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'सांवले लड़के के लिए चॉकलेट केक', लक्ष्मण शिवरामकृष्णन ने साथी खिलाड़ी पर लगाया नस्लवाद का आरोप

एक इंटरव्यू में, लक्ष्मण शिवरामकृष्णन ने अपने क्रिकेट करियर के दौरान नस्लवाद की कई ऐसी घटनाओं के बारे में बताया, जिनका उन्हें सामना करना पड़ा था.

'सांवले लड़के के लिए चॉकलेट केक', लक्ष्मण शिवरामकृष्णन ने साथी खिलाड़ी पर लगाया नस्लवाद का आरोप
Laxman Sivaramakrishnan

Laxman Sivaramakrishnan says he faced racism from Teammates: भारत के पूर्व लेग स्पिनर और अनुभवी क्रिकेट विशेषज्ञ लक्ष्मण शिवरामकृष्णन ने एक इंटरव्यू में अपने क्रिकेट करियर के दौरान नस्लवाद की कई ऐसी घटनाओं के बारे में खुलासा किया है जिनका उन्हें सामना करना पड़ा था. इंटरव्यू में, शिवरामकृष्णन ने उन कारणों" के बारे में बताया, जिनकी वजह से उनके मन पर एक खटास रह गई है, जिसे मिटाने के लिए उन्होंने काफी संघर्ष किया, खासकर नस्लवाद की घटनाएं जो बार-बार सामने आती रहीं. द इंडियन एक्सप्रेस को दिए एक इंटरव्यू के मुताबिक, भारत के पूर्व स्पिनर ने कहा कि "पहला निशान 14 साल की छोटी उम्र में आया था, मैं चेपॉक में नेट बॉलर के तौर पर भारतीय कैंप में शामिल हुआ था.  यूनिफॉर्म में ही, वह सीधे स्टेडियम के एक छोटे से कमरे में कपड़े बदलने के लिए दौड़े, तभी एक सीनियर भारतीय बल्लेबाज ने उन्हें बुलाया और उस सीनियर भारतीय खिलाड़ी ने उनसे अपने जूते साफ करने के लिए कहा. 

उस खिलाड़ी के टिप्पणी से हैरान होकर, शिवरामकृष्णन ने याद करते हुए कहा, "मैंने बस उनकी तरफ देखा और कहा, 'इससे ​​मेरा कोई लेना-देना नहीं है, आप बस वही करें जो आपको करना है.'" उन्होंने साफ़ किया कि उस सीनियर खिलाड़ी ने उन्हें ग्राउंड स्टाफ़ समझ लिया था, आगे उन्होंने खुलासा किया कि "उस समय मुझे नहीं पता था कि नस्लवाद या रंग-भेद क्या होता है, मैं बस यही सोच रहा था कि इस आदमी को इस तरह से प्रतिक्रिया देने की क्या ज़रूरत थी."

यह घटना कोई अकेली घटना नहीं थी, उन्होंने बताया कि तमिलनाडु टीम में भी, जाने-माने खिलाड़ी उन्हें "करुपा" यानी सांवले रंग वाला लड़का कहकर बुलाया करते थे.  जब भी वह मुंबई, चंडीगढ़ और जालंधर में बाउंड्री के पास फ़ील्डिंग करते थे, तो भीड़ अक्सर "कालिया, तेरा क्या होगा" के नारे लगाकर उनके रंग का मज़ाक उड़ाती थी.

नस्लवाद की एक और घटना बताते हुए, शिवरामकृष्णन ने खुलासा किया कि कैसे एक सीनियर भारतीय खिलाड़ी ने उनकी त्वचा के रंग की तुलना उस केक से की थी जो उनके 17वें जन्मदिन के लिए मंगाया गया था.  यह सुनील गावस्कर ही थे जिन्होंने मुझे शांत कराया था, जब वह केक काट रहे थे और उनकी आंखों से आंसू थे.

शिवरामकृष्णन के अनुसार, एक सीनियर खिलाड़ी ने उस समय कमेंट करते हुए कहा था. "हे सनी, तुमने केक का बिल्कुल सही रंग चुना है.. एक सांवले लड़के के लिए चॉकलेट केक...मैं यह सुनकर रोने लगा था. तब मैंने केक काटने से मना कर दिया.. सुनील गावस्कर को मुझे शांत कराना पड़ा, और फिर मैंने आंखों में आँसू लिए केक काटा था. "

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