Vaibhav Sooryavanshi father NDTV Exclusive interview: वैभव सूर्यवंशी के सिर्फ़ 15 साल की उम्र में टीम इंडिया में चयन के बाद, समस्तीपुर से लेकर श्रीलंका तक इस जीनियस खिलाड़ी की धूम मच गई है. बिहार के समस्तीपुर में वैभव के घर मेहमानों और मीडिया का तांता लगा हुआ है.वैभव के पिता संजीव सूर्यवंशी से बातचीत की हमारे स्पोर्ट्स एडिटर विमल मोहन ने. वैभव के पिता संजीव सूर्यवंशी ने NDTV से EXCLUSIVE बात करते हुए बताया कि वैभव बड़े गेंदबाज़ों को पहली गेंद पर छक्का क्यों मारते हैं और उनकी तुलना सचिन तेंदुलकर या सर डॉन ब्रैडमैन से करना क्यों ठीक नहीं-
सवाल: कभी आपने भी बड़े स्तर पर क्रिकेट खेलने का सपना देखा था. आपके बेटे ने सचिन तेंदुलकर का रिकॉर्ड तोड़ते हुए 15 साल की उम्र में टीम इंडिया में जगह बनाई है. क्या आपकी उनसे इस बारे में बात हो पाई है? इसके क्या मायने हैं?
वैभव के पिता संजीव सूर्यवंशी: हमारे परिवार के लिए ये बहुत बड़ी बात है. बहुत बड़ा सपना पूरा हुआ है. वैभव से अभी मेरी बात नहीं हो पाई है. वो श्रीलंका में ट्रेनिंग कर रहे हैं. अभी उनसे बात करूंगा. उन्होंने कल रात में मुझे कहा था कि कल 1 बजे दिन में टीम का चयन होने वाला है. मेरा दिल धक-धक कर रहा है. मैंने उन्हें कहा कि फ़िक्र मत करो. अच्छा खेले हो. अच्छा होगा.
सवाल: उन्होंने सबसे उम्र में टीम इंडिया में एंट्री का सचिन का रिकॉर्ड तोड़ा है. उनकी तुलना लोग सचिन और सर डॉन ब्रैडमैन से करते हैं?
वैभव के पिता संजीव सूर्यवंशी: देखिए सचिन या ब्रैडमेन से वैभव की तुलना सही नहीं है. इन खिलाड़ियों ने कितने लंबे समय तक कितना ज़्यादा और बड़ा प्रदर्शन किया है. अभी वैभव उनके पैर की धूल के बराबर नहीं. ये तुलना नहीं होनी चाहिए.

सवाल: आपसे मैंने पहले बात की थी तो आपने एक बार कहा था कि वो ब्रायन लारा की क्लिप देखते हैं. वैभव अब जब वैभव बन गए हैं तो वो किन क्रिकेटरों की वीडियो देखते हैं?
वैभव के पिता संजीव सूर्यवंशी: ब्रायन लारा भी लेफ़्टी हैं और वैभव भी. मुझे ब्रायन लारा की बैटिंग बहुत अच्छी लगती है तो मैं उन्हें लारा के वीडियोज़ दिखाता था. वो लारा और युवराज और दूसरे कई क्रिकेटरों के वीडियो देखते रहे हैं. लेकिन उनका गेम अपना अलग ही है. वो अपने तरह की अलग क्रिकट खेलता है.
सवाल: अभी तो उनकी एंट्री अंतर्राष्ट्रीय टी-20 क्रिकेट में हुई है. लेकिन वैभव क्या चाहते हैं? वो क्या चाहते हैं किस फॉर्मैट में खेलना उन्हें ज़्यादा पसंद है?
वैभव के पिता संजीव सूर्यवंशी: तीनों फ़ॉर्मैट. वो तीनों फॉर्मैट में खेलना चाहता है. उसे आप सबने आईपीएल में तेज़ खेलते देखा है. लेकिन एक 50 ओवर के मैच में उसने 332 रन बनाये हैं. उसे रेड बॉल क्रिकेट भी उतना ही पसंद है.
सवाल: उसने जसप्रीत बुमराह से लेकर पैट कमिंस तक कई बड़े गेंदबाज़ों की पहली ही गेंद पर छक्के जड़े हैं. ये सोच कहां से आई है? ये आपने उनसे कहा है या उनकी अपनी सोच है?
वैभव के पिता संजीव सूर्यवंशी: ये उसकी अपनी सोच है. वो किसी भी मैच में जाता था तो बड़े लड़के उसे बच्चा- बच्चा कहते थे. मैं बताता था कि ये विपक्षी टीम का बड़ा गेंदबाज़ है तो वो उसे ही छक्का लगाता था. वैभव कहते थे, “पापा मैं इसे छक्का मारूंगा तो दूसरे गेंदबाज़ हावी नहीं होंगे.” ये उसकी अपनी स्ट्राटेजी है. वो चाहता है लोग उसे उसके खेल से जानें उसकी उम्र से उसे जज नहीं करें.
सवाल: आप बिहार में हम सब के मां-पिताजी एक जैसा ही सोचते हैं... वैभव कहते हैं कि आप जल्दी खुश नहीं होते. आज तो आप ज़रूर खुश होंगे, वो टीम इंडिया में आ गए.
वैभव के पिता संजीव सूर्यवंशी: हां मैं बहुत खुश हूं. लेकिन बिहार में मां-बाप ऐसे ही होते हैं. बेटा कितना भी अच्छा कर ले तो पिता चाहता है कि वो थोड़ा और कुछ हासिल कर ले. रन बनाता है तो हम सोचते हैं थोड़े और रन बना ले. अहम बात है टीम के लिए जीत हासिल करना. टीम जीतेगी तो रन तो बन ही जाएंगे.
सवाल: आजकल वैभव के छोटे भाई आशीर्वाद सूर्यवंशी की भी चर्चा होने लगी है. क्या वो भी वैभव जितने ही टैलेंटेड हैं?
वैभव के पिता संजीव सूर्यवंशी: नहीं, वैभव अलग है. लेकिन आशीर्वाद भी अच्छा खेलता है. इसपर मैं उतना वक्त नहीं दे पाता हूं. वैभव के ही कामों पर ध्यान देना पड़ रहा है. लेकिन ये भी अच्छा खेलता है. वैसे ही मारता है. दांये हाथ का बैटर है. इसे भी आप जल्दी ही अच्छा खेलता देखेंगे.
सवाल: आपके और आपके बेटे ने पूरे इंडिया का दिल खुश कर दिया है. ढेर सारी शुभकामनायें.
वैभव के पिता संजीव सूर्यवंशी: बेहद शुक्रिया. थैंक यू.
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