- संजू सैमसन ने टी20 विश्व कप 2026 में वेस्टइंडीज के खिलाफ नाबाद 97 रन बनाकर भारत को जीत दिलाई
- सैमसन का यह स्कोर टी20 विश्व कप में भारतीय बल्लेबाजों का दूसरा सबसे बड़ा व्यक्तिगत स्कोर है
- उन्होंने विराट कोहली और रोहित शर्मा से टीम के दबाव में खेलने और रणनीति बदलने के तरीके सीखे
Sanju Samson Statement on Virat Kohli and Rohit Sharma; IND vs WI: समय आने पर खिलाड़ी अपनी काबिलियत साबित कर ही देता है, और इस बार यह बात संजू सैमसन पर बिल्कुल सटीक बैठी. टी20 विश्व कप 2026 के लीग चरण में उन्हें सिर्फ एक मैच खेलने का मौका मिला था. इसके बाद सुपर 8 में उन्हें फिर से टीम में शामिल किया गया, और उन्होंने उस भरोसे को सही साबित किया. लंबे समय से बेहद प्रतिभाशाली माने जाने वाले संजू सैमसन का करियर उतार-चढ़ाव से भरा रहा है. कई बार उनसे बड़ी पारियों की उम्मीद की गई, लेकिन वह उन्हें निभा नहीं पाए. हालांकि रविवार का दिन अलग था.
दो बार की विश्व चैंपियन वेस्टइंडीज क्रिकेट टीम के खिलाफ 196 रनों के कठिन लक्ष्य का पीछा करते हुए उन्होंने धैर्य और समझदारी से बल्लेबाज़ी की. उन्होंने पारी को इस तरह संभाला कि स्कोरबोर्ड पर कभी दबाव हावी नहीं हुआ और भारत ने 19.2 ओवर में जीत दर्ज कर ली.
सैमसन 97 रन बनाकर नाबाद लौटे. यह टी20 विश्व कप इतिहास में किसी भारतीय बल्लेबाज़ का दूसरा सबसे बड़ा व्यक्तिगत स्कोर है सुरेश रैना के 2010 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ बनाए गए 101 रनों के बाद. इस जीत के साथ भारत ने टूर्नामेंट के अंतिम चार में जगह पक्की कर ली.
मैच के बाद सैमसन ने अपनी भावनाएं साझा करते हुए कहा कि देश के लिए खेलना उनका बचपन का सपना था और इस पल का उन्हें लंबे समय से इंतजार था. उन्होंने स्वीकार किया कि उनके सफर में कई बार आत्म-संदेह भी आया, लेकिन विश्वास बनाए रखना ही उनकी सबसे बड़ी ताकत रही.
उन्होंने बताया कि वर्षों तक टीम के साथ रहते हुए, भले ही उन्हें नियमित मौके नहीं मिले, लेकिन डगआउट से मैच देखना भी उनके लिए सीखने का बड़ा जरिया रहा. उन्होंने दिग्गज खिलाड़ियों, खासकर विराट कोहली और रोहित शर्मा, को करीब से देखा और समझा कि बड़े खिलाड़ी दबाव में कैसे खेल को खत्म करते हैं और परिस्थितियों के अनुसार अपनी रणनीति बदलते हैं.
सैमसन के मुताबिक, पहले मैच में टीम पहले बल्लेबाजी कर रही थी, इसलिए उनका लक्ष्य शुरुआत से बड़ा स्कोर खड़ा करना था. लेकिन इस मुकाबले में परिस्थिति अलग थी. जब उन्होंने तेज खेलने की कोशिश की, तो विकेट गिरने लगे. ऐसे में उन्होंने साझेदारी बनाने और एक-एक गेंद पर ध्यान देने की रणनीति अपनाई. उनका कहना था कि उन्होंने कभी व्यक्तिगत उपलब्धि के बारे में नहीं सोचा, बल्कि अपनी भूमिका निभाने पर फोकस रखा.
केरल के इस बल्लेबाज़ ने इसे अपनी जिंदगी के सबसे यादगार दिनों में से एक बताया. उन्होंने कहा कि दर्शकों का समर्थन उन्हें ऊर्जा देता है, लेकिन मन में यह सवाल भी रहता है कि अगर प्रदर्शन अच्छा न हुआ तो क्या होगा. ऐसे क्षणों में उन्होंने खुद को वर्तमान में टिकाए रखा, गेंद पर नजर जमाई और अपनी तैयारी पर भरोसा किया और इस बार सब कुछ उनके पक्ष में गया.
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