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This Article is From Jun 14, 2017

चैंपियंस ट्रॉफी 2017: 15 दिनों में कैसे बदल गई विराट कोहली की टीम इंडिया की सूरत?

इंग्लैंड दौरे पर जाने से पहले और पाकिस्तान के ख़िलाफ़ पहले मैच से पहले तक कई सवाल खड़े हो गए थे.

चैंपियंस ट्रॉफी 2017: 15 दिनों में कैसे बदल गई विराट कोहली की टीम इंडिया की सूरत?
चैंपियंस ट्रॉफ़ी के लिए जाने से पहले विराट कोहली की टीम इंडिया को लेकर कई सवाल थे (फाइल फोटो)
  • जानकार इस बार फिर भारतीय टीम को मान रहे फेवरेट
  • मजबूत यूनिट के रूप में टीम ने अब तक किया है प्रदर्शन
  • सलामी जोड़ी ने तीन में से दो मैचों में शतकीय साझेदारी की
चैंपियंस ट्रॉफ़ी के लिए इंग्लैंड जाने से पहले टीम इंडिया को लेकर कई सवाल थे. लेकिन लीग के तीन मैचों के बाद टीम कई पहलुओं में बेहद ठोस नज़र आ रही है. अब जानकार डिफेंडिंग चैंपियन भारत को एक बार फिर फ़ेवरेट मानने लगे हैं. पिछले दो हफ़्तों में हुए तीन मैचों में टीम इंडिया ने अपनी कई परेशानियों को पीछे छोड़ दिया है और एक मज़बूत यूनिट बनकर क्रिकेट की दुनिया में अपना दबदबा बनाती दिख रही है.

इंग्लैंड दौरे पर जाने से पहले और पाकिस्तान के ख़िलाफ़ पहले मैच से पहले तक कई सवाल खड़े हो गए थे. विराट-कुंबले विवाद, गुहा-प्रशासक समिति (COA) विवाद, कुंबले-प्रशासक समिति विवाद, विराट के चैरिटी डिनर पर विजय माल्या के जाने से हुए विवाद.. जैसे कई मुद्दे अब टीम को परेशान करते दिखाई नहीं देते. इसकी कई वजहें हैं. सबसे बड़ी वजह टीम इंडिया का मैच जीतकर चैंपियंस ट्रॉफ़ी के सेमीफ़ाइनल में  पहुंचना और ख़िताब के लिए मज़बूत दावेदार नज़र आना है.

सुपर सलामी जोड़ी
टीम इंडिया की सलामी जोड़ी ने तीन में से दो मैचों में सवा सौ रनों से बड़ी साझेदारी की. शिखर-रोहित की जोड़ी न सिर्फ़ मिडिल और निचले क्रम के बल्लेबाज़ों का काम आसान कर रही है गेंदबाज़ों का काम भी मुश्किल नहीं हो रहा. चैंपियंस ट्रॉफ़ी और वर्ल्ड कप  में शिखर का रिकॉर्ड हमेशा से शानदार रहा है. पिछली दफ़ा इस टूर्नामेंट में मैन ऑफ़ द सीरीज़ रहे शिखर 90 से ज़्यादा (90.33) और  रोहित 60 (60.33) से ज़्यादा के औसत से बल्लेबाज़ी कर रहे हैं.

कप्तान का कंट्रोल
कप्तान विराट कोहली श्रीलंका के ख़िलाफ़ बेशक ख़ाता नहीं खोल पाये. लेकिन पाकिस्तान और दक्षिण अफ़्रीका के ख़िलाफ़ उन्होंने नाबाद 81 और 76 रनों की पारियां (औसत 157.00) खेलीं. विपक्षी टीमों के लिए संदेश साफ़ है. विराट क्रीज़ पर रहे तो टीम इंडिया की जीत पक्की है. कप्तान विराट ने विवादों  के बीच खुद पर और टीम पर नियंत्रण बनाए रखा है. टीम इंडिया की जीत का ये बड़ा मंत्र साबित हो रहा है.

युवी-धोनी की बेमिसाल जोड़ी
विराट ने चैंपियंस ट्रॉफ़ी में जाने से पहले कहा था कि धोनी और युवी की जोड़ी उनके लिए बेहद अहम साबित हो सकती है. एमएस धोनी और युवराज की जोड़ी ने अपने युवा कप्तान को मायूस नहीं होने दिया है. धोनी (63.00) कप्तान विराट को अहम मौक़ों पर सलाह देने से नहीं चूक रहे. श्रीलंका के ख़िलाफ़ उन्होंने तेज़ 63 रन बनाये, जबकि पाकिस्तान के ख़िलाफ़ युवी (औसत 41.50) का तेज़ अर्द्धशतक टीम की जीत में अहम साबित हुआ.

फ़िनिशर पांड्या हैं बेजोड़ कड़ी
पाकिस्तान के ख़िलाफ़ आख़िरी ओवरों में लगातार तीन छक्के जड़ने वाले हार्दिक पांड्या फ़िनिशर का रोल अदा करने का माद्दा दिखा रहे हैं. पांड्या (बल्लेबाज़ी का औसत 29.00, गेंदबाज़ी 3/146) गेंदबाज़ी में भी अपना रोल अदा कर रहे हैं. आर अश्विन के साथ पांड्या की मौजूदगी टीम इंडिया के निचले क्रम को कमज़ोर साबित नहीं होने देती.

बेजान पिच पर असरदार
इस बार इंग्लैंड की पिचों पर गेंदबाज़ों को स्विंग कराने में उतनी मदद नहीं मिल रही. इसके बावजूद भुवनेश्वर (4/100), उमेश यादव (3/97), रवींद्र जडेजा (3/134), जसप्रीत बुमराह (2/103) या आर अश्विन गेंदबाज़ी की (1/43) यूनिट ने अबतक कम से कम टीम मैनेजमेंट को मायूस नहीं किया है.
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