डिफेंडिंग चैंपियन रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर दूसरी आईपीएल टीमों से अलग है और अलग तरीके की कोशिशें कर खेल और अपने ब्रैंड वैल्यु को मज़बूत करने की लगातार कोशिशें करता रहा है. बेंगलुरु में आयोजित RCB इनोवेशन लैब इंडियन स्पोर्ट्स समिट पावर्ड बाय लीडर्स के तीसरे संस्करण के सबसे चर्चित सत्र में विराट कोहली ने लीडरशिप, दबाव और एलीट स्पोर्ट्स के सबसे ऊंचे स्तर पर लगातार प्रदर्शन करने के लिए जरूरी सोचने के तरीके या मानसिकता को लेकर खुलकर बातें कीं.
सबसे ऊपर माइंड का खेल
'माइंड ओवर एवरीथिंग: पीक परफॉर्मेंस पर विराट कोहली' नाम की इस खुली बातचीत में कोहली ने उस उत्कृष्टता की चाह के बारे में बात की, जिसने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में उनके लगभग दो दशक के सफर को आकार दिया है. एक खिलाड़ी और चेज़ मास्टर के रूप में उन्हें क्या प्रेरित करता है, इस पर विचार करते हुए उन्होंने कहा, "मैं इस तरह से बना हूं कि मैं हमेशा ज्यादा जिम्मेदारी और ज्यादा बोझ चाहता हूं. यहीं पर मैं अपने सबसे बेहतरीन फॉर्म में रहता हूं."
द्रविड़ और राठौड़ का शुक्रिया
कोहली ने निजी प्रदर्शन से परे मकसद खोजने के बारे में भी बात की और बताया कि लीडरशिप ने उन्हें खुद को और आगे बढ़ाने में कैसे मदद की. उन्होंने कहा,"आपके पास खुद के बारे में सोचने का वक्त ही नहीं होता. यह एक बेहद खूबसूरत स्थिति होती है. अगर मैं किसी बड़े उद्देश्य, किसी बड़ी सोच के लिए खेल सकता हूं, तो मैं अपनी क्षमताओं से भी बेहतर प्रदर्शन कर सकता हूं."
उन्होंने भारतीय क्रिकेट टीम में राहुल द्रविड़ और विक्रम राठौर के साथ काम करने के अपने समय को भी याद किया. कोहली ने कहा,"मेरा एक शानदार दौर था और जब भी मैं उनसे मिलता हूं, दिल से उनका शुक्रिया अदा करता हूं क्योंकि उन्होंने मेरा इस तरह ख्याल रखा कि मुझे उनके लिए खेलने का मन करने लगा. उन्होंने समझा कि मैं क्या महसूस कर रहा हूं और सच में मानसिक रूप से मेरा ख्याल रखा. इससे मुझे ऐसी जगह मिली जहां मैं फिर से अपने क्रिकेट का आनंद ले सका."
फिटनेस के लिए ‘त्याग' नहीं किया
अपनी फिटनेस के प्रति लंबे समय से चली आ रही प्रतिबद्धता पर स्टार बल्लेबाज ने कहा,"मैं इसे वास्तव में त्याग नहीं कहता. लोग इसे तब त्याग कहते हैं जब आप चीजों को छोड़ते हैं, लेकिन मैं इसे निखार के रूप में देखता हूं. मेरे लिए, यह मिले हुए अवसर के प्रति ईमानदार रहने के बारे में है. लाखों लोग इस स्थिति में होना चाहते हैं, भारत के लिए खेलना और सबसे ऊंचे स्तर पर खेलना. इसलिए मुझे नहीं लगता कि इसे असाधारण कहकर सराहा जाना चाहिए. यह सामान्य होना चाहिए. इसी तरह किसी खेल की संस्कृति बढ़ती है."
एथलीटों का असर
कोहली ने प्रदर्शन और आंकड़ों से परे एथलीटों के प्रभाव पर भी विचार किया. "मेरे लिए अब प्रभाव का मतलब विश्वास पैदा करना है. अगर लोग आपके सफर, आपके अनुशासन या दबाव में आपकी प्रतिक्रिया को देखकर अपनी जिंदगी में प्रेरित महसूस कर सकें, तो शायद यही सबसे संतोषजनक बात है," उन्होंने कहा. बेंगलुरु में मंगलवार को आयोजित RCB की इस ख़ास समिट में IPL और WPL की व्यावसायिक वृद्धि, भारत की ओलंपिक महत्वाकांक्षाओं और एम चिन्नास्वामी स्टेडियम में फैन एक्सपीरियंस को बेहतर बनाने पर भी चर्चा हुई.
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