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IND vs NZ: शतक से चूके, इरादों से नहीं, किंग कोहली ने न्यूजीलैंड के खिलाफ फिर साबित किया क्यों दुनिया कहती है 'चेज मास्टर'

Virat Kohli IND vs NZ 1st ODI: कोहली ने न केवल न्यूज़ीलैंड के खिलाफ कोहराम मचाया, बल्कि विश्व क्रिकेट को यह भी बता दिया कि 'किंग' अभी भी अपने शिखर पर है और आने वाले विश्व कप में भारत की जीत के सपने को साकार करने के लिए पूरी तरह तैयार है.

IND vs NZ: शतक से चूके, इरादों से नहीं, किंग कोहली ने न्यूजीलैंड के खिलाफ फिर साबित किया क्यों दुनिया कहती है 'चेज मास्टर'
Virat Kohli Record IND vs NZ 1st ODI

Virat Kohli Missed 85th International Century IND vs NZ 1st ODI: क्रिकेट के मैदान पर जब लक्ष्य का पीछा करने की बात आती है, तो एक ही नाम गूंजता है, 'विराट कोहली'. 'रन चेज मशीन' के नाम से मशहूर विराट ने एक बार फिर साबित कर दिया कि क्यों उन्हें आधुनिक क्रिकेट का सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज माना जाता है. न्यूजीलैंड के खिलाफ एक हाई-वोल्टेज मुकाबले में किंग विराट कोहली न्यूजीलैंड के खिलाफ पहले वनडे में भले ही अपने 85वें इंटरनेशनल शतक से चूक गए, लेकिन 91 गेंदों में 93 रनों की पारी खेलकर ये साबित कर दिया की दुनिया उन्हें क्यों रन चेज मास्टर मानती है. विराट ने अपनी पारी के दौरान 8 चौके और 1 छक्का लगायाआने वाले 2027 एकदिवसीय विश्व कप के लिए भी अपनी दावेदारी ठोक दी है.

'किंग' का कोहराम जारी

84 शतकों के आंकड़े पर कुछ समय से टिके कोहली ने इस मैच में उस कड़ी को नहीं तोड़ पाए जिस पर दुनिया की निगाहें टिकी थी. न्यूजीलैंड द्वारा दिए गए 301 रन के चुनौतीपूर्ण लक्ष्य का पीछा करते हुए कोहली ने अपनी पारी की शुरुआत से ही इरादे साफ कर दिए थे. उन्होंने पारी को जिम्मेदारी की तरह संभाला, साझेदारी बनाई, और खराब गेंदों को बाउंड्री तक पहुंचाया. इस पारी ने उनकी उस भूख को दिखाया है जो समय के साथ कम होने के बजाय बढ़ती ही जा रही है.

चेज मास्टर का जलवा, लक्ष्य का पीछा करने में महारत

विराट कोहली की सबसे बड़ी ताकत उनकी रन चेज करने की क्षमता है. जब भी भारत लक्ष्य का पीछा करता है, तो कोहली की मौजूदगी टीम के लिए वरदान का काम करती है. वह जानते हैं कि किस गेंदबाज पर कब हमला करना है, कब स्ट्राइक रोटेट करनी है और मैच को फिनिश कैसे करना है. इस मैच में भी उन्होंने यही किया. उन्होंने बिना किसी हड़बड़ी के, लेकिन एक प्लान तरीके से पारी को आगे बढ़ाया और टीम को जीत की दहलीज तक ले गए.

आंकड़े गवाह हैं कि लक्ष्य का पीछा करते हुए उनका औसत सामान्य मैचों की तुलना में कहीं बेहतर है, जो उन्हें सही मायनों में 'चेज़ मास्टर' बनाता है. विराट कोहली का वनडे क्रिकेट में लक्ष्य का पीछा करते हुए औसत लगभग 64.00 का है, जो कि क्रिकेट के इतिहास में सबसे बेहतरीन में से एक है.

2027 विश्व कप पर निशाना

इस धमाकेदार प्रदर्शन ने स्पष्ट कर दिया है कि 2027 में होने वाले एकदिवसीय विश्व कप के लिए भी विराट कोहली भारतीय टीम की रीढ़ बने रहेंगे. अपनी फिटनेस और 38 साल की उम्र के बावजूद, कोहली ने दिखा दिया है कि वह अभी भी शीर्ष स्तर का क्रिकेट खेलने के लिए पूरी तरह फिट हैं.

93 रनों की यह पारी सिर्फ एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि टीम इंडिया के लिए एक संदेश है कि उनका सबसे बड़ा मैच-विनर बड़े टूर्नामेंट्स के लिए अभी भी तैयार है और रनों की भूख भी इस बात की गवाही है. कोहली का यह फॉर्म न सिर्फ फैंस बल्कि कोच गंभीर एंड मैनेजमेंट  के लिए भी एक बड़ी राहत है, क्योंकि विश्व कप जैसे बड़े आयोजनों में अनुभव और फॉर्म का सही मेल ही सफल साबित होता है.

इस पारी से, कोहली ने न केवल न्यूज़ीलैंड के खिलाफ कोहराम मचाया, बल्कि विश्व क्रिकेट को यह भी बता दिया कि 'किंग' अभी भी अपने शिखर पर है और आने वाले विश्व कप में भारत की जीत के सपने को साकार करने के लिए पूरी तरह तैयार है.

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