पाकिस्तान के पूर्व चीफ सेलेक्टर और हेड कोच हारून रशीद का मानना है कि पाकिस्तान क्रिकेट का पतन उसी समय शुरू हो गया था जब पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान ने घरेलू क्रिकेट का ढांचा बदला था. इमरान खान ने प्रधानमंत्री रहते पाकिस्तान क्रिकेट के घरेलू ढांचे का अध्ययन करने के लिए एक टास्क फोर्स बनाई थी और हारून रशीद उसका हिस्सा थे. हारून ने अब बताया कि कैसे पाकिस्तान के पूर्व कप्तान ने पाकिस्तान के फर्स्ट-क्लास ढांचे को बदलकर सिर्फ पांच-छह टीमें करने पर जोर दिया था.
'स्मैश इट' स्पोर्ट्स चैनल के एक पॉडकास्ट पर हारून ने कहा,"मैं क्रिकेट बोर्ड और टास्क फोर्स का हिस्सा था और मुझे याद है कि जब हम इमरान से मिले थे, तो हमने घरेलू क्रिकेट का एक हाइब्रिड मॉडल पेश किया था. लेकिन उन्होंने उसे पूरी तरह से खारिज कर दिया." इमरान 2018 में अपनी पार्टी 'पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ़' के आम चुनाव जीतने के बाद प्रधानमंत्री बने थे, लेकिन 2022 में उन्हें सत्ता से हटा दिया गया और अब वह अपने कार्यकाल से जुड़े कई आरोपों का सामना करते हुए अदियाला जेल में हैं.
पाकिस्तान के मशहूर कप्तान, जिन्होंने अपने देश के लिए 1992 का वर्ल्ड कप जीता था, ने ऑस्ट्रेलियाई ढांचे की तर्ज पर घरेलू ढांचे में बदलाव का आदेश दिया था. इसमें फर्स्ट-क्लास क्रिकेट में टीमों की संख्या 10-16 से घटाकर सिर्फ पांच कर दी गई थी. कई क्रिकेट आलोचकों और विश्लेषकों का मानना है कि इस कदम का पाकिस्तान क्रिकेट पर उल्टा असर पड़ा.
हारून ने याद किया कि प्रधानमंत्री होने के नाते इमरान अपनी दूसरी ज़िम्मेदारियों में बहुत व्यस्त रहते थे. हारून ने कहा,"आपको क्या लगता है कि एक प्रधानमंत्री कितना समय दे सकता है? हमें घरेलू क्रिकेट का एक संशोधित प्लान पेश करने का आदेश दिया गया था और हमने ऐसा किया भी, और वह एक हाइब्रिड प्लान था."
हारून ने रिटायरमेंट के बाद 2020 तक पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड में कई अहम पदों पर काम किया, जिनमें चीफ सेलेक्टर, सेलेक्टर, हेड कोच, हाई परफॉर्मेंस और डेवलपमेंट के हेड और मैनेजर जैसे पद शामिल थे. उन्होंने आगे कहा,"मुझे याद है कि हमने इमरान से कहा था कि हाइब्रिड मॉडल हमारे क्रिकेट के लिए सबसे अच्छा है क्योंकि हमने टीमों की संख्या घटाकर आठ तो कर दी थी, लेकिन घरेलू क्रिकेट में डिपार्टमेंटल टीमों की भागीदारी बनाए रखी थी."
पाकिस्तान के पूर्व चीफ सेलेक्टर ने आगे कहा,"लेकिन इमरान ने हमारे साथ हुई छोटी सी मीटिंग में हाइब्रिड मॉडल को खारिज कर दिया और कहा कि उन्हें घरेलू ढांचे में आठ नहीं, बल्कि ज़्यादा से ज़्यादा पांच से छह टीमें चाहिए थीं." हारून ने याद करते हुए कहा, "हमने उनसे कहा था कि धीरे-धीरे नए घरेलू ढांचे को अपनाना बेहतर होगा, लेकिन आखिरकार आपको प्रधानमंत्री की बात माननी ही पड़ती है. हो सकता है कि उनकी नीयत अच्छी रही हो, लेकिन पाकिस्तान क्रिकेट के लिए यह फायदेमंद साबित नहीं हुआ."
उन्होंने बताया कि उस समय बोर्ड के चेयरमैन एहसान मनी ने टास्क फोर्स से कहा था कि वे वैसा ही करें जैसा इमरान चाहते थे. हारून का मानना है,"हमने घरेलू ढांचे को बदलकर प्रांतीय क्रिकेट कर दिया और विभागों को इसमें शामिल नहीं किया, लेकिन मुझे व्यक्तिगत रूप से लगता है कि यह एक गलत फैसला था और इससे हमारे क्रिकेट के स्तर में गिरावट आई."
हारून ने कहा कि विश्व क्रिकेट में भारत की ज़बरदस्त तरक्की की वजह उनका घरेलू क्रिकेट ही है. उन्होंने आगे कहा,"लोग आईपीएल की तो बात करते हैं, लेकिन यह भूल जाते हैं कि भारत में आज भी रणजी ट्रॉफी, दलीप ट्रॉफी, मुश्ताक अली ट्रॉफी और विजय हजारे ट्रॉफी जैसे टूर्नामेंट होते हैं."
हारून ने कहा,"साथ ही, वहां राज्य-स्तरीय एसोसिएशन स्वतंत्र हैं और क्लब स्तर पर उनके अपने नियमित घरेलू टूर्नामेंट होते हैं. पाकिस्तान में अब सारी ताकत पीसीबी के पास है. उसे अपनी शक्तियों का विकेंद्रीकरण करने और क्षेत्रीय एसोसिएशनों व विभागों को पहले की तरह ज़्यादा आज़ादी देने की ज़रूरत है."
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