंद फिल ह्यूज के कान के नीचे जाकर लगा. फिलिप्स पुल करने में चूके और गेंद की गति अनुमान से ज्यादा निकली. फिलिप्स तुरंत ही जमीन पर गिर गए.  घायल होने के बाद अस्पताल में इलाज के दौरान दो दिनों बाद उनका निधन हो गया था. इस मामले में गेंदबाज शॉन एबॉट पर कोई कानूनी कार्रवाई या जेल की सजा नहीं हुई थी, क्योंकि यह पूरी तरह एक खेल का दुर्घटना था. 

2. रमन लांबा (भारत)

पूर्व भारतीय टेस्ट और वनडे क्रिकेटर रमन लांबा के साथ यह दर्दनाक हादसा 1998 में ढाका (बांग्लादेश) में एक क्लब मैच के दौरान हुआ था. यह घटना 20 फरवरी 1998 को ढाका (बांग्लादेश) में 'अबाहाणी क्रीड़ा चक्र' और 'मोहम्डन स्पोर्टिंग क्लब' के बीच खेले जा रहे ढाका प्रीमियर लीग के मैच में हुई थी. लांबा को तब गेंद लगी जब वह फॉरवर्ड शॉर्ट लेग पर फील्डिंग कर रहे थे. कप्तान और खिलाड़ियों ने उन्हें हेलमेट लगाने का सुझाव भी दिया, लेकिन उन्होंने इसे केवल एक ही गेंद का मामला समझकर टाल दिया.  बल्लेबाज मेहराब हुसैन ने स्पिनर की गेंद पर एक जोरदार पुल शॉट खेला. गेंद बेहद तेजी से सीधे रमन लांबा के सिर (कनपटी) पर जा लगी और छिटककर विकेटकीपर के हाथों में चली गई. चोट लगने के बाद रमन लांबा खुद चलकर पवेलियन लौटे थे, लेकिन कुछ ही समय बाद उनकी तबीयत बिगड़ने लगी. दिमाग में अंदरूनी रक्तस्राव  के कारण वे कोमा में चले गए और 23 फरवरी 1998 को उनका निधन हो गया. इस मामले में भी बल्लेबाज मेहराब पर कोई कार्रवाई करने का मतलब नहीं ही बनता था क्योंकि यह खेल में एक नैसर्गिक घटना घटी थी.  हालांकि, इस दुखद घटना का मेहराब हुसैन पर गहरा मानसिक असर पड़ा था और वे काफी समय तक गहरे सदमे में रहे थे. मेहराब हुसैन बाद में बांग्लादेश राष्ट्रीय क्रिकेट टीम के लिए खेलने वाले एक प्रमुख बल्लेबाज बने.

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Phillip Joel Hughes, International Cricket Council, Cricket, India
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