
ब्रिस्बेन टेस्ट मैच में भारतीय टीम बैकफुट पर नजर आ रही है और इसकी वजह गेंदबाजों का फ्लॉप शो रहा है। विदेशी दौरे पर गेंदबाजों की यह कहानी पुरानी नहीं लगती।
टॉप ऑर्डर से पार पाने के बाद न जाने हमारे गेंदबाजों को क्या हो जाता है। पुछल्ले बल्लेबाजों को आउट करने में टीम इंडिया की कमजोरी उसे अब ब्रिस्बेन में भारी पड़ सकती है। दिन के पहले सत्र में फटाफट दो विकेट लेने के बाद भारत के गेंदबाज ऐसे भटके कि ऑस्ट्रेलियाई पुछल्ले उसके हाथ से मैच निकालकर ही ले गए।
ऑस्ट्रेलिया की पारी में सातवें विकेट के लिए 156 गेंदों पर 148 रन की साझेदारी हुई, जबकि नौवें विकेट के लिए 50 गेंदों पर 56 रन बने। दसवें विकेट के लिए 80 गेंदों पर 51 रन बने। मैच में भारत के आखिरी चार विकेट ने 80 रन बनाए थे, जबकि कंगारुओं के आखिरी चार पुछल्ले बल्लेबाजों ने भारत के खिलाफ 258 रन ठोक दिए।
भारतीय गेंदबाजी और टीम की रणनीति पर सवाल उठने लाजिमी हैं। टीम इंडिया ने अहम मौकों पर जरूरत से ज्यादा आक्रामक रवैया अपनाया और दिशा से भटक गई। मैदान पर कप्तान महेन्द्र सिंह धोनी हों या फिर 60 टेस्ट मैच खेल चुके ईशांत शर्मा, लगातार खराब गेंदबाजी को सुधारने के लिए कोई भी आगे नहीं आया।
तमाम टेस्ट मैच खेलने वाले देशों में पुछल्लों को आउट करने में टीम इंडिया सबसे फिसड्डी है। शायद यही वजह है कि वनडे और टी-20 में जिस टीम की तूती बोलती है, वह टेस्ट में इतना कम आंकी जाती है।
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