Hanuma Vihari's on Vaibhav Sooryavanshi: वैभव सूर्यवंशी एक बार फिर से चर्चाओं में हैं. सूर्यवंशी इंग्लैंड के खिलाफ करियर के आगाज से शुरुआती तीन मैचों में नाकामी के बाद विफलता की वजह से चर्चा में थे, लेकिन जिंबाब्वे पहुंचने के बाद पहले ही टी20 में जड़े अर्द्धशतक से एक बार फिर से दुनिया के आकर्षण रूपी सुई सूर्यवंशी की तरफ घूम गई है. करियर के चौथे ही मैच में जिंबाब्वे के खिलाफ अर्द्धशतक जड़कर सूर्यवंशी इतिहास में सबसे कम उम्र में अंतरराष्ट्रीय अर्द्धशतक जड़ने वाले बल्लेबाज बन गए. अब पूर्व बल्लेबाज हनुमा विहारी ने 15 वर्षीय खिलाड़ी की विशेष रूप से तारीफ की है. उन्होंने कहा कि यह बहुत ही शानदार बात है कि वैभव पिछली असफलताओं के बावजूद दबाव को संभालने तथा अपने स्वाभाविक खेल पर टिके रहने में कामयाब रहे. विहारी ने एक यू-ट्यूब से बातचीत में कहा, 'कल्पना कीजिए कि वैभव सूर्यवंशी पर कितना दबाव रहा होगा.'
विहारी ने आगे कहा, 'आप 15 साल के हैं, लेकिन इतनी सारी उम्मीदें हैं. आपने अच्छा प्रदर्शन नहीं किया है और वहां जाकर निडर होना, वह क्षमता और आत्मविश्वास का स्तर रखना और फिर से अपना स्वाभाविक खेल खेलना, क्या खिलाड़ी है. वह एक्स-फैक्टर खिलाड़ी हैं.' किशोरावस्था के बल्लेबाजी सनसनी वैभव सूर्यवंशी ने जिंबाब्वे के खिलाफ शुरुआती टी20 मैच में अपने मैच जिताऊ प्रदर्शन पर विचार करते हुए कहा कि करियर की शुरुआत में ही प्रभाव डालना आगामी मुकाबलों के लिए आत्मविश्वास बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.
तीन मैचों की श्रृंखला के पहले मैच के दौरान सूर्यवंशी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अर्धशतक बनाने वाले सबसे कम उम्र के खिलाड़ी बन गए. ओपनर ने अपने पहले टी20ई अर्धशतक के लिए 19 गेंदों में 50 रन बनाए. इससे उन्होंने नेपाल के कुशल मल्ला को पीछे छोड़ दिया, जो 2020 में यूएसए के खिलाफ वनडे अर्धशतक बनाते समय 15 साल और 340 दिन के थे. वहीं, सचिन तेंदुलकर ने 1989 में फैसलाबाद में अपने टेस्ट डेब्यू दौरे पर पाकिस्तान के खिलाफ 59 रन 16 साल और 213 दिन की उम्र में बनाए थे.
सूर्यवंशी का उम्र से बड़ा बयान
बीसीसीआई डॉट टीवी द्वारा साझा किए गए एक वीडियो में उन्होंने कहा, 'जब यह आपके करियर का शुरुआती चरण होता है और आपको इस तरह की पारियां जल्दी मिल जाती हैं और आप अच्छा प्रदर्शन करते हैं तो यह आगामी मैचों के लिए आत्मविश्वास पैदा करता है. ऐसा लगा जैसे मैं अपने ज़ोन में था और मैंने सिर्फ अपनी ताकत का समर्थन किया. बस इतना ही था. मैं इस अर्धशतक को अपने परिवार, अपने कोचों और हर उस व्यक्ति को समर्पित करना चाहूंगा जिन्होंने हर अच्छे और बुरे दौर में मेरी यात्रा में मेरा समर्थन किया है.'
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