- Hardik Pandya ने IPL 2026 में बैट, बॉल दोनों के साथ संघर्ष किया है, MI प्लेऑफ की रेस से बाहर हो चुकी है.
- पिछले तीन मैच मिस करने वाले हार्दिक ट्रेनिंग करते नजर आए, जिससे KKR के खिलाफ उनकी वापसी की उम्मीदें बढ़ गईं.
- कप्तानी का दबाव, लगातार आलोचना, फिटनेस समस्याओं ने हार्दिक का प्रदर्शन प्रभावित किया. अब भी उनके पास मौका है.
IPL 2026 में स्टार खिलाड़ियों से सजी मुंबई इंडियंस ने बेहद निराशाजनक प्रदर्शन किया और टीम के खिलाड़ियों के बीच इस मामले में कप्तान Hardik Pandya सबसे ऊपर रहे. वजह सिर्फ उनकी कप्तानी नहीं थी, बल्कि बैट और बॉल दोनों से उनका प्रदर्शन, टीम की लगातार हार, फैंस की नाराजगी और फिर चोट के कारण बाहर होना भी चर्चा का बड़ा विषय बना. अब कोलकाता नाइट राइडर्स के खिलाफ मुकाबले से पहले हार्दिक का पूरी ताकत के साथ ट्रेनिंग करना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि वह वापसी के लिए तैयार हैं.
मुंबई इंडियंस के लिए यह सीजन किसी बुरे सपने से कम नहीं रहा. पांच बार की चैंपियन टीम प्लेऑफ की रेस से बाहर हो चुकी है. टीम ने 12 मैचों में केवल चार जीते हैं और पॉइंट टेबल में अंतिम दो टीमों में शामिल है. ऐसे में हार्दिक पंड्या की कप्तानी और व्यक्तिगत प्रदर्शन दोनों सवालों के घेरे में है.
That final over feeling 📈📉
— Mumbai Indians (@mipaltan) May 19, 2026
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क्या KKR के खिलाफ खेलेंगे हार्दिक?
पीठ की मांसपेशियों में खिंचाव के कारण हार्दिक पिछले तीन मैचों से टीम से बाहर हैं. 2 मई को चेन्नई सुपर किंग्स के खिलाफ खेलने के बाद से हार्दिक मैदान पर नहीं दिखे हैं. उनकी गैर मौजूदगी में टीम की कप्तानी सूर्यकुमार यादव और जसप्रीत बुमराह ने की. पंजाब किंग्स के खिलाफ धर्मशाला में हुए मुकाबले के लिए तो हार्दिक टीम के साथ भी नहीं जा सके थे. बुमराह ने कप्तानी संभाली और टीम को जीत दिलाई. हालांकि अब हार्दिक नेट्स में पसीना बहाते दिखे हैं जो टीम के लिए राहत की खबर है. सपोर्ट स्टाफ हों या फैंस दोनों उम्मीद कर रहे हैं कि हार्दिक अंतिम दो मुकाबले में बागडोर संभालें और टूर्नामेंट से सम्मानजनक विदाई दिलाएं. लेकिन सवाल सिर्फ फिटनेस का नहीं है. सवाल यह भी है कि क्या हार्दिक इस सीजन की निराशा को पीछे छोड़ पाएंगे?

आंकड़े बता रहे हैं संघर्ष की कहानी
हार्दिक पंड्या का यह आईपीएल सीजन उनके करियर के सबसे कमजोर सीजन में गिना जा सकता है. उन्होंने अब तक सिर्फ 146 रन बनाए हैं. उनका स्ट्राइक रेट करीब 136 का रहा है, जो टी20 क्रिकेट में बहुत खराब नहीं माना जाता, लेकिन हार्दिक जैसे मैच फिनिशर से कहीं ज्यादा उम्मीद रहती है. सबसे बड़ा झटका उनकी गेंदबाजी से मिला. उन्होंने सिर्फ चार विकेट लिए और उनका इकॉनमी रेट लगभग 12 रहा. यानी जब भी कप्तान ने खुद गेंद संभाली, विरोधी बल्लेबाजों ने खुलकर रन बनाए.
एक ऑलराउंडर के तौर पर हार्दिक की सबसे बड़ी ताकत बैलेंस मानी जाती है. लेकिन इस बार वह न बल्ले से मैच जिता पाए और न गेंद से दबाव बना पाए. यही वजह रही कि मुंबई इंडियंस पूरे सीजन सही कॉम्बिनेशन नहीं खोज पाई.
ऐसा नहीं है कि हार्दिक ने मुंबई इंडियंस के लिए केवल IPL 2026 में ही निराशाजनक प्रदर्शन किया है. पिछले सीजन यानी IPL 2025 में भी हार्दिक ने 15 मैचों में केवल 224 रन ही बनाए थे. हालांकि तब सूर्यकुमार यादव और रोहित शर्मा जैसे नामी बल्लेबाजों ने रन बटोरे और बुमराह जैसे गेंदबाजों ने विकेटें चटकाईं थीं जिससे मुबंई इंडियंस प्लेऑफ तक पहुंच गई थी. हालांकि जब हार्दिक पहली बार मुंबई के कप्तान बने और IPL 2024 में टीम की बागडोर संभाली तब टीम ने बेहद निराशाजनक प्रदर्शन किया था और 10 टीमों के बीच आखिरी पायदान पर रही थी. उस टूर्नामेंट में MI ने 14 में से केवल 4 मैच ही जीते थे. हार्दिक ने उस टूर्नामेंट में तो इस बार से भी खराब प्रदर्शन किया था. तब हार्दिक 14 मैचों में 18 की औसत से केवल 216 रन ही बना सके थे.
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घर के मैदान पर भी नहीं चला बल्ला
इस सीजन हार्दिक ने आठ मैच खेले, जिनमें पांच मुकाबले घरेलू मैदान पर थे. आमतौर पर वानखेड़े स्टेडियम बल्लेबाजों के लिए मददगार माना जाता है और हार्दिक यहां लंबे-लंबे शॉट खेलने के लिए जाने जाते हैं. लेकिन इस बार वह घरेलू मैदान का फायदा नहीं उठा सके. उन्होंने अपने 146 रन में से 104 रन घरेलू मैदान पर बनाए, लेकिन उनका औसत सिर्फ 20.86 रहा. यह आंकड़ा दिखाता है कि वह बड़ी पारियां खेलने में नाकाम रहे. शुरुआत जरूर मिली, लेकिन उसे वो बड़े स्कोर में तब्दील नहीं कर सके.
सीजन की शुरुआत में केएलआर के खिलाफ 18 रन बनाकर उन्होंने फिनिशर की भूमिका निभाई थी और आरसीबी के खिलाफ 40 रन की पारी ने उम्मीद जगाई थी कि हार्दिक कुछ बड़ा करेंगे, पर उसके बाद उनका बल्ला लगभग शांत ही रहा.

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कप्तानी या फॉर्म की समस्या?
क्रिकेट के जानकारों का मानना है कि हार्दिक इस सीजन में दोहरी लड़ाई लड़ते दिखे. एक तरफ कप्तानी का भारी दबाव था, दूसरी तरफ खुद की फॉर्म. जब किसी खिलाड़ी को कप्तान बनाया जाता है, तो उससे उम्मीद सिर्फ रन या विकेट की नहीं होती. उससे टीम को संभालने, माहौल बनाने और मुश्किल समय में फैसले लेने की उम्मीद भी होती है. हार्दिक इस मोर्चे पर भी संघर्ष करते दिखे. मुंबई इंडियंस की टीम पूरे सीजन में अस्थिर नजर आई. कभी बल्लेबाजी फेल हुई, कभी गेंदबाजी. कई बार प्लेइंग इलेवन को लेकर भी सवाल उठे. टीम में लगातार बदलाव हुए. इससे खिलाड़ियों का आत्मविश्वास भी प्रभावित हुआ. हार्दिक के शरीर की भाषा भी कई मुकाबलों में दबाव में नजर आई. मैदान पर उनकी आक्रामकता कई बार दिखी, लेकिन वह टीम को ऊर्जा देने के बजाय तनाव में बदलती दिखाई दी.

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क्या फैंस का दबाव पड़ा भारी?
2023 और 2024 के सीजन में हार्दिक लगातार सुर्खियों में रहे. पहले गुजरात टाइटंस को खिताब दिलाना, फिर मुंबई इंडियंस में बतौर कप्तान आना. इन सबने उन्हें चर्चा के केंद्र में रखा. पर साथ ही फैन्स का गुस्सा भी दिखाई दिया. सोशल मीडिया पर लगातार उनकी आलोचना हुई. स्टेडियम में हूटिंग तक देखने को मिली. क्रिकेटर भले प्रोफेशनल हों, लेकिन लगातार आलोचना किसी भी खिलाड़ी के आत्मविश्वास को प्रभावित करती है. कई पूर्व क्रिकेटरों ने भी कहा कि हार्दिक को थोड़ा समय देने की जरूरत है. कप्तानी बदलना हमेशा आसान नहीं होता. वो भी तब जब रोहित शर्मा जैसे सफल कप्तान की जगह उन्हें दी गई हो. ऐसी किसी भी टीम को संभालना हमेशा एक चुनौती भरा काम होता है.
बेशक क्रिकेट एक टीम गेम है और केवल एक बल्लेबाज या गेंदबाज पूरे टूर्नामेंट को नहीं बचा सकता. पर हार्दिक से जहां बैटिंग में फिनिशर की भूमिका तो वहीं बॉलिंग में मुख्य गेंदबाजों का साथ देने वाला बनने की उम्मीद थी, लेकिन वो खुद ही संघर्ष करते रहे. न तो हार्दिक की गेंदबाजी में पैनापन दिखा और न ही उन्होंने कोई मुश्किल ओवर ही डाले. उन्हें बीच के ओवरों में विकेटें निकालते और डेथ ओवर में उपयोगी साबित होते देखा गया है. पर इस बार उनकी गेंदों में न तो गति थी और न ही वैरिएशन.
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क्या फिटनेस सबसे बड़ी चिंता है?
हार्दिक के करियर की सबसे बड़ी समस्या हमेशा फिटनेस रही है. वह मैच विनर खिलाड़ी तो हैं पर अब तक के करियर में चोटों ने उन्हें बेहद परेशान किया है. कभी पीठ, कभी टखना, कभी मांसपेशियों की समस्या. एक ऑलराउंडर होने के कारण हार्दिक के शरीर पर ज्यादा दबाव पड़ता है. बैटिंग के साथ-साथ अपनी गेंदबाजी पर भी उतना ही ध्यान देना होता है. यही वजह है कि उनकी फिटनेस पर हमेशा नजर रहती है. पिछले लगातार मैच पीठ की मांसपेशी में खिंचाव आने की वजह से नहीं खेल सके, जिसे एक छोटी चोट नहीं समझा जा रहा. जानकारों का मानना है कि टीम मैनेजमेंट को हार्दिक के वर्कलोड मैनेजमेंट पर काम करना चाहिए. हार्दिक टीम कॉम्बिनेशन का एक अहम हिस्सा हैं, ऐसे में उनके फिट रहने से टीम संतुलित रहेगी.
क्या मुंबई इंडियंस को बड़े बदलाव की जरूरत है?
एक बात स्पष्ट कर दें कि IPL 2026 में मुंबई इंडियंस की असफलता सिर्फ हार्दिक की वजह से नहीं हुई है. पूरी टीम कई मोर्चों पर कमजोर दिखी. लेकिन कप्तान होने के कारण सबसे ज्यादा सवाल उन्हीं पर उठे. अब चर्चा यह भी शुरू हो गई है कि अगले सीजन में टीम किस दिशा में जाएगी. क्या हार्दिक ही कप्तान बने रहेंगे? क्या टीम मैनेजमेंट बड़े बदलाव करेगा? क्या सीनियर खिलाड़ियों की भूमिका बदलेगी? इन सवालों के जवाब अभी भविष्य में छिपे हैं. लेकिन इतना साफ है कि मुंबई इंडियंस को नए सिरे से सोचने की जरूरत है.

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वापसी का मौका अभी भी बाकी
क्रिकेट की सबसे बड़ी खूबी यही है कि यहां वापसी का मौका हमेशा रहता है. हार्दिक पंड्या जैसे खिलाड़ी को सिर्फ एक मैच चाहिए होता है तस्वीर बदलने के लिए. अगर वह केकेआर के खिलाफ वापसी करते हैं और अच्छा प्रदर्शन करते हैं, तो यह उनके लिए मानसिक तौर पर भी बहुत जरूरी होगा. खराब सीजन का अंत सकारात्मक तरीके से करना किसी भी खिलाड़ी के आत्मविश्वास के लिए अहम होता है. हार्दिक के पास अनुभव है, आक्रामकता है और मैच जिताने की क्षमता भी. लेकिन अब उन्हें अपने खेल में स्थिरता लानी होगी. उन्हें कप्तान और एक खिलाड़ी के रूप में खुद को फिर साबित करना होगा.
भारतीय टीम के नजरिए से भी हार्दिक की फिटनेस और फॉर्म बेहद अहम है. लिहाजा हार्दिक की फिटनेस न केवल आईपीएल में मुंबई इंडियंस बल्कि भारतीय क्रिकेट के लिए भी चिंता का विषय है.
फिलहाल सबकी नजरें मुंबई इंडियंस बनाम कोलकाता नाइट राइडर्स मुकाबले पर हैं. अगर हार्दिक मैदान पर उतरते हैं, तो यह सिर्फ एक खिलाड़ी की वापसी नहीं होगी. यह उस कप्तान की वापसी होगी, जो पूरे सीजन सवालों से घिरा रहा और अब अपने प्रदर्शन से जवाब देने की कोशिश में है.
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