
श्रीनिवासन का फाइल फोटो
मुंबई:
सुप्रीम कोर्ट ने एन श्रीनिवासन को चेन्नई में भारतीय क्रिकेट बोर्ड की वार्षिक आम सभा की बैठक में बोर्ड का अध्यक्ष निर्वाचित होने की स्थिति में उन्हें यह पदभार ग्रहण करने से आज रोक दिया। वार्षिक आम सभा की बैठक 29 सितंबर को हो रही है।
न्यायमूर्ति एके पटनायक और न्यायमूर्जि जेएस खेहड़ की खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा, इस बीच, क्रिकेट बोर्ड की 29 सितंबर को प्रस्तावित वार्षिक आम सभा की बैठक होगी और इसमें चुनाव भी हो सकते हैं। यदि श्रीनिवासन अध्यक्ष पद के लिए निर्वाचित होते हैं तो वह अगले आदेश तक पदभार ग्रहण नहीं करेंगे। न्यायाधीशों ने इस बात पर आश्चर्य व्यक्त किया कि आईपीएल स्पॉट फिक्सिंग के सिलसिले में दामाद गुरुनाथ मयप्पन के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल होने के बावजूद श्रीनिवासन बीसीसीआई के पद पर डटे हुए हैं।
न्यायाधीशों ने स्पष्ट किया कि इस मामले का निबटारा होने तक वह बोर्ड के अध्यक्ष पद का कार्यभार नहीं ग्रहण करेंगे। इसके साथ ही न्यायाधीशों ने सवाल किया, यदि दामाद पर आरोप पत्र दाखिल किया गया है तो फिर वह प्रभारी (बीसीसीआई के अध्यक्ष) क्यों बने हुए हैं? आप (श्रीनिवासन) निर्वाचित होने के लिए इतने उत्सुक क्यों हैं? सुनवाई के दौरान न्यायालय ने ऐसे समय में चुनाव कराने पर भी सवाल उठाया जब मामला शीर्ष अदालत में लंबित है।
न्यायाधीशों ने इस मामले की सुनवाई सोमवार के लिए निर्धारित करते हुए कहा, हम किसी को नहीं जानते हैं। हम सिर्फ क्रिकेट को जानते हैं। हम सिर्फ बीसीसीआई को जानते हैं।
न्यायालय ने क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बिहार की अर्जी पर सुनवाई के दौरान यह अंतरिम आदेश दिया। यह संगठन चाहता था कि वार्षिक आम सभा की बैठक में श्रीनिवासन को अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ने से रोका जाए।
क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बिहार चाहती है कि बीसीसीआई को निर्देश दिया जाये कि शीर्ष अदालत में विवाद का निबटारा होने तक श्रीनिवासन को किसी भी समिति में शामिल नहीं किया जाए।
न्यायमूर्ति एके पटनायक और न्यायमूर्जि जेएस खेहड़ की खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा, इस बीच, क्रिकेट बोर्ड की 29 सितंबर को प्रस्तावित वार्षिक आम सभा की बैठक होगी और इसमें चुनाव भी हो सकते हैं। यदि श्रीनिवासन अध्यक्ष पद के लिए निर्वाचित होते हैं तो वह अगले आदेश तक पदभार ग्रहण नहीं करेंगे। न्यायाधीशों ने इस बात पर आश्चर्य व्यक्त किया कि आईपीएल स्पॉट फिक्सिंग के सिलसिले में दामाद गुरुनाथ मयप्पन के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल होने के बावजूद श्रीनिवासन बीसीसीआई के पद पर डटे हुए हैं।
न्यायाधीशों ने स्पष्ट किया कि इस मामले का निबटारा होने तक वह बोर्ड के अध्यक्ष पद का कार्यभार नहीं ग्रहण करेंगे। इसके साथ ही न्यायाधीशों ने सवाल किया, यदि दामाद पर आरोप पत्र दाखिल किया गया है तो फिर वह प्रभारी (बीसीसीआई के अध्यक्ष) क्यों बने हुए हैं? आप (श्रीनिवासन) निर्वाचित होने के लिए इतने उत्सुक क्यों हैं? सुनवाई के दौरान न्यायालय ने ऐसे समय में चुनाव कराने पर भी सवाल उठाया जब मामला शीर्ष अदालत में लंबित है।
न्यायाधीशों ने इस मामले की सुनवाई सोमवार के लिए निर्धारित करते हुए कहा, हम किसी को नहीं जानते हैं। हम सिर्फ क्रिकेट को जानते हैं। हम सिर्फ बीसीसीआई को जानते हैं।
न्यायालय ने क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बिहार की अर्जी पर सुनवाई के दौरान यह अंतरिम आदेश दिया। यह संगठन चाहता था कि वार्षिक आम सभा की बैठक में श्रीनिवासन को अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ने से रोका जाए।
क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बिहार चाहती है कि बीसीसीआई को निर्देश दिया जाये कि शीर्ष अदालत में विवाद का निबटारा होने तक श्रीनिवासन को किसी भी समिति में शामिल नहीं किया जाए।
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