व्हॉइट बॉल क्रिकेट में गेंदबाजों पर कहर बनकर टूटने वाले वैभव सूर्यवंशी क्या लाल गेंद के खिलाफ भी सफल होंगे? यह वो सवाल है जिसको लेकर दिग्गज भी एकमत नहीं रखते. कई पूर्व खिलाड़ियों का मानना है कि वैभव इस फॉर्मेट में भी अपना जलवा दिखाएंगे, तो कई इस बाएं हाथ के बल्लेबाज को रेड बॉल के खिलाफ खेलते देखने को लेकर उत्सुक हैं. वैभव सूर्यवंशी का शुरुआती करियर इतनी तेज़ी से आगे बढ़ा है कि लगभग हर नया असाइनमेंट एक अहम पड़ाव जैसा लगता है. आईपीएल में जबरदस्त प्रदर्शन के बाद 15 साल की उम्र में उन्होंने इंटरनेशनल क्रिकेट में कदम रखा. इंग्लैंड में टी20 की मुश्किल शुरुआत हुई और फिर ज़िम्बाब्वे में 'प्लेयर ऑफ़ द सीरीज' वाला शानदार प्रदर्शन. वैभव अब दलीप ट्रॉफी में खेलते हुए दिखेंगे. ऐसे में इस फॉर्मेट में बाएं हाथ के बल्लेबाज का प्रदर्शन फैंस चर्चा का विषय है.
सूर्यवंशी का असल चैलेंज शुरू
जब ईस्ट ज़ोन बेंगलुरु में BCCI सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस में नॉर्थ ईस्ट ज़ोन के ख़िलाफ़ अपनी दलीप ट्रॉफ़ी की शुरुआत करेगा, तो सूर्यवंशी का रेड बॉल चैलेंज शुरू होगा. 15 साल की उम्र में, वह उस टीम के उप-कप्तान के तौर पर भी खेलेंगे जिसमें मोहम्मद शमी, मुकेश कुमार, अभिमन्यु ईश्वरन जैसे खिलाड़ी शामिल है, ऐसे में उपकप्तानी का कितना दबाव होगा, यह बाद की बात है. पहले तो उनके डिफेंस पर नजरें होंगी.
वैभव ने अभी तक 8 लिस्ट ए मैच खेले हैं. इसमें उनका औसत 17.25 का है. 12 पारियों में इस बल्लेबाज ने 207 रन बनाए हैं और 230 गेंदों का सामना किया है. यह आंकड़े बताते हैं कि टेस्ट में बल्लेबाज के जिस धैर्य की परीक्षा होती है, वो अभी तक वैभव ने नहीं दिखाई है. हालांकि, इस बार हालात बदले हुए दिख सकते हैं.
बचपन के कोच के साथ बनाया प्लान
जिम्बाब्वे से लौटने के बाद सूर्यवंशी ने राजस्थान रॉयल्स के परफॉर्मेंस सेंटर में 10 दिन के कैंप में शामिल हुए. रिपोर्ट्स की मानें तो उन्होंने सिर्फ अपनी शैली के अनुरूप ज़बरदस्त स्ट्रोक-प्ले को दोहराने पर काम नहीं किया, बल्कि डिफेंस पर अधिक जोर दिया. सूर्यवंशी के पुराने कोच मनीष ओझा ने भी कैंप में उनकी तैयारी में मदद की.
विदर्भ की भीषण गर्मी और सूखे मौसम में अलग-अलग तरह से टर्न लेने वाली पिचें तैयार की गईं, ताकि सूर्यवंशी स्पिन के खिलाफ अपना खेल बेहतर कर सकें. उछाल (बाउंस) के खिलाफ बैक-फुट पर खेलने की क्षमता को निखारने के लिए लाल मिट्टी वाली पिचों पर भी अभ्यास सत्र आयोजित किए गए.
राजस्थान रॉयल्स के एक अधिकारी ने बताया,"कैंप में तकनीकी कौशल को बेहतर करने, स्ट्रेंथ और कंडीशनिंग, वर्कलोड मैनेजमेंट, रिकवरी और प्रदर्शन का विश्लेषण शामिल था. इसके लिए हर खिलाड़ी की ज़रूरत के हिसाब से अलग ट्रेनिंग प्रोग्राम तैयार किए गए थे."
आलोचकों को करेंगे गलत साबित?
कई आलोचक और क्रिकेट पंडितों की मानें तो वैभव, जिस तरह से बल्लेबाज हैं, उनका टेस्ट में सफल होना मुश्किल है. ऐसे में वैभव के पास खुद को साबित करने का मौका जरूर है. वैभव जिस तरह से तैयारी कर रहे हैं, उसका लंबा असर हो सकता है.
गॉल टेस्ट में पडिक्कल का शतक और मानव सुथार के 10 विकेट, ऐसी ही तैयारियों का नतीज हैं. पडिक्कल ने श्रीलंका जाने से पहले अलग-अलग टर्न लेती पिचों पर अलग-अलग हाइट के स्पिनर के खिलाफ जमकर अभ्यास किया था. नतीजा सबके सामने हैं. आगे बढ़कर हिट करने वाले वैभव बैकफुट पर जाकर अपने पंच और कट शॉट से महफिल लूट पाते हैं या नहीं, यह फैंस को जल्द पता चल जाएगा.
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