भारत के दिग्गज क्रिकेटर सुनील गावस्कर का नाम जब भी क्रिकेट इतिहास के महान बल्लेबाजों में लिया जाता है, तो उनके हजारों रन, शतक और रिकॉर्ड सबसे पहले याद आते हैं. लेकिन 'लिटिल मास्टर' के करियर से जुड़ा एक ऐसा आंकड़ा भी है, जिसे जानकर शायद आप हैरान रह जाएंगे. 125 टेस्ट खेलने वाले गावस्कर ने अपने पूरे टेस्ट करियर में एक ऐसा काम किया जो आज भी फैंस को सोचने पर मजबूर कर देता है.
दिलचस्प बात यह है कि गावस्कर ने अपने पूरे टेस्ट करियर में सिर्फ एक विकेट लिया था. और उनका यह इकलौता शिकार कोई मामूली बल्लेबाज नहीं, बल्कि पाकिस्तान के दिग्गज जहीर अब्बास थे. यह विकेट उनके टेस्ट करियर का पहला भी था और आखिरी भी. यानी 125 टेस्ट और 10 हजार से ज्यादा रन के करियर में गेंदबाजी के खाते में सिर्फ एक विकेट आया.
फैसलाबाद में हुआ था वो यादगार पल
यह घटना भारत और पाकिस्तान के बीच 1978-79 की टेस्ट सीरीज के पहले मुकाबले की है. मैच 16 से 20 अक्टूबर 1978 के बीच फैसलाबाद के इकबाल स्टेडियम में खेला गया था. पाकिस्तान ने पहली पारी में 503/8 रन बनाए थे, जिसमें जहीर अब्बास ने शानदार 176 रन की पारी खेली. भारत ने जवाब में 462/9 रन बनाए. गावस्कर ने भी पहली पारी में 89 रन बनाए थे. इसके बाद पाकिस्तान की दूसरी पारी में जहीर अब्बास एक बार फिर भारतीय गेंदबाजों के सामने टिक गए.
इस बार उन्होंने 96 रन बना दिए थे और शतक से सिर्फ चार रन दूर थे. तभी गावस्कर ने गेंद संभाली और वह पल आया, जो उनके पूरे टेस्ट करियर की गेंदबाजी का सबसे खास क्षण बन गया. जहीर अब्बास ने गावस्कर की गेंद पर शॉट खेला और चेतन चौहान के हाथों कैच आउट हो गए. इस तरह गावस्कर को अपने टेस्ट करियर का पहला और एकमात्र विकेट मिल गया. PCB के आधिकारिक स्कोरकार्ड में जहीर अब्बास के आउट होने का तरीका 'c Chetan Chauhan b Sunil Gavaskar' दर्ज है. यानी सुनील गावस्कर की गेंद पर चेतन चौहान ने कैच लपका था.
जहीर अब्बास का विकेट क्यों था इतना खास?
जहीर अब्बास उस दौर के पाकिस्तान के सबसे खतरनाक और स्टाइलिश बल्लेबाजों में गिने जाते थे. उसी टेस्ट की पहली पारी में उन्होंने 176 रन बनाए थे और दूसरी पारी में भी 96 रन तक पहुंच चुके थे. यानी एक ही मैच में वह दो बड़ी पारियां खेल रहे थे.
सालों बाद गावस्कर ने खुद इस विकेट को भारत-पाकिस्तान सीरीज में अपना सबसे यादगार पल बताया था. जब उनसे पूछा गया कि उन्होंने जहीर अब्बास को किस तरह की गेंद पर आउट किया था- लेग स्पिन, ऑफ स्पिन या मीडियम पेस- तो गावस्कर ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया था कि अगर आप चाहें तो इसे लेग स्पिन कह सकते हैं. यानी गावस्कर के लिए यह सिर्फ एक विकेट से कहीं ज्यादा था.
125 टेस्ट, लेकिन सिर्फ एक विकेट
गावस्कर का टेस्ट करियर आंकड़ों के लिहाज से असाधारण रहा. उन्होंने 125 टेस्ट मैचों की 214 पारियों में 10,122 रन बनाए. उनका बल्लेबाजी औसत 51.12 रहा और उन्होंने 34 शतक तथा 45 अर्धशतक लगाए. उनका सर्वश्रेष्ठ स्कोर नाबाद 236 रन रहा. वह टेस्ट क्रिकेट में 10,000 रन का आंकड़ा पार करने वाले दुनिया के पहले बल्लेबाज भी बने थे.
गेंदबाजी के आंकड़े बताते हैं अलग कहानी
गावस्कर ने अपने टेस्ट करियर में सिर्फ 29 पारियों में गेंदबाजी की. उन्होंने कुल 376 गेंदें फेंकीं और 206 रन दिए. उनके नाम सिर्फ एक विकेट रहा. उनका सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी प्रदर्शन 1/34 और गेंदबाजी औसत 206.00 रहा. यानी जिस खिलाड़ी के बल्ले से 10,122 टेस्ट रन निकले, उसकी गेंदबाजी में पूरा करियर खत्म होने के बाद भी विकेटों की संख्या सिर्फ 1 रही.
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