
नई दिल्ली:
भारत ने भले ही सीरीज़ 2−0 से जीत ली लेकिन सीरीज़ में सचिन जिस तरह आउट हुए उसके बाद से यह सवाल उठने लगा है कि क्या सचिन तेंदुलकर के खेल पर अब उनकी उम्र का असर दिखने लगा है। न्यूज़ीलैंड सीरीज में उनके प्रदर्शन के बाद यह सवाल बड़ा हो रहा है कि आख़िर सचिन कब बल्ला टांगेंगे।
सचिन ने जब अपना पहला टेस्ट खेला तो विराट कोहली एक साल के थे। चेतेश्वर पुजारा के भी दो साल के पूरे नहीं हुए थे। सुरेश रैना ज़रूर तीन साल पूरे करने वाले थे लेकिन इन नौजवान खिलाड़ियों ने जिस सीरीज़ में शतकों और अर्द्धशतकों की झड़ी लगा दी उसमें सचिन तेंदुलकर फ्लॉप रहे।
हैदराबाद की इकलौती पारी मे वह 19 रन बना सके जबकि बेंगलुरू टेस्ट की पहली पारी में वह 17 रन बनाकर चल दिए। दूसरी पारी में जब भारत जीत के लिए खेल रहा था वह 27 पर आउट हो गए। इन तीनों मौकों पर तीन अलग−अलग गेंदबाज़ों ने उन्हें क्लीन बोल्ड किया।
सुनील गावसकर जैसे मुरीद को भी कहना पड़ा कि सचिन अपनी उम्र के ख़िलाफ़ खेल रहे हैं और उनका फुटवर्क पहले जैसा नहीं रहा।
23 साल से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में धूम मचा रहे सचिन तेंदुलकर के आख़िरी छह टेस्ट कहीं इस बात की चुगली करते हैं कि पिछले साल तक गरज रहा उनका बल्ला अब नहीं चल रहा।
न्यूजीलैंड से पहले ऑस्ट्रेलिया के साथ सीरीज़ में सचिन चार टेस्टों की आठ पारियों में कुल 288 रन बना सके। उनका बैटिंग औसत सिर्फ 36 रन रहा− यानी उनके करियर औसत से करीब 20 रन कम और इन टेस्टों में वह सिर्फ दो अर्द्धशतक लगा सके।
सचिन ने जब अपना पहला टेस्ट खेला तो विराट कोहली एक साल के थे। चेतेश्वर पुजारा के भी दो साल के पूरे नहीं हुए थे। सुरेश रैना ज़रूर तीन साल पूरे करने वाले थे लेकिन इन नौजवान खिलाड़ियों ने जिस सीरीज़ में शतकों और अर्द्धशतकों की झड़ी लगा दी उसमें सचिन तेंदुलकर फ्लॉप रहे।
हैदराबाद की इकलौती पारी मे वह 19 रन बना सके जबकि बेंगलुरू टेस्ट की पहली पारी में वह 17 रन बनाकर चल दिए। दूसरी पारी में जब भारत जीत के लिए खेल रहा था वह 27 पर आउट हो गए। इन तीनों मौकों पर तीन अलग−अलग गेंदबाज़ों ने उन्हें क्लीन बोल्ड किया।
सुनील गावसकर जैसे मुरीद को भी कहना पड़ा कि सचिन अपनी उम्र के ख़िलाफ़ खेल रहे हैं और उनका फुटवर्क पहले जैसा नहीं रहा।
23 साल से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में धूम मचा रहे सचिन तेंदुलकर के आख़िरी छह टेस्ट कहीं इस बात की चुगली करते हैं कि पिछले साल तक गरज रहा उनका बल्ला अब नहीं चल रहा।
न्यूजीलैंड से पहले ऑस्ट्रेलिया के साथ सीरीज़ में सचिन चार टेस्टों की आठ पारियों में कुल 288 रन बना सके। उनका बैटिंग औसत सिर्फ 36 रन रहा− यानी उनके करियर औसत से करीब 20 रन कम और इन टेस्टों में वह सिर्फ दो अर्द्धशतक लगा सके।
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