भारतीय क्रिकेट टीम के अनुभवी तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी ने टेस्ट क्रिकेट से संन्यास ले लिया है. जिसके बाद उनके फैसले पर लगातार चर्चा हो रही है. मुरादाबाद में रहने वाले उनके बचपन के कोच बदरुद्दीन सिद्दीकी ने भी अपना विचार साझा किया है. उनका कहना है शमी के इस फैसले के पीछे चयनकर्ताओं की अनदेखी बड़ी वजह हो सकती है. यहीं नहीं उनका ये भी कहना है कि शमी लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहे थे. रणजी ट्रॉफी में भी उन्होंने शानदार गेंदबाजी की, लेकिन इसके बावजूद उन्हें टेस्ट टीम में मौका नहीं दिया जा रहा था.
भारतीय तेज गेंदबाज के मुताबिक शमी अभी कम से कम दो साल और देश के लिए टेस्ट क्रिकेट खेल सकते थे. उनमें अभी काफी क्रिकेट बाकी थी और वह टीम इंडिया के लिए कई और रिकॉर्ड बना सकते थे.
बदरुद्दीन सिद्दीकी का कहना है शमी जैसे अनुभवी गेंदबाज का टीम में रहना युवा खिलाड़ियों के लिए भी काफी फायदेमंद होता. युवा तेज गेंदबाजों को उनके अनुभव से बहुत कुछ सीखने का मौका मिलता.
टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद शमी का अब पूरा ध्यान वनडे और व्हाइट बॉल क्रिकेट पर रहेगा. उनके कोच को उम्मीद है कि शमी आगे भी क्रिकेट से जुड़े रहेंगे और अपनी कोचिंग के जरिए देश को नए और बेहतरीन तेज गेंदबाज तैयार करके देंगे.
मोहम्मद शमी का टेस्ट करियर
2013 से 2023 के बीच मोहम्मद शमी देश के लिए कुल 64 टेस्ट मुकाबले खेलने में कामयाब रहे. जहां उन्हें 122 पारियों में 27.71 की औसत से 229 सफलता हाथ लगी.
टेस्ट क्रिकेट में वह छह बार पांच और 12 बार चार विकेट चटकाने में कामयाब रहे. 56 रन खर्च छह विकेट उनका एक मैच की एक पारी में सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी प्रदर्शन रहा.
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