- पिछले पंद्रह वर्षों में भारत में सिजेरियन डिलीवरी से जन्म लेने वाले बच्चों की संख्या चार गुना से अधिक बढ़ी है
- वर्ष दो हजार आठ से दो हजार नौ में कुल संस्थागत डिलीवरी में सिजेरियन की संख्या छह दशमलव चार प्रतिशत थी
- 2022 से 2023 में कुल जन्मों में से सिजेरियन डिलीवरी का प्रतिशत लगभग तेईस प्रतिशत पहुंच गया
देश में सिजेरियन यानी ऑपरेशन की प्रक्रिया से बच्चे पैदा करने के मामले लगातार बढ़ रहे हैं.इस बारे में सरकार ने संसद में जो जवाब दिया है वो भी बेहद ही चौंकाने वाला है .इस बारे में सांसद मदिला गुरुमूर्ति ने लोकसभा में सवाल पूछा था जिसका लिखित जवाब सरकार ने दिया. सरकार के मुताबिक़ जवाब में दिए गए आंकड़े राज्य सरकारों से मिली जानकारी के आधार पर दी गई है.
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री ने क्या जवाब दिया
सरकार की ओर से स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रताप राव जाधव ने लिखित जवाब दिया है. जवाब के मुताबिक़ पिछले 15 सालों में देश में सिजेरियन डिलीवरी से पैदा होने वाले बच्चों की संख्या 4 गुने से भी ज्यादा बढ़ गई है. जानकारी के मुताबिक़ वर्ष 2008 - 09 में कुल संस्थागत डिलीवरी की संख्या 1.88 करोड़ थी, जिसमें ऑपरेशन से डिलीवरी की संख्या करीब 12 लाख थी. यानी ऑपरेशन से कुल 6.4 फ़ीसदी बच्चे पैदा हुए. इसी तरह 2014 -15 के दौरान 13.5 फ़ीसदी बच्चे ऑपरेशन की प्रक्रिया से पैदा हुए.
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तीन सालों में तेजी से बढ़े मामले
अगर पिछले तीन सालों में देखें तो ये संख्या और ज़्यादा बढ़ गई है. 2022 -23 के दौरान जहां कुल पैदा हुए बच्चों में से 23.8 फीसदी बच्चे तो वहीं 2023-24 के दौरान पैदा हुए बच्चों में से 25.27 फ़ीसदी बच्चे ऑपरेशन प्रक्रिया से पैदा हुए. 2024-25 के दौरान जहां देश में कुल 1.97 करोड़ बच्चों की पैदाइश रिकॉर्ड की गई, जिसमें 54 लाख यानि क़रीब 27.46 फीसदी बच्चे ऑपरेशन की प्रक्रिया से ही पैदा हुए.
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सिजेरियन डिलीवरी परेशानी का सबब
पिछले कई सालों से इस बात पर चिंता जताई जाती रही है कि देश में लागतार प्राकृतिक डिलीवरी की बजाए ऑपरेशन से डिलीवरी की संख्या बढ़ रही है. सरकार ने अपने जवाब में बताया है कि ऐसे मामलों में ज़्यादातर डॉक्टर की सलाह ही मानी जाती है. हालांकि जवाब में एक राहत का आंकड़ा देते हुए सरकार ने बताया कि पिछले 15 सालों में मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर में काफ़ी कमी देखने को मिली है.
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