Saurabh Netravalkar's super story: शनिवार से शुरू हुए टी20 विश्व कप (T20 World Cup 2026) में भारतीय मूल के खिलाड़ियों से सजी यूएसए (Ind vs USA) टीम ने दुनिया को दिखाया कि पूरी तरह पेशेवर न होते हुए भी इस टीम में कितना दम है. अमेरिका के ज्यादातर खिलाड़ियों का मूल या फुलटाइम पेशा कुछ और ही है. और इनमें से एक हैं 35वें साल में चल रहे लेफ्टी पेसर सौरभ नेत्रावल्कर (Saurabh Netravalkar) जिनके हिस्से में माथे पर ऐसा कलंक लगा, जो चर्चा का विषय बन गया. भारतीय बल्लेबाजों खासकर सूर्यकुमार यादव ने ऐसी पिटाई की कि वह टी-20 वर्ल्ड कप इतिहास के सबसे महंगे गेंदबाज (4-0-65-0) बन गए. वो सौरभ, जिन्होंने कभी भारतीय घरेलू अंडर-19 कूच बिहार ट्रॉफी में धमाकेदार आगाज किया था. वह नेत्रावल्कर जो कभी अंडर-19 विश्व कप में भारत के सर्वश्रेष्ठ बॉलर रहे थे. लेकिन यहां से कड़ी प्रतिस्पर्धा ने उन्हें सीनियर टीम इंडिया की रेस में पीछे किया, तो सौरभ ने ऐसा फैसला लिया, जो तमाम युवा क्रिकेटरों और रेस में पिछड़ने वाले क्रिकेटरों के लिए एक बहुत ही बड़ा उदाहरण हैं. चलिए सौरभ की कहानी को आप कदम-दर-कदम समझिए.
कूच बिहार ट्रॉफी में धमाकेदार आगाज
यह साल 2008-09 का घरेलू सीजन था. हर युवा क्रिकेटर की तरह आंखों में देश के लिए खेलने का सपना वाले सौरभ ने इस सीजन में मुंबई के लिए 30 विकेट लेकर जोरदार दस्तक दी. इस प्रदर्शन ने सुर्खियां बटोरीं, तो नेत्रावल्कर अगले साल अंडर-19 विश्व कप टीम के सदस्य बन गए. इसी टीम में आज के सुपरस्टार केएल राहुल, संदीप शर्मा और जयदेव उनाडकट भी थे. टीम में जगह मिली, तो सौरभ ने विश्व कप में अपने प्रदर्शन से सीनियर सेलेक्टरों का ध्यान खींचा.

अंडर-19 विश्व कप के भारत के बेस्ट बॉलर
साल 2010 में न्यूज़ीलैंड में हुए अंडर-19 विश्व कप में वह भारत के लिए सबसे ज़्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज़ रहे. सौरभ 6 मैचों में 9 विकेट लेकर भारतीय टीम के लिए सबसे सफल बॉलर रहे. इसके बाद उन्हें उम्मीद थी कि उनका यह प्रदर्शन उन्हें सीनियर मुंबई टीम में जगह दिलाएगा और शायद आईपीएल अनुबंध का रास्ता भी खोलेगा। लेकिन अजित अगरकर, ज़हीर ख़ान, आविष्कार साल्वी और युवा धवल कुलकर्णी जैसे गेंदबाज़ों की मौजूदगी के कारण उनके लिए मुंबई टीम में जगह बनाना मुश्किल हो गया. और यहीं से लिया उन्होंने जीवन का और युवाओं क्रिकेटर के लिए मिसाल बनने वाला फैसला
सौरभ का प्रेरणादायक फैसला और टर्निंग प्वाइंट
सौरभ ने क्रिकेट के साथ-साथ ज्यादातर क्रिकेटरों के उलट अपनी पढ़ाई पर पूरा ध्यान केंद्रित किया. नतीजा यह रहा कि सौरभ ने कंप्यूटर इंजीनियरिंग में स्नातक की पढ़ाई पूरी की. मुंबई के लिए खेलने के सीमित अवसरों को देखते हुए उन्होंने उच्च शिक्षा हासिल करने का फैसला किया. और जब 2015 में उन्हें न्यूयॉर्क स्थित कॉर्नेल यूनिवर्सिटी से मास्टर डिग्री के लिए दाख़िले का प्रस्ताव मिला और वे अमेरिका चले गए. और यही फैसला उनके करियर का टर्निंग प्वाइंट बन गया.
भारत में होते, तो नहीं मिलता विश्व कप खेलने का मौका
अमेरिका में सौरभ सप्ताहांत में मनोरंजन के तौर पर क्रिकेट खेलने लगे और 2018 में उन्होंने अमेरिका के लिए लिस्ट-ए क्रिकेट में पदार्पण किया.वह लगातार बेहतर करते रहे, तो अमेरिका की टीम में जगह मिल गई. इसने उन्हें साल 2024 विश्व कप खेलने का वह मौका दिला दिया, जो भारत में कभी नहीं ही मिलता. टी20 विश्व कप 2024 में उन्होंने सुपर ओवर में पाकिस्तान के ख़िलाफ़ अमेरिका को ऐतिहासिक जीत दिलाकर इतिहास रच दिया. वहीं,सौरभ ने मास्टर डिग्री में ऐसा स्कोर किया, जो भारतीय क्रिकेट इतिहास में पढ़ाई में बड़े-बड़े धुरंधर नहीं कर सके

सौरभ के इस 'स्कोर' जैसा कोई स्कोर नहीं!
सौरभ ने युवा क्रिकेटरों के सामने सही समय पर सही निर्णय लेने, पढ़ाई के जरिए भी विकल्प खुला रखने का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण तो सामने रखा ही. वहीं इस लेफ्टी पेसर ने अमेरिका की कॉर्नेल युनिवर्सिटी (अमेरिका के 8 सबसे पुराने और प्रतिष्ठित प्राइवेट विश्वविद्यालयों का एक समूह है, जो अपनी उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा, अकादमिक उत्कृष्टता और कठिन प्रवेश प्रक्रिया के लिए दुनिया भर में मशहूर हैं) से मास्टर ऑफ कंप्यूटर साइंस (MS) की डिग्री 4.088 जीपीए (ग्रेड प्वाइंट एवरेड) के स्कोर के साथ ली. यह विश्वविद्याल का बहुत ही उच्च मानक है. खासतौर पर कंप्यूटर साइंस जैसे विषय में और इस देश के शीर्ष विवि में.
सुपर से ऊपर स्कोर का सुपर इनाम !
आमतौर पर 4.0 का ग्रेड परफेक्ट स्कोर माना जाता है, लेकिन सौरभ ने 4.088 से वह स्कोर हासिल किया, जो भारत सहित दुनिया के लिए खेले क्रिकेटरों को तो छोड़ दीजिए, सिर्फ पढ़ाई-लिखाई से वास्ता रखने वाले छात्र भी बमुश्किल ही कर पाते हैं. 4.088 का स्कोर अपने आप में बताता है कि तकनीकी इंजीनियरिंग में सौरभ बहुत ही शीर्ष चुनिंदा छात्रों में आते हैं. इसके लिए पढ़ाई में बहुत ही कड़ी मेहनत करनी पड़ती है. और इस 'स्कोर'का ही परिणाम है कि सौरभ नेत्रावल्कर आज दुनिया की दिग्गज कंपनी 'ऑरेकल' में तकनीकी विभाग के एक मुख्य सदस्य हैं. वह इस कंपनी में 12 जुलाई 2026 से काम कर रहे हैं.
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