
मेलबर्न टेस्ट 26 दिसंबर से शुरू होगा लेकिन उससे पहले टीम इंडिया के सामने परेशानियों की लंबी लिस्ट है। गेंदबाज़ हो या फिर बल्लेबाज़, दोनों अपना सौ फ़ीसदी देने में फ़ेल हुए हैं।
बल्लेबाज़ों की नाकामी
दौरे पर ऑस्ट्रेलिया के साथ अब तक खेले गए दो टेस्ट मैचों पर नज़र डालें तो हार की सबसे बड़ी वजह बल्लेबाज़ों की नाकामी रही है।
मुरली विजय और विराट कोहली को छोड़ दें तो कोई भी भारतीय बल्लेबाज़ 250 रन का आंकड़ा पार नहीं कर सका है। दो टेस्ट में विजय ने 323 रन बनाए हैं जिसमें एक शतक और दो अर्द्धशतक शामिल हैं। वहीं, कोहली के नाम 276 रन है, जिसमें एडिलेड टेस्ट की दो पारियों में दो शतक हैं।
चेतेश्वर पुजारा, अजिंक्य रहाणे, शिखर धवन, रोहित शर्मा और कप्तान एमएस धोनी की बल्ले से नाकामी ने टीम को काफ़ी नुकसान पहुंचाया है।
रोहित शर्मा या सुरेश रैना?
मेलबर्न टेस्ट से पहले टीम इंडिया के थिंक टैंक के सामने सबसे बड़ा सवाल है कि बॉक्सिंग डे टेस्ट में किसे मौक़ा दिया जाए। इस बात का फ़ैसला लेने में टीम डायरेक्टर रवि शास्त्री और कप्तान एमएस धोनी को काफ़ी मुश्किल होने वाली है।
रोहित में टेलेंट की कमी नहीं है और उन्होंने इसका सबूत ब्लू जर्सी में दिया है। वन-डे में 264 रन की विशाल पारी खेलने वाले रोहित सफ़ेद कपड़ों में बेबस दिखे हैं।
मौजूदा ऑस्ट्रेलियाई दौरे पर भी रोहित के साथ कुछ ऐसा ही हुआ। कभी स्पिन तो कभी शॉर्ट बॉल ने ऑस्ट्रेलिया दौरे पर रोहित का काम तमाम किया है। दौरे में खेले गए दो टेस्ट की चार पारियों में रोहित के नाम सिर्फ़ 81 रन हैं।
दूसरी तरफ़ सुरेश रैना का हाल भी रोहित से ज़्यादा जुदा नहीं है। वन-डे और टी-20 क्रिकेट में रैना के बल्ले से रनों की बौछार होती रही है। जब टेस्ट क्रिकेट की बात आती है तो न जाने उनका हुनर कहीं खो जाता है।
203 वन-डे में रैना के नाम पांच हज़ार से ज़्यादा रन हैं, लेकिन 17 और टेस्ट में वह एक हज़ार रन भी नहीं जोड़ सके हैं।
वैसे इंग्लैंड के ख़िलाफ़ वन-डे सीरीज़ में अच्छे प्रदर्शन के बाद रैना ने शास्त्री का भरोसा जीता है। ऐसे में शायद उन्हें दो साल बाद एक बार फिर टेस्ट खेलने का मौक़ा मिल जाए।
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