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कोलंबो की पिच होगी गॉल जैसी,पहले बैटिंग करने वाली टीम को होगा फायदा! रिपोर्ट में बड़ा दावा

भारत-श्रीलंका के बीच सीरीज का पहला मैच गॉल में खेला गया था और इस मुकाबले के लिए पिच ताफी बेहतर थी. शुरुआती दो दिन बल्लेबाजी आसान रही लेकिन फिर पिच ने अपना नेचर बदला.

कोलंबो की पिच होगी गॉल जैसी,पहले बैटिंग करने वाली टीम को होगा फायदा! रिपोर्ट में बड़ा दावा
India vs Sri Lanka 2nd Test Colombo pitch Report

भारत और श्रीलंका के बीच कोलंबो के सिंहलीज़ स्पोर्ट्स क्लब में सीरीज का दूसरा टेस्ट खेला जाना है. कभी इस मैदान पर बल्लेबाजों का जलवा होता था. लेकिन समय के साथ चीजें बदली हैं. अब यहां पर स्पिन गेंदबाजों का जलवा होता है. टर्न लेती गेंदों के खिलाफ बैटिंग आसान नहीं होती है और जब रविवार से एक्शन शुरू होगा, तब नजरें इस पर होंगी. भारतीय बल्लेबाज पिछले कुछ समय में स्पिन गेंदबाजों के खिलाफ संघर्ष करते नजर आए हैं,ऐसे में मेजबान देश स्पिन ट्रैक बनाकर भारतीय बल्लेबाजों को परेशान कर सकता है. हालांकि, अब एक रिपोर्ट में दावा है कि कोलंबो की पिच गॉल जैसी हो सकती है, जहां बल्लेबाज और गेंदबाज दोनों के लिए मौके थे. 

न्यूज एसेंजी पीटीआई ने श्रीलंकाई क्रिकेट अधिकारियों के हवाले से लिखा है कि कोलंबो का विकेट स्पिनर्स के लिए बहुत ज्यादा मददगार नहीं होगा. श्रीलंकाई अधिकारियों को लगता है कि 23 अगस्त से शुरू होने वाले दूसरे टेस्ट के लिए स्पिन के लिए बहुत ज़्यादा मददगार पिच बनाना उल्टा पड़ सकता है. 

श्रीलंकाई क्रिकेट के एक अधिकारी ने पीटीआई को बताया,"अभी तो गॉल जैसी संतुलित पिच बनाने का विचार है. श्रीलंका के पास चंडी (दिनेश चांदीमल), कुसल (मेंडिस) और (पाथुम) निसांका जैसे कुछ अनुभवी खिलाड़ी भी नहीं हैं. इसलिए, हमें अपने युवा बल्लेबाजों को भी मौका देने की ज़रूरत है." उन्होंने आगे कहा,"बेशक, यह सब इस बात पर निर्भर करता है कि टीम मैच के लिए आखिर क्या चाहती है.उन्हें ऐसा कुछ चाहिए जिससे उनके जीतने और सीरीज़ ड्रॉ करने का सबसे अच्छा मौका बने."

2000 के दशक में, सिंहलीज़ की पिच पर बल्लेबाज़ों की मौज होती थी और यह घरेलू टीम का एक छोटा सा किला हुआ करता था.1999-2009 के दशक में, श्रीलंका ने इस मैदान पर 12 टेस्ट खेले, जिनमें से छह जीते और बाकी ड्रॉ रहे. तरीका आसान था. कुमार संगकारा और महेला जयवर्धने जैसे बल्लेबाज़ खूब रन बनाते थे, जबकि महान स्पिनर मुथैया मुरलीधरन की अगुवाई में मज़बूत स्पिन अटैक विपक्षी टीम को जकड़ लेता था. लेकिन जब दिग्गज खिलाड़ी रिटायर हो गए, तो पिच का मिज़ाज भी बदल गया.

अगले दशक में, श्रीलंका यहां खेले गए सात टेस्ट में से सिर्फ़ तीन ही जीत पाया और बाकी चार हार गया.असल में, दो बार तो उन्हें भारत और पाकिस्तान के खिलाफ़ पहली पारी में 400 से ज़्यादा रनों की बढ़त गंवानी पड़ी. लेकिन दिग्गजों के दौर के बाद भारत (दो बार), इंग्लैंड और पाकिस्तान जैसी टीमों के लिए यहां मेज़बान टीम के खिलाफ़ खेलना आसान रहा.दूसरे टेस्ट में भी कुछ ऐसा ही हो सकता है, क्योंकि पहले बल्लेबाज़ी करने वाली टीम के पास शायद ज़्यादा फ़ायदा हो.

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